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नागौर में 17 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, 21 आरोपी गिरफ्तार

नागौर में 17 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, 21 आरोपी गिरफ्तार

राजस्थान के नागौर जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस कार्रवाई में करीब 17 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया गया है। पुलिस ने जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में एक साथ दबिश देकर 21 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और इस पूरे मामले में 28 अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इस व्यापक अभियान ने न केवल एक संगठित गिरोह का खुलासा किया है, बल्कि यह भी स्पष्ट किया है कि साइबर अपराध किस तरह तेजी से फैल रहा है और आमजन को निशाना बना रहा है।

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक और बैंकिंग से जुड़े उपकरण बरामद किए हैं। इनमें 59 मोबाइल फोन, 7 लैपटॉप, 1 टैबलेट, 44 एटीएम कार्ड, 4 बैंक पासबुक, 2 वाई-फाई डोंगल और 1 चेकबुक शामिल हैं। इन बरामदगी से यह साफ हो जाता है कि गिरोह अत्यंत योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा था और आधुनिक तकनीक का उपयोग करके लोगों को अपने जाल में फंसाता था। पुलिस का मानना है कि इन उपकरणों के जरिए ही ठगी की पूरी प्रक्रिया संचालित की जाती थी।

पुलिस जांच में यह सामने आया है कि यह गिरोह बेहद शातिर और संगठित तरीके से लोगों को निशाना बनाता था। आरोपी फर्जी वेबसाइट बनाकर, टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर ग्रुप तैयार करके लोगों को निवेश, ट्रेडिंग और विभिन्न प्रकार के ऑनलाइन टास्क के नाम पर आकर्षित करते थे। शुरुआत में लोगों को छोटे-छोटे लाभ दिखाकर उनका विश्वास जीता जाता था और फिर उन्हें बड़े मुनाफे का लालच देकर मोटी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया जाता था। एक बार जब व्यक्ति उनके झांसे में आ जाता था, तो उससे लगातार पैसे ऐंठे जाते थे और अंत में संपर्क तोड़ दिया जाता था।

इतना ही नहीं, गिरोह के सदस्य भोले-भाले लोगों को सरकारी योजनाओं, नौकरी दिलाने या कमीशन आधारित कार्यों का झांसा देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड तक हासिल कर लेते थे। इन खातों का इस्तेमाल बाद में म्यूल अकाउंट के रूप में किया जाता था, जिनके जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर किया जाता था। इस तकनीक के कारण असली अपराधियों तक पहुंचना बेहद कठिन हो जाता था, क्योंकि पैसे कई अलग-अलग खातों के माध्यम से घूमते रहते थे।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह केवल नागौर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार अन्य राज्यों तक भी फैले हुए हैं। इस अभियान के दौरान कई स्थानों पर एक साथ कार्रवाई करके इस नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ियों को तोड़ा गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके नेटवर्क की गहन जांच जारी है और आने वाले समय में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

इस पूरे अभियान को नागौर पुलिस की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। जिस तरह से एक साथ कई स्थानों पर दबिश देकर इतनी बड़ी साइबर ठगी का खुलासा किया गया, वह पुलिस की सक्रियता और रणनीतिक योजना को दर्शाता है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि यदि लगातार सख्ती बरती जाए और तकनीकी संसाधनों का सही उपयोग किया जाए, तो साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

पुलिस ने इस मौके पर आमजन से भी सावधानी बरतने की अपील की है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड या अन्य निजी दस्तावेज साझा न करें। इसके अलावा किसी भी संदिग्ध लिंक, ऑफर या निवेश योजना से दूर रहने के लिए कहा गया है, क्योंकि अधिकतर साइबर ठगी इसी तरह के लालच के माध्यम से की जाती है।

यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी की घटना घटित होती है, तो उसे तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने या नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है। समय रहते शिकायत करने पर ठगी गई राशि को ट्रैक करने और उसे वापस दिलाने की संभावना बढ़ जाती है।

राज्य स्तर पर 1 से 30 अप्रैल 2026 तक चलाए गए इस विशेष अभियान के तहत नागौर में मिली यह सफलता यह दर्शाती है कि पुलिस की सक्रियता और सतर्कता से साइबर अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। यह कार्रवाई न केवल अपराधियों के लिए एक सख्त संदेश है, बल्कि आमजन के लिए भी एक चेतावनी है कि वे डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते समय पूरी सतर्कता बरतें।

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