राजस्थान की राजनीति में बयानबाजी का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अजमेर दौरे के दौरान प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार दोनों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राजस्थान में कानून व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ रही है और राज्य में आतंक तथा अत्याचार का माहौल बढ़ता जा रहा है। जूली ने सलूम्बर में बच्चों की मौत के मामले को बेहद गंभीर बताते हुए सरकार पर लापरवाही और मामले को दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार को सद्बुद्धि आए, इसके लिए वे प्रार्थना करेंगे।
टीकाराम जूली अजमेर में नौसर माता मंदिर समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने राज्य सरकार के ढाई साल के कार्यकाल पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार का अब पतन शुरू हो चुका है और जनता का भरोसा लगातार कम हो रहा है। उनके अनुसार सरकार जनता से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता नहीं दिखा रही और प्रशासनिक स्तर पर निर्णय क्षमता कमजोर पड़ चुकी है।
सलूम्बर में बच्चों की मौत के मामले पर बोलते हुए जूली ने कहा कि वह हाल ही में वहां का दौरा कर चुके हैं, जहां 15 बच्चों की मौत हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके दौरे के बाद ही सरकार के मंत्री वहां पहुंचे, जिससे साफ है कि सरकार शुरू से मामले को गंभीरता से नहीं ले रही थी। उन्होंने कहा कि यह संवेदनशील और मानवीय मुद्दा है, लेकिन सरकार इसे दबाने का प्रयास कर रही है। जूली ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए, ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।
राज्य सरकार की कार्यशैली पर हमला जारी रखते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में कई गंभीर मुद्दे हैं, लेकिन सरकार उनका समाधान करने के बजाय केवल राजनीतिक प्रबंधन में व्यस्त है। उन्होंने कहा कि जनता अब सब देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब भी देगी।
पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर भी टीकाराम जूली ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह सक्रिय है और पार्टी के वरिष्ठ नेता लगातार दौरे कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से राहुल गांधी के चुनावी अभियानों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस जनता के बीच जाकर मुद्दों पर बात कर रही है। जूली ने दावा किया कि जनता अब वैकल्पिक राजनीति चाहती है और कांग्रेस को सकारात्मक समर्थन मिल रहा है।
इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा। जूली ने आरोप लगाया कि चुनावी भाषणों में शब्दों का स्तर गिर चुका है और भाजपा एक बार फिर हिंदू-मुस्लिम मुद्दे को सामने लाकर चुनावी माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि असली मुद्दों जैसे रोजगार, महंगाई, किसानों की समस्याएं और विकास को पीछे छोड़कर भावनात्मक राजनीति की जा रही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। जूली के अनुसार चुनाव से पहले डर का माहौल बनाया जाता है और विपक्षी दलों को निशाना बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि भाजपा की यह कार्यशैली लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और देश की जनता इसे समझ रही है।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण की अवधारणा और इसकी शुरुआत कांग्रेस के दौर में हुई थी। जूली ने आरोप लगाया कि भाजपा ने लंबे समय तक इसका विरोध किया और बाद में राजनीतिक लाभ लेने के लिए महिला आरक्षण बिल पारित कराया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में बिल पारित होने के बावजूद तीन वर्षों तक इसे लागू नहीं किया गया, जिससे सरकार की नीयत पर सवाल उठते हैं।
जूली ने कहा कि हाल में जो प्रस्ताव लाया गया, वह केवल संशोधन से जुड़ा था। उनके अनुसार भाजपा परिसीमन के जरिए एक छुपा एजेंडा लागू करना चाहती थी, जो सफल नहीं हो सका। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही महिला आरक्षण को फिर मुद्दा बनाया जा रहा है, जबकि इसे पहले ही लागू किया जा सकता था।
पंचायत चुनाव को लेकर भी उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर सीधा हमला बोला। जूली ने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि पंचायत चुनाव समय पर कराए जाएं, लेकिन सरकार जानबूझकर चुनाव टाल रही है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री अपनी कुर्सी बचाने और राजनीतिक नुकसान से बचने के लिए चुनाव नहीं करा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार को हार का डर है, इसलिए रोज नए कारण बताकर चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालयों की टिप्पणी और निर्देशों के बावजूद चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए अच्छा संकेत नहीं है। जूली ने कहा कि स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव समय पर होना लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है।
ईडब्ल्यूएस आरक्षण के मुद्दे पर भी उन्होंने कांग्रेस की नीति का उल्लेख किया। जूली ने कहा कि राजस्थान में कांग्रेस सरकार ने सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए आरक्षण प्रक्रिया को सरल बनाया था। उन्होंने कहा कि यदि वर्ष 2029 में केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनती है तो इस मॉडल को पूरे देश में लागू करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि गरीब वर्गों को वास्तविक लाभ मिल सके।


