latest-newsराजस्थान

मुकुंदरा और रामगढ़ टाइगर रिजर्व में होगा बाघों का ट्रांसलोकेशन

मुकुंदरा और रामगढ़ टाइगर रिजर्व में होगा बाघों का ट्रांसलोकेशन

शोभना शर्मा।  राजस्थान में वन्यजीव संरक्षण को नई गति देने की दिशा में बड़ी पहल की जा रही है। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के टाइगर रिजर्व से बाघों और बाघिनों को राजस्थान के मुकुंदरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में ट्रांसलोकेट करने की तैयारी अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) से स्वीकृति मिल चुकी है और संभावना जताई जा रही है कि दीपावली से पहले यह ऐतिहासिक प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

कितने बाघ लाए जाएंगे राजस्थान?

वन विभाग की योजना के अनुसार, कुल 5 बाघिन और 2 बाघ राजस्थान लाए जाएंगे। मध्यप्रदेश के कान्हा, पेंच और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से मुकुंदरा और रामगढ़ में एक-एक बाघिन को शिफ्ट किया जाएगा। महाराष्ट्र के ताडोबा अंधेरी और पेंच टाइगर रिजर्व से भी एक-एक बाघिन लाने की स्वीकृति मिल चुकी है। इस तरह राजस्थान के दोनों टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ेगी और यहां का पारिस्थितिकी तंत्र और मजबूत होगा।

क्यों जरूरी है बाघों का ट्रांसलोकेशन?

राजस्थान में रणथंभौर और सरिस्का टाइगर रिजर्व के अलावा मुकुंदरा और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व भी विकसित किए जा रहे हैं। लेकिन इन इलाकों में बाघों की संख्या बेहद कम है। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघों का प्राकृतिक विस्तार अपेक्षित नहीं हो पाया। रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व अपेक्षाकृत नया घोषित क्षेत्र है, जहां बाघों का बसाव अभी पूरी तरह नहीं हो पाया है। इस ट्रांसलोकेशन से न केवल हाड़ौती क्षेत्र में बाघों की दहाड़ गूंजेगी बल्कि यहां के जंगलों में शिकार-शिकारी संतुलन भी बेहतर होगा।

हेलीकॉप्टर से होगा ट्रांसपोर्ट

चूंकि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के टाइगर रिजर्व राजस्थान से दूरी पर हैं, इसलिए बाघों को सड़क मार्ग से लाना जोखिमपूर्ण है। इसलिए वन विभाग ने निर्णय लिया है कि बाघों को हेलीकॉप्टर से मुकुंदरा और रामगढ़ पहुंचाया जाएगा। रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के बजाल्या ग्रासलैंड को हेलीपैड के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां उतरने के बाद बाघों को कुछ समय के लिए शॉफ्ट एनक्लोजर में रखा जाएगा ताकि वे नए वातावरण में ढल सकें। इसके बाद उन्हें खुले जंगल में छोड़ा जाएगा।

वरिष्ठ अधिकारियों का निरीक्षण

राजस्थान के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक राजेश गुप्ता हाल ही में बूंदी दौरे पर पहुंचे। उन्होंने रामगढ़ के हेलीपैड स्थल और कालदां के जंगलों का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश दिए। आने वाले दिनों में भारतीय वायुसेना का दल भी हेलीपैड स्थल का निरीक्षण कर अंतिम मंजूरी देगा।

दीपावली से पहले पूरी हो सकती है प्रक्रिया

इस वर्ष मानसून के लंबे समय तक सक्रिय रहने से बाघों को लाने में देरी हुई है। लेकिन अब परिस्थितियां अनुकूल हो चुकी हैं। अधिकारियों का मानना है कि दीपावली से पूर्व बाघों के राजस्थान आने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। फिलहाल बाघों की पहचान और उन्हें चिह्नित करने का कार्य चल रहा है।

स्थानीय पारिस्थितिकी पर असर

बाघों के आने से हाड़ौती क्षेत्र के जंगलों में वन्यजीव विविधता को नई मजबूती मिलेगी। शिकार प्रजातियों जैसे चीतल, सांभर और नीलगाय की संख्या संतुलित होगी। पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि बाघ देखने के लिए देशभर और विदेशों से पर्यटक आते हैं। मुकुंदरा और रामगढ़ का महत्व रणथंभौर और सरिस्का के समान बढ़ेगा।

वन विभाग की चुनौतियां

हालांकि ट्रांसलोकेशन एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं—

  • नए जंगल में बाघों के व्यवहार और अनुकूलन पर लगातार निगरानी रखनी होगी।

  • स्थानीय ग्रामीणों और चरवाहों को जागरूक करना जरूरी है ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति न बने।

  • ट्रैकिंग और सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक जैसे रेडियो कॉलर और ड्रोन सर्विलांस का इस्तेमाल किया जाएगा।

राजस्थान में मुकुंदरा और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में बाघों का इंटर-स्टेट ट्रांसलोकेशन न केवल एक बड़ा संरक्षण प्रयास है बल्कि राज्य की जैव विविधता को नई दिशा देने वाला कदम भी है। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से आने वाले बाघ यहां के जंगलों को नया जीवन देंगे और राजस्थान का वन्यजीव पर्यटन एक नई ऊंचाई पर पहुंचेगा। दीपावली से पहले हाड़ौती में गूंजने वाली बाघों की दहाड़ निश्चित रूप से पूरे प्रदेश के लिए गर्व का क्षण होगी।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading