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बीकानेर मंडी में बारिश से भीगा अनाज, किसानों को भारी नुकसान

बीकानेर मंडी में बारिश से भीगा अनाज, किसानों को भारी नुकसान

राजस्थान के बीकानेर की कृषि उपज मंडी में हुई अचानक बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। जिस बारिश का किसान लंबे समय से इंतजार करता है और जिसे वह अपनी फसल के लिए वरदान मानता है, वही बारिश मंडी पहुंचते-पहुंचते अभिशाप बन गई। खेतों में फसल को जीवन देने वाली बूंदें जब मंडी में गिरीं, तो उन्होंने किसानों के महीनों की मेहनत को बर्बादी में बदल दिया। खुले आसमान के नीचे रखा अनाज देखते ही देखते भीग गया और किसान असहाय होकर अपनी उपज को खराब होते देखते रहे।

मंडी में उस समय बड़ी मात्रा में इसबगोल, जीरा और सरसों की फसल लाई गई थी। किसान अपने माल को बेचने के लिए मंडी पहुंचे थे, लेकिन मौसम के अचानक बदले मिजाज ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। बारिश इतनी तेज और अचानक आई कि किसानों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ किसानों ने अपनी उपज को बचाने के लिए तिरपाल से ढकने की कोशिश की, तो कुछ लोग भीगे हुए अनाज को समेटने में लग गए, लेकिन प्रकृति की इस मार के सामने उनके प्रयास नाकाफी साबित हुए।

सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि यह नुकसान केवल प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि इसके पीछे व्यवस्थागत खामियां भी साफ नजर आती हैं। मंडी में टिन शेड की व्यवस्था होने के बावजूद किसानों को वहां पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती। किसानों का आरोप है कि इन शेड्स पर मंडी के व्यापारियों का कब्जा रहता है, जिसके कारण उन्हें अपनी उपज खुले में रखने के लिए मजबूर होना पड़ता है। जब तक मौसम सामान्य रहता है, तब तक यह समस्या गंभीर नहीं लगती, लेकिन जैसे ही बारिश होती है, सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है।

किसानों के अनुसार, वे अपनी उपज को सुरक्षित रखने के लिए मंडी प्रशासन से बार-बार मांग करते रहे हैं कि उन्हें शेड के नीचे जगह उपलब्ध कराई जाए, लेकिन उनकी मांगों को अनदेखा किया जाता है। नतीजतन, हर बार जब मौसम बिगड़ता है, तो उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है। इस घटना ने एक बार फिर मंडी की अव्यवस्था और किसानों के प्रति प्रशासनिक उदासीनता को उजागर कर दिया है।

इस तरह की घटनाएं किसानों के मनोबल को भी प्रभावित करती हैं। एक ओर वे कड़ी मेहनत करके फसल तैयार करते हैं, समय पर मंडी तक पहुंचाते हैं और बेहतर कीमत की उम्मीद करते हैं, वहीं दूसरी ओर इस तरह की परिस्थितियां उनकी उम्मीदों को तोड़ देती हैं। भीगा हुआ अनाज न केवल गुणवत्ता में गिरावट लाता है, बल्कि बाजार में उसकी कीमत भी कम हो जाती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मंडियों में बेहतर प्रबंधन और पर्याप्त बुनियादी ढांचे की व्यवस्था से इस तरह के नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है। यदि किसानों को समय पर शेड के नीचे स्थान मिल जाए या फिर अनाज को सुरक्षित रखने के लिए उचित इंतजाम किए जाएं, तो बारिश जैसी परिस्थितियों में भी उनकी फसल सुरक्षित रह सकती है। इसके अलावा मौसम की सटीक जानकारी और समय रहते चेतावनी देने की व्यवस्था भी किसानों के लिए मददगार साबित हो सकती है।

बीकानेर की इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक किसान अपनी मेहनत को इस तरह जोखिम में डालते रहेंगे। हर साल किसी न किसी वजह से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है, कभी मौसम की मार तो कभी व्यवस्था की खामियां उनके सामने चुनौती बनकर खड़ी हो जाती हैं। ऐसे में जरूरी है कि सरकार और मंडी प्रशासन मिलकर ठोस कदम उठाएं, ताकि किसानों को इस तरह की समस्याओं से राहत मिल सके।

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