जयपुर में आयोजित ‘वृक्ष मित्र सम्मान समारोह 2026’ के दौरान बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन ने न केवल पर्यावरण संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया, बल्कि देश की सुरक्षा और सेना के योगदान पर भी अपनी स्पष्ट राय रखी। राजधानी के Clarks Amer में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” जैसे कदम समय की जरूरत थे और ऐसे निर्णयों से देश की सुरक्षा मजबूत होती है।
रवीना टंडन ने कहा कि अब कोई भी देश भारत से टकराने से पहले कई बार सोचने को मजबूर होगा। उन्होंने भारतीय सेना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे जवान देश की सुरक्षा के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर देते हैं। उनके लिए परिवार से पहले देश होता है, और यही भावना उन्हें असाधारण बनाती है। उनके इस बयान ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच देशभक्ति का माहौल बना दिया।
यह समारोह प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण के लिए काम कर रही श्री कल्पतरु संस्थान के 31वें वार्षिक उत्सव के अवसर पर आयोजित किया गया था। देशभर से आए पर्यावरण कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों के बीच रवीना टंडन ने प्रकृति संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाने का प्रयास किया। इस दौरान उन्होंने एक प्रतीकात्मक पहल करते हुए सिंदूर का पौधा भी लगाया, जिससे पर्यावरण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता झलकती है।
अपने संबोधन में रवीना टंडन ने स्पष्ट रूप से कहा कि आज के दौर में पर्यावरण केवल सजावट या दिखावे का विषय नहीं है, बल्कि यह मानव अस्तित्व की बुनियाद है। उन्होंने कहा कि पेड़, स्वच्छ हवा और शुद्ध पानी जीवन के लिए अनिवार्य हैं। अगर ये नहीं बचेंगे, तो विकास का कोई महत्व नहीं रह जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि आधुनिक विकास तभी सार्थक है, जब वह इंसान को स्वस्थ और सुरक्षित जीवन दे सके।
रवीना ने अपने विचार रखते हुए कहा कि हम भले ही आर्थिक रूप से कितनी भी प्रगति कर लें, लेकिन अगर हमारे पास सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा और पीने के लिए साफ पानी नहीं होगा, तो उस प्रगति का कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने एक सशक्त संदेश देते हुए कहा कि “हम पैसा तो कमा सकते हैं, लेकिन उसे खा नहीं सकते। हमें जीवन के लिए हवा, पानी और अन्न चाहिए, और यह सब प्रकृति से ही मिलता है।” उनके इस बयान ने पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को बेहद सरल और प्रभावी तरीके से सामने रखा।
उन्होंने आगे कहा कि पर्यावरण का असंतुलन केवल जंगलों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर खेती, जल स्रोतों, स्वास्थ्य और मौसम पर भी पड़ता है। यह एक पूरा चक्र है, जिसमें किसी एक हिस्से के बिगड़ने से पूरी व्यवस्था प्रभावित होती है। इसलिए विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना आज की सबसे बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में पर्यावरणविद् विष्णु लांबा के कार्यों की भी सराहना की गई। रवीना टंडन ने उनके समर्पण को “प्रकृति के लिए जरूरी पागलपन” बताते हुए कहा कि अगर इस तरह का जुनून न हो, तो इतने बड़े स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के कार्य संभव नहीं हो सकते। विष्णु लांबा के नेतृत्व में संस्था ने देश और विदेश में 150 से अधिक पर्यावरण अभियानों का संचालन किया है और डेढ़ करोड़ से अधिक पौधों का रोपण और संरक्षण कर एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।
इस समारोह के दौरान पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं को “वृक्ष मित्र सम्मान” से नवाजा गया। उन्हें स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन लोगों को दिया गया, जिन्होंने जल, जंगल, जमीन और जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
कार्यक्रम में देशभर से एक हजार से अधिक पर्यावरण कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और प्रकृति प्रेमियों ने भाग लिया। इस अवसर पर कई नए अभियानों की भी शुरुआत की गई। इनमें “ऑपरेशन सिंदूर 2.0”, परिंदों के लिए परिंडा अभियान और नक्सल ग्रीन मिशन जैसे प्रयास शामिल हैं। खासतौर पर नक्सल ग्रीन मिशन के तहत आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर उन्हें नई दिशा देने की योजना प्रस्तुत की गई, जो सामाजिक पुनर्वास का एक सकारात्मक उदाहरण माना जा रहा है।
रवीना टंडन ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि सबसे बड़ी जिम्मेदारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ धरती छोड़ने की है। उन्होंने कहा कि हमें केवल वर्तमान के बारे में नहीं सोचना चाहिए, बल्कि यह भी देखना चाहिए कि हम अपने बच्चों को कैसी दुनिया सौंप रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रकृति की रक्षा करना दरअसल खुद की रक्षा करना है, और इसे हर व्यक्ति को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।


