राजस्थान के टोंक जिले को नई प्रशासनिक नेतृत्व मिला है, जहां टीना डाबी ने शुक्रवार को जिला कलेक्टर के रूप में पदभार ग्रहण किया। पदभार संभालते ही उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि आमजन को राहत देना और उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना प्रशासन का पहला लक्ष्य होगा। उनके इस बयान से यह संकेत मिल गया है कि टोंक जिले में प्रशासनिक कामकाज को अधिक जनकेन्द्रित और परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
पदभार ग्रहण करने के दौरान मीडिया से बातचीत में टीना डाबी ने कहा कि मुख्यमंत्री संपर्क पोर्टल पर दर्ज सभी परिवादों को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन शिकायतों का केवल कागजी निपटान नहीं होगा, बल्कि उनका फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाएगा ताकि समाधान की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करने की बात कही कि हर शिकायत का निपटान तय समय सीमा के भीतर और पारदर्शिता के साथ किया जाए, जिससे आमजन का प्रशासन पर भरोसा मजबूत हो।
नई कलेक्टर ने राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। उन्होंने कहा कि सरकार की लगभग दो दर्जन प्रमुख योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसे पूरी गंभीरता से निभाया जाएगा। उनके अनुसार, योजनाओं का उद्देश्य तभी पूरा होता है जब उनका लाभ वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे, इसलिए इस दिशा में विशेष प्रयास किए जाएंगे।
विकास कार्यों को लेकर भी टीना डाबी ने स्पष्ट रूप से अपनी मंशा जाहिर की। उन्होंने कहा कि जिले में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की जाएगी और जहां जरूरत होगी, वहां सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर जमीनी स्तर पर स्थिति का आकलन करने और उसके आधार पर योजनाओं को गति देने की बात कही। उनका मानना है कि विकास केवल कागजों पर नहीं, बल्कि वास्तविक रूप से जमीन पर दिखना चाहिए, तभी जनता को इसका लाभ मिल सकता है।
उन्होंने ‘विकसित ग्राम’ और ‘विकसित वार्ड’ जैसे अभियानों को भी प्राथमिकता देने की बात कही। इन अभियानों के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। टीना डाबी ने कहा कि इन अभियानों के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि जिले के हर क्षेत्र में समान रूप से विकास सुनिश्चित किया जा सके।
नई कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन और आमजन के बीच संवाद को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनका दरवाजा हमेशा जनता के लिए खुला रहेगा और कोई भी व्यक्ति अपनी समस्या लेकर सीधे उनसे मिल सकता है। उनका यह बयान प्रशासन को अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
टोंक जिले को आगे बढ़ाने के अपने लक्ष्य को लेकर टीना डाबी ने कहा कि यह केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की भी भागीदारी जरूरी है। उन्होंने सभी से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही जिले का समग्र विकास संभव है।
गौरतलब है कि 31 मार्च को राजस्थान में प्रशासनिक स्तर पर बड़े पैमाने पर फेरबदल किया गया था, जिसके तहत 26 जिलों के कलेक्टर बदले गए। इसी क्रम में टीना डाबी को टोंक जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह बदलाव राज्य सरकार की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
नई जिम्मेदारी मिलने के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि टीना डाबी अपने अनुभव और कार्यशैली के जरिए टोंक जिले में किस तरह के बदलाव लाती हैं। उन्होंने जिस तरह से अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया है, उससे यह उम्मीद की जा रही है कि जिले में प्रशासनिक सुधार और विकास कार्यों में तेजी देखने को मिलेगी।


