शोभना शर्मा। राजस्थान विधानसभा में मंगलवार का दिन प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में ‘काले दिवस’ के रूप में दर्ज हो गया। यह पहली बार हुआ जब सदन में बिना विपक्ष के कार्यवाही चली और विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी भावुक होकर रो पड़े। कांग्रेस विधायकों के निलंबन और इंदिरा गांधी पर विवादित टिप्पणी को लेकर सदन में भारी हंगामा देखने को मिला। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला इतना बढ़ गया कि कांग्रेस विधायक सदन के गेट पर धरने पर बैठ गए।
सोमवार को विधानसभा में क्या हुआ?
विवाद की शुरुआत सोमवार को हुई जब मंत्री अविनाश गहलोत ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर विवादित टिप्पणी कर दी। इस पर कांग्रेस विधायकों ने आपत्ति जताई और सदन में हंगामा कर दिया। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसके बाद हालात और बिगड़ गए।
इस घटना के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने गोविंद सिंह डोटासरा समेत छह विधायकों को निलंबित कर दिया। कांग्रेस विधायकों ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया और इसे लोकतंत्र का अपमान बताया।
मंगलवार को विधानसभा के बाहर कांग्रेस का प्रदर्शन
मंगलवार सुबह कांग्रेस विधायक निलंबित सदस्यों के साथ विधानसभा में घुसने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक लिया। इस दौरान विधायकों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हो गई। इसके बाद कांग्रेस विधायक विधानसभा के बाहर धरने पर बैठ गए और विधानसभा के गेट पर तंबू लगाकर अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा कर दी।
कांग्रेस विधायकों का कहना था कि जब तक निलंबित विधायकों को बहाल नहीं किया जाता, वे धरने पर बैठे रहेंगे। वहीं, सत्ता पक्ष ने कांग्रेस पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया और कहा कि डोटासरा को हमेशा के लिए बर्खास्त किया जाना चाहिए।
पहली बार बिना विपक्ष के चली विधानसभा की कार्यवाही
राजस्थान विधानसभा में इतिहास में पहली बार विपक्ष की गैरमौजूदगी में प्रश्नकाल की कार्यवाही चली। कांग्रेस विधायकों ने निलंबन के विरोध में कार्यवाही में भाग नहीं लिया।
सत्ता पक्ष ने इस स्थिति का फायदा उठाते हुए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाया और कांग्रेस पर अनावश्यक हंगामा करने का आरोप लगाया। पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक शांति धारीवाल ने कहा कि यह पहली बार हुआ है कि विपक्ष को जानबूझकर सदन से बाहर रखा गया है।
स्पीकर वासुदेव देवनानी हुए भावुक
राजस्थान विधानसभा के इस घटनाक्रम के दौरान अध्यक्ष वासुदेव देवनानी बेहद भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी पक्षपात नहीं किया, फिर भी उन पर अनावश्यक आरोप लगाए जा रहे हैं।
भावुक होते हुए स्पीकर ने कहा, “मैं भी पांच बार से इस सदन का सदस्य हूं, लेकिन मैंने कभी इस तरह की स्थिति नहीं देखी। मैंने कभी किसी के साथ पक्षपात नहीं किया, फिर भी मेरे ऊपर आरोप लगाए जा रहे हैं। यह बहुत दुखद है।”
उन्होंने डोटासरा के व्यवहार को अनुचित बताया और कहा कि लोकतंत्र में इस तरह की भाषा और आचरण का कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
डोटासरा की बर्खास्तगी की मांग उठी
सत्ता पक्ष के कई विधायकों ने डोटासरा को विधानसभा से स्थायी रूप से बाहर करने की मांग उठाई। बीजेपी विधायक गोपाल शर्मा और मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि डोटासरा का आचरण लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है और उन्हें विधानसभा से निष्कासित कर देना चाहिए।
इस बीच, कांग्रेस विधायकों ने कहा कि जब तक उनके निलंबित साथियों को वापस नहीं बुलाया जाता, तब तक वे धरने पर बैठे रहेंगे।
कांग्रेस ने स्पीकर पर लगाए पक्षपात के आरोप
धरने पर बैठे कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने विधानसभा अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने खुद स्वीकार किया था कि “हमारा स्पीकर कोई भी बात नहीं मानता।”
डोटासरा ने आरोप लगाया कि सरकार के भीतर ही मतभेद हैं और वे सिर्फ कांग्रेस को बदनाम करने के लिए इस तरह के कदम उठा रहे हैं।
आरएलडी विधायक की शांति अपील
आरएलडी विधायक सुभाष गर्ग ने सरकार और स्पीकर से अपील की कि वे विपक्ष से बात कर इस गतिरोध को खत्म करें। उन्होंने कहा कि पहले भी कई बीजेपी विधायकों ने आसन का अपमान किया था, लेकिन तब इतनी सख्त कार्रवाई नहीं हुई।
गर्ग ने कहा कि “सदन में खेद प्रकट करने वालों की भावना देखी जानी चाहिए। विपक्ष ने पहले ही खेद जता दिया है, लेकिन ऐसा लग रहा है कि सरकार की मंशा सदन को चलने देने की नहीं है।”
क्या आगे होगा?
विधानसभा के इस विवाद ने राजस्थान की राजनीति में भूचाल ला दिया है। कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस का कहना है कि वह सरकार के इस फैसले के खिलाफ आंदोलन करेगी, जबकि बीजेपी ने साफ कर दिया है कि वह अपने फैसले से पीछे नहीं हटेगी।


