मनीषा शर्मा, अजमेर। शहर में बुधवार को उस समय तनावपूर्ण हालात बन गए जब जिला न्यायालय के बाहर स्पीड ब्रेकर निर्माण की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे वकीलों ने पुलिस की मौजूदगी में ही लोक निर्माण विभाग (PWD) के एक अधिकारी के साथ मारपीट कर दी। यह घटना जयपुर रोड पर जिला न्यायालय के मुख्य प्रवेश द्वार के पास हुई, जहां वकीलों ने अपनी मांगों को लेकर सड़क को दोनों ओर से जाम कर दिया था। घटना के बाद शहर में प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
स्पीड ब्रेकर की मांग से शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, जिला न्यायालय के बाहर जयपुर रोड पर लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं को लेकर वकील लंबे समय से स्पीड ब्रेकर बनाने की मांग कर रहे थे। इसी मांग को लेकर बुधवार को बड़ी संख्या में अधिवक्ता सड़क पर उतर आए और यातायात को पूरी तरह से बाधित कर दिया। सड़क जाम की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और वकीलों से बातचीत कर स्थिति को शांत करने का प्रयास किया।
बातचीत के दौरान भड़का आक्रोश
स्थिति को नियंत्रित करने और मांगों पर चर्चा के लिए पुलिस प्रशासन ने लोक निर्माण विभाग के एक अधिकारी को मौके पर बुलाया। उद्देश्य यह था कि विभागीय अधिकारी वकीलों को तकनीकी और प्रशासनिक स्थिति से अवगत कराए और समाधान का भरोसा दिलाए। हालांकि, बातचीत के दौरान कुछ वकील अचानक आक्रोशित हो गए। देखते ही देखते विवाद ने उग्र रूप ले लिया और कई अधिवक्ताओं ने PWD अधिकारी पर हमला कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अधिकारी को सड़क पर दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया। यह पूरी घटना पुलिस बल की मौजूदगी में हुई, जिससे हालात और गंभीर हो गए। पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए अधिकारी को वकीलों के बीच से निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। यदि समय रहते पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो स्थिति और बिगड़ सकती थी।
ढाई घंटे बाद खुला सड़क जाम
घटना के बाद माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। जयपुर रोड पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा वकीलों को आश्वासन दिए जाने और मांगों पर विचार करने का भरोसा दिलाने के बाद करीब ढाई घंटे बाद सड़क जाम हटाया गया और यातायात सामान्य हो सका।
मारपीट के विरोध में PWD का पलटवार
वकीलों द्वारा की गई मारपीट की घटना से लोक निर्माण विभाग में भारी आक्रोश फैल गया। इसके विरोध में PWD के अधिकारी, कर्मचारी और ठेकेदार एकजुट होकर सड़कों पर उतर आए। सभी ने रैली निकालकर कलेक्ट्रेट चेंबर के बाहर धरना शुरू कर दिया। इस धरने में महिला अधिकारी और कर्मचारी भी बड़ी संख्या में शामिल हैं।
विशेष रूप से उल्लेखनीय यह है कि धरने में एक गर्भवती महिला अधिकारी भी मौजूद रहीं, जबकि कुछ अन्य महिला अधिकारी अपने छोटे बच्चों के साथ धरना स्थल पर बैठी नजर आईं। इससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।
कार्रवाई नहीं हुई तो कार्य बहिष्कार की चेतावनी
PWD अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मारपीट करने वाले वकीलों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे सामूहिक रूप से कार्य बहिष्कार करेंगे। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि यदि सरकारी अधिकारियों की सुरक्षा ही सुनिश्चित नहीं है, तो वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन कैसे करेंगे। उन्होंने इसे सरकारी तंत्र पर हमला बताते हुए दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग की है।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
इस पूरे घटनाक्रम ने अजमेर प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर वकीलों की मांगें हैं, तो दूसरी ओर सरकारी अधिकारियों की सुरक्षा और सम्मान का सवाल है। पुलिस और जिला प्रशासन पर अब निष्पक्ष कार्रवाई का दबाव बढ़ता जा रहा है। यदि समय रहते संतुलित और कड़ा निर्णय नहीं लिया गया, तो यह विवाद और गहराने की आशंका जताई जा रही है।


