राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित कृष्णधाम श्री सांवलियाजी मंदिर एक बार फिर अपनी अपार आस्था और चढ़ावे को लेकर चर्चा का केंद्र बन गया है। शुक्रवार को मासिक मेले के दौरान जब सांवलिया सेठ मंदिर का मुख्य दानपात्र खोला गया, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति यह दृश्य देखकर हैरान रह गया। शुरुआती गिनती में ही मंदिर के भंडार से 11 करोड़ 30 लाख रुपये से अधिक की राशि सामने आई। जैसे-जैसे नोटों की गड्डियां बाहर निकाली जाती रहीं, मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं के बीच उत्साह और भक्ति का माहौल और भी गहरा होता चला गया। सांवलिया सेठ के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा और यह दृश्य किसी बड़े धार्मिक उत्सव से कम नहीं लग रहा था।
मंदिर प्रशासन ने पूरी प्रक्रिया को कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न कराया। मंदिर मंडल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रभा गौतम, प्रशासनिक अधिकारी प्रथम शिव शंकर पारीक और मंदिर बोर्ड के अन्य सदस्य मौके पर मौजूद रहे। गर्भगृह स्थित मुख्य दानपात्र को खोलने से पहले सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से पूरी हो सके। जैसे ही भंडार के ताले खोले गए, वहां मौजूद बैंक कर्मचारियों और प्रशासनिक टीम ने नोटों की गिनती शुरू कर दी। बड़ी संख्या में निकले नकद दान को अलग-अलग बैगों में भरकर सुरक्षा के बीच विभिन्न बैंकों में जमा कराया गया।
सांवलियाजी मंदिर में हर महीने आने वाला चढ़ावा देशभर में चर्चा का विषय रहता है, लेकिन इस बार मासिक मेले के पहले ही दिन इतनी बड़ी राशि सामने आने से हर कोई आश्चर्यचकित है। खास बात यह है कि अभी केवल नोटों की गिनती पूरी हुई है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, दानपात्र से बड़ी मात्रा में सोने और चांदी के आभूषण भी निकले हैं, जिनका वजन और मूल्यांकन अभी बाकी है। इसके अलावा श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सिक्कों का बड़ा भंडार भी अलग रखा गया है, जिसकी गिनती बाद में की जाएगी। मंदिर के भेंट कक्ष और कार्यालय में ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, मनीऑर्डर और अन्य माध्यमों से आई राशि का अंतिम मिलान भी अभी होना बाकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार कुल चढ़ावे का आंकड़ा और भी अधिक हो सकता है।
श्री सांवलियाजी मंदिर को मेवाड़ क्षेत्र में आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप सांवलिया सेठ को विशेष रूप से व्यापार और समृद्धि का देवता माना जाता है। यही कारण है कि राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात सहित देश के कई हिस्सों से व्यापारी वर्ग बड़ी संख्या में यहां पहुंचता है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि सांवलिया सेठ उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं और व्यापार में तरक्की दिलाते हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्त अपने लाभ का एक हिस्सा मंदिर में चढ़ाते हैं। इसी आस्था के कारण हर महीने मंदिर में करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है।
मासिक मेले के दौरान मंदिर में भक्तों की भीड़ सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक हो जाती है। इस बार भी हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे। प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है। पार्किंग, दर्शन व्यवस्था और यातायात संचालन को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ सांवलियाजी मंदिर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था का भी एक बड़ा केंद्र बन चुका है। यहां लगने वाले मेलों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से स्थानीय व्यापार को भी काफी फायदा होता है। होटल, रेस्तरां, प्रसाद दुकानों और परिवहन सेवाओं से जुड़े हजारों लोगों की आजीविका इस धार्मिक पर्यटन पर निर्भर है। मंदिर में आने वाले विशाल चढ़ावे का उपयोग भी विभिन्न धार्मिक और सामाजिक कार्यों में किया जाता है। मंदिर प्रशासन समय-समय पर विकास कार्यों, सुविधाओं के विस्तार और धार्मिक आयोजनों के लिए इन निधियों का उपयोग करता है।
इस बार भंडार से निकली करोड़ों की राशि ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सांवलिया सेठ के प्रति लोगों की आस्था कितनी गहरी है। श्रद्धालु यहां सिर्फ धन ही नहीं, बल्कि अपनी भावनाएं, विश्वास और उम्मीदें भी अर्पित करने आते हैं। यही वजह है कि सांवलियाजी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास का प्रतीक बन चुका है। आने वाले दिनों में जब सोना-चांदी, सिक्कों और ऑनलाइन चढ़ावे की पूरी गणना सामने आएगी, तब यह आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है। फिलहाल मेवाड़ का यह प्रसिद्ध मंदिर एक बार फिर करोड़ों के चढ़ावे और भक्तों की अटूट श्रद्धा को लेकर पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है।


