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राजस्थान में परिवहन सेवाओं का होगा आधुनिकीकरण, 10 शहरों में बनेंगे आधुनिक बस पोर्ट

राजस्थान में परिवहन सेवाओं का होगा आधुनिकीकरण, 10 शहरों में बनेंगे आधुनिक बस पोर्ट

राजस्थान में परिवहन सेवाओं को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रदेश में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने, यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और परिवहन व्यवस्था को तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को जयपुर स्थित परिवहन मुख्यालय में उच्च स्तरीय संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने की, जिसमें परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग और राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान प्रदेश में परिवहन सेवाओं के आधुनिकीकरण, सड़क सुरक्षा उपायों, इलेक्ट्रिक बसों की खरीद, बस स्टैंडों के विकास और बजट घोषणाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई।

उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी योजनाओं और तकनीकी नवाचारों का समयबद्ध तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए ताकि राजस्थान का परिवहन तंत्र देश के लिए एक मॉडल के रूप में स्थापित हो सके। उन्होंने कहा कि परिवहन व्यवस्था केवल यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास की रीढ़ भी है। ऐसे में परिवहन सेवाओं को अधिक सुरक्षित, सुलभ और आधुनिक बनाना सरकार की प्राथमिकता है।

बैठक में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम को लेकर भी विशेष रूप से चर्चा हुई। उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क सुरक्षा के लिए प्रभावी और दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए तकनीक, जागरूकता और सख्त निगरानी तीनों स्तरों पर कार्य करना जरूरी है। इसी दिशा में सरकार सड़क सुरक्षा उपकरणों और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर विशेष जोर दे रही है।

बैठक के दौरान यह जानकारी दी गई कि प्रदेश के प्रमुख शहरों में आधुनिक सुविधाओं से युक्त बस पोर्ट विकसित किए जाएंगे। अजमेर, उदयपुर, कोटा, भरतपुर और बीकानेर सहित कुल 10 जिला मुख्यालयों पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत अत्याधुनिक बस पोर्ट बनाए जाने की योजना है। इन बस पोर्टों में यात्रियों को बेहतर प्रतीक्षालय, स्वच्छता सुविधाएं, डिजिटल सूचना प्रणाली, पार्किंग, खानपान और सुरक्षा जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उपमुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया में तेजी लाई जाए ताकि कार्य जल्द शुरू हो सके।

इसके साथ ही राज्य के मौजूदा बस स्टैंडों की मरम्मत और रखरखाव पर भी जोर दिया गया। सरकार का मानना है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधाएं देने के लिए बस स्टैंडों की स्थिति सुधारना बेहद जरूरी है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रियों को साफ-सुथरा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना रोडवेज की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार तकनीक का सहारा ले रही है। बैठक में बताया गया कि राजस्थान के सभी 35 ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक का ऑटोमेशन किया जा रहा है। फिलहाल 14 स्थानों पर ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक शुरू हो चुके हैं और शेष स्थानों पर कार्य तेजी से चल रहा है। इस व्यवस्था के लागू होने से ड्राइविंग टेस्ट पूरी तरह तकनीकी मानकों के आधार पर होंगे और मानवीय हस्तक्षेप कम होगा। इससे पारदर्शिता बढ़ने के साथ-साथ फर्जीवाड़े और अनुचित प्रक्रियाओं पर भी रोक लग सकेगी।

इसके अलावा गलत स्लॉट बुकिंग को रोकने के लिए पिनकोड आधारित मैपिंग व्यवस्था लागू की गई है। इस नई प्रणाली के माध्यम से आवेदकों को उनके निवास क्षेत्र के अनुसार टेस्ट स्लॉट आवंटित किए जाएंगे, जिससे प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और सुचारु बन सकेगी।

राजस्थान रोडवेज के बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए भी सरकार बड़े स्तर पर काम कर रही है। समीक्षा बैठक में बताया गया कि 300 इलेक्ट्रिक बसों और 300 नई रोडवेज बसों की खरीद प्रक्रिया मिशन मोड पर जारी है। इलेक्ट्रिक बसों के शामिल होने से न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन को अधिक पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ बनाना है।

सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में भी राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि अब तक तीन हजार से अधिक चिकित्सा कर्मियों को एडवांस लाइफ सपोर्ट प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वहीं 15 हजार से अधिक नागरिकों को बेसिक लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। सड़क दुर्घटना के दौरान शुरुआती उपचार और समय पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए यह पहल बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इसके साथ ही सड़क सुरक्षा कोष के माध्यम से पुलिस विभाग को आधुनिक ब्रेथ एनालाइजर, इंटरसेप्टर वाहन, रिफ्लेक्टिव क्रॉस बेल्ट और अन्य आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। शराब पीकर वाहन चलाने और तेज गति जैसी लापरवाहियों पर नियंत्रण के लिए इन उपकरणों का उपयोग किया जाएगा। सरकार ने वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगाने की प्रक्रिया को भी तेज कर दिया है ताकि वाहन सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।

ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ बनाने के लिए ‘आपणी बस-राजस्थान रोडवेज’ योजना का विस्तार भी किया जा रहा है। बैठक में बताया गया कि योजना के पहले चरण में 357 मार्गों पर बस संचालन शुरू किया गया है और कई मार्गों पर यात्री भार 100 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया है। इससे साफ है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन की मांग लगातार बढ़ रही है। दूसरे चरण के तहत नए कार्यादेश जारी किए गए हैं और शेष मार्गों पर निविदा प्रक्रिया जारी है।

जन शिकायतों के त्वरित समाधान को लेकर भी बैठक में समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि संपर्क पोर्टल पर प्राप्त परिवादों के निस्तारण की औसत अवधि 18 दिनों से घटकर 11 दिन रह गई है। साथ ही राहत प्रतिशत बढ़कर 64 प्रतिशत तक पहुंच गया है। उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आमजन की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए ताकि लोगों का सरकारी व्यवस्थाओं पर भरोसा मजबूत हो सके।

बैठक में राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा, विशिष्ट सहायक भगवत सिंह राठौड़ सहित परिवहन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सरकार की इस व्यापक योजना को राजस्थान के परिवहन क्षेत्र में बड़े बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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