राजस्थान के सरकारी और मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में अध्ययन कर रहे लाखों विद्यार्थियों के लिए राज्य सरकार ने छात्रवृत्ति प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब विद्यार्थियों को विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए अलग-अलग आवेदन प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। शिक्षा विभाग ने नई व्यवस्था लागू करते हुए यह जिम्मेदारी सीधे विद्यालय प्रशासन को सौंप दी है। इस फैसले के बाद छात्रों और अभिभावकों को आवेदन संबंधी जटिल प्रक्रियाओं से काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 में विद्यार्थियों को कुल 19 प्रकार की छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा। इन योजनाओं की पूरी प्रक्रिया अब डिजिटल माध्यम से संचालित होगी। सरकारी और मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों के प्रधानाचार्य ‘शाला दर्पण बेनिफिशियरी स्कीम पोर्टल’ तथा ‘प्राइवेट स्कूल पोर्टल’ के जरिए विद्यार्थियों के छात्रवृत्ति प्रस्ताव तैयार कर ऑनलाइन जमा करेंगे। इससे आवेदन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और त्रुटिरहित बनने की संभावना जताई जा रही है।
शिक्षा विभाग का मानना है कि कई बार विद्यार्थी जानकारी के अभाव, तकनीकी दिक्कतों या दस्तावेजों की कमी के कारण छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद विद्यालय स्तर पर ही विद्यार्थियों का डेटा अपडेट किया जाएगा और पात्र छात्रों के प्रस्ताव सीधे पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। इससे छात्रों को अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और समय पर छात्रवृत्ति मिलने की प्रक्रिया भी आसान होगी।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट द्वारा जारी निर्देशों में बताया गया है कि प्रस्ताव तैयार कर प्रमाणित करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है। विद्यार्थियों के प्रवेश के समय ही शाला दर्पण के प्रपत्र-9 और लाभकारी योजनाओं से जुड़े छात्र सूचना एवं रिजल्ट मॉड्यूल को अपडेट किया जाएगा। इसी आधार पर छात्रवृत्ति प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र विद्यार्थियों को समय पर योजनाओं का लाभ मिल सके और किसी प्रकार की तकनीकी बाधा सामने न आए।
नई व्यवस्था के तहत कई महत्वपूर्ण छात्रवृत्ति योजनाओं को शामिल किया गया है। कक्षा 6 से 10 तक अध्ययनरत अति पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए पूर्व मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना संचालित की जाएगी। वहीं कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों के लिए केंद्र सरकार की पीएम यशस्वी योजना के तहत ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा कक्षा 11 और 12 के विद्यार्थियों के लिए उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाएं भी लागू रहेंगी, जिनका लाभ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, डीएनटी, आर्थिक पिछड़ा वर्ग और अति पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं को मिलेगा।
राज्य सरकार ने केवल सामान्य छात्रवृत्ति योजनाओं तक ही इस व्यवस्था को सीमित नहीं रखा है, बल्कि सामाजिक रूप से विशेष परिस्थितियों में रहने वाले परिवारों के बच्चों को भी इसमें शामिल किया है। जोखिमपूर्ण व्यवसायों से जुड़े परिवारों के बच्चों, करगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों या स्थायी रूप से दिव्यांग हुए सैनिकों के बच्चों तथा भूतपूर्व सैनिकों की प्रतिभावान पुत्रियों के लिए भी विशेष छात्रवृत्ति योजनाएं संचालित की जाएंगी। इससे उन परिवारों के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर अवसर मिल सकेंगे जो आर्थिक या सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए भी कई प्रोत्साहन योजनाएं लागू रहेंगी। कक्षा 10वीं में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होने वाले प्रतिभावान जनजाति विद्यार्थियों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। वहीं कक्षा 11वीं और 12वीं में अध्ययनरत जनजाति छात्राओं को भी योजनाओं का लाभ मिलेगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और छात्राओं की स्कूलों में निरंतर उपस्थिति सुनिश्चित हो सकेगी।
छात्रवृत्ति प्रक्रिया को डिजिटल रूप से अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र प्रवर्तित उत्तर मैट्रिक योजनाओं में फेस ऑथेंटिकेशन प्रणाली भी लागू की गई है। विद्यार्थियों को एनएसपी ऐप के माध्यम से फेस ऑथेंटिकेशन कर ओटीआर जनरेट करना अनिवार्य होगा। विभाग के अनुसार इससे फर्जी आवेदन और तकनीकी गड़बड़ियों पर रोक लगेगी तथा वास्तविक पात्र विद्यार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंच सकेगा।
इधर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के अंतर्गत संचालित उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं की आवेदन तिथि भी बढ़ा दी है। पहले आवेदन की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 निर्धारित थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 31 मई 2026 कर दिया गया है। विभाग का कहना है कि कई शिक्षण संस्थानों और विद्यार्थियों द्वारा समय सीमा बढ़ाने की मांग की जा रही थी, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। इससे उन विद्यार्थियों को राहत मिलेगी जो किसी कारणवश समय पर आवेदन नहीं कर पाए थे।


