राजस्थान की राजधानी जयपुर में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण और भावनात्मक कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जहां कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को मात देने वाले लोगों की जिजीविषा और साहस का सम्मान किया गया। यह अवसर भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल द्वारा आयोजित 23वें ‘कैंसर सर्वाइवर्स डे’ का था, जिसमें देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे और प्रदेश के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर की उपस्थिति ने इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया।
कार्यक्रम का आयोजन शहर के महाराणा प्रताप ऑडिटोरियम में किया गया, जहां बड़ी संख्या में कैंसर सर्वाइवर्स, डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और आम लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उन लोगों से सीधा संवाद किया, जिन्होंने अपनी इच्छाशक्ति, उपचार और सकारात्मक सोच के जरिए कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को हराया है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग समाज के लिए प्रेरणा हैं और यह साबित करते हैं कि सही इलाज और मजबूत मानसिकता से बड़ी से बड़ी चुनौती को भी पार किया जा सकता है।
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और केंद्र सरकार की योजनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि देशभर में 450 से अधिक डे-केयर सेंटर संचालित किए जा रहे हैं, ताकि कैंसर मरीजों को समय पर उपचार मिल सके। इसके साथ ही आयुष्मान आरोग्य योजना में एंटी-कैंसर दवाओं को शामिल किया जा रहा है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को राहत मिलेगी। उन्होंने सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान को भी एक महत्वपूर्ण पहल बताया और कहा कि इससे आने वाले समय में कैंसर के मामलों में कमी लाई जा सकती है।
इस कार्यक्रम में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने एक गंभीर मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह राज्य सरकार ‘टीबी मुक्त राजस्थान’ के लक्ष्य को लेकर काम कर रही है, उसी तरह अब ‘कैंसर मुक्त राजस्थान’ का संकल्प भी लेना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से सीमावर्ती जिलों श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में बढ़ते कैंसर के मामलों को लेकर चिंता व्यक्त की। राज्यपाल ने कहा कि इन क्षेत्रों में प्रदूषित पानी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आया है, जो लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।
उन्होंने खुलासा किया कि पड़ोसी राज्य पंजाब से आने वाला केमिकल युक्त पानी इन जिलों में पहुंच रहा है, जिससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने पंजाब के राज्यपाल को पत्र भी लिखा है और संबंधित मंत्री को भी अवगत कराया है, लेकिन अभी तक इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यह एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन सकती है।
चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने अपने संबोधन में कैंसर को ‘साइलेंट किलर’ बताते हुए कहा कि यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर को प्रभावित करती है और कई बार देर से पता चलने पर इसका इलाज कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि कैंसर का उपचार करना केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह मानवता की सेवा का सबसे बड़ा रूप है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर पूरी तरह गंभीर है और इसी वजह से इस बार स्वास्थ्य बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है।
खींवसर ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि हर व्यक्ति को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिलें, ताकि कैंसर जैसी बीमारियों का समय रहते पता लगाया जा सके और उनका प्रभावी उपचार किया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिसमें आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता, डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना और जागरूकता अभियान चलाना शामिल है।
इस आयोजन ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि कैंसर से लड़ाई केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए जागरूकता, स्वच्छ वातावरण और बेहतर जीवनशैली भी उतनी ही जरूरी है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कैंसर सर्वाइवर्स की कहानियों से प्रेरणा ली और यह संदेश भी दिया गया कि समय पर जांच और सही उपचार से इस बीमारी को हराया जा सकता है।


