केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारियों के बीच लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ 8वें वेतन आयोग अब एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। हाल के दिनों में इसको लेकर देशभर में हलचल तेज हो गई है और कर्मचारी संगठनों की ओर से अपनी मांगों को लेकर सक्रियता भी बढ़ी है। इसी क्रम में National Council Joint Consultative Machinery ने केंद्र सरकार और प्रस्तावित वेतन आयोग को अपना विस्तृत मेमोरेंडम सौंप दिया है, जिसमें वेतन, भत्तों, पेंशन और अन्य सुविधाओं से जुड़ी कई अहम मांगें शामिल की गई हैं।
इस मेमोरेंडम को कर्मचारियों की अपेक्षाओं का एक व्यापक दस्तावेज माना जा रहा है, जिसमें मौजूदा वेतन संरचना में बड़े बदलाव की मांग प्रमुख रूप से सामने आई है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों और महंगाई के स्तर को देखते हुए मौजूदा वेतन पर्याप्त नहीं है, इसलिए इसमें व्यापक सुधार की आवश्यकता है। इसी के तहत न्यूनतम वेतन को वर्तमान 18,000 रुपये से बढ़ाकर 69,000 रुपये करने की मांग रखी गई है। यह मांग कर्मचारियों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा में है और इसे जीवनयापन की बढ़ती लागत के अनुरूप बताया जा रहा है।
इसके अलावा कर्मचारियों ने हर वर्ष वेतन में कम से कम 6 प्रतिशत की वृद्धि सुनिश्चित करने की मांग भी की है। उनका मानना है कि नियमित वेतन वृद्धि से कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति स्थिर बनी रहेगी और महंगाई के प्रभाव को संतुलित किया जा सकेगा। साथ ही प्रमोशन के समय न्यूनतम 10,000 रुपये की बढ़ोतरी की मांग भी मेमोरेंडम का अहम हिस्सा है, जिससे कर्मचारियों को पदोन्नति के साथ वास्तविक आर्थिक लाभ मिल सके।
मेमोरेंडम में बोनस और ग्रेच्युटी से संबंधित प्रावधानों में भी बदलाव की मांग की गई है। कर्मचारी संगठनों ने कम से कम 30 दिनों का न्यूनतम बोनस सुनिश्चित करने की बात कही है। इसके अलावा ग्रेच्युटी के नियमों में भी ढील देने की मांग की गई है, ताकि कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय अधिक लाभ मिल सके। यह प्रस्ताव खासतौर पर उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो लंबे समय से सेवा में हैं।
वेतन संरचना यानी पे स्केल में बदलाव को लेकर भी विस्तृत सुझाव दिए गए हैं। मेमोरेंडम के अनुसार पे स्केल-1, जो वर्तमान में लेवल-1 के तहत आता है, उसमें वेतन 18,000 से 56,900 रुपये के बीच है, जिसे बढ़ाकर न्यूनतम 69,000 रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसी तरह पे स्केल-2 में, जहां वर्तमान वेतन 21,700 से 69,100 रुपये के बीच है, उसे बढ़ाकर न्यूनतम 83,200 रुपये करने की मांग की गई है। वहीं पे स्केल-3 में, जिसमें मौजूदा वेतन 29,200 से 92,300 रुपये के बीच है, उसे बढ़ाकर न्यूनतम 1,12,000 रुपये करने का प्रस्ताव शामिल किया गया है। इन मांगों का उद्देश्य वेतन संरचना को अधिक संतुलित और कर्मचारियों के अनुकूल बनाना है।
छुट्टियों के मामले में भी कर्मचारी संगठनों ने कई बड़े बदलावों की मांग रखी है। मेमोरेंडम में मातृत्व अवकाश को बढ़ाकर 240 दिन करने और पितृत्व अवकाश को 45 दिन तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके अलावा अर्जित अवकाश (Earned Leave) को बिना किसी सीमा के जमा करने की मांग भी की गई है, जिससे कर्मचारी अपनी आवश्यकतानुसार छुट्टियों का उपयोग कर सकें।
नई सुविधाओं के तहत लीव इनकैशमेंट की सीमा को बढ़ाकर 600 दिन करने की मांग भी सामने आई है। इसके साथ ही 20 साल की सेवा पूरी करने के बाद 50 प्रतिशत लीव इनकैशमेंट की सुविधा देने का प्रस्ताव भी रखा गया है। यह कदम कर्मचारियों को दीर्घकालिक सेवा के लिए प्रोत्साहित करने के रूप में देखा जा रहा है। महिलाओं के लिए विशेष रूप से अतिरिक्त मेडिकल लीव और 60 दिन का पैरेंट केयर लीव देने की मांग भी इस मेमोरेंडम में शामिल है, जो कार्यस्थल पर लैंगिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब नजरें केंद्र सरकार और आगामी वेतन आयोग के रुख पर टिकी हुई हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन मांगों पर किस तरह विचार करती है और कर्मचारियों को कितना राहत देती है। फिलहाल इतना तय है कि 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं और अपेक्षाएं दोनों ही तेजी से बढ़ रही हैं।


