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RUHS में इंटरनेशनल रिसर्च को नई गति, विशेष वर्कशॉप आयोजित

RUHS में इंटरनेशनल रिसर्च को नई गति, विशेष वर्कशॉप आयोजित

जयपुर स्थित Rajasthan University of Health Sciences यानी RUHS मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा अनुसंधान और वैज्ञानिक लेखन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। संस्थान में डॉक्टरों और मेडिकल विशेषज्ञों के लिए विशेष रिसर्च वर्कशॉप का आयोजन किया गया, जिसमें राजस्थान और देश के विभिन्न शहरों से आए चिकित्सकों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मेडिकल रिसर्च की गुणवत्ता को बेहतर बनाना, डॉक्टरों को आधुनिक शोध पद्धतियों से जोड़ना और अंतरराष्ट्रीय स्तर की रिसर्च गतिविधियों को मजबूत करना रहा।

RUHS मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल Dr. Mohnish Grover ने बताया कि इस वर्कशॉप में जयपुर, झालावाड़, पाली, कोटा और मुंबई के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से कुल 35 डॉक्टर शामिल हुए। यह भागीदारी इस बात का संकेत है कि चिकित्सा क्षेत्र में शोध को लेकर चिकित्सकों के बीच गंभीरता बढ़ रही है और युवा डॉक्टर भी रिसर्च को अपने करियर का अहम हिस्सा मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम डॉक्टरों को केवल क्लिनिकल कार्य तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें नए इलाज, नई तकनीक और वैज्ञानिक सोच से जोड़ते हैं।

वर्कशॉप का उद्घाटन Indian Council of Medical Research के पूर्व चेयरमैन Dr. Vishwamohan Katoch ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारत में मेडिकल रिसर्च की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन शोध की गुणवत्ता, डेटा की शुद्धता और वैज्ञानिक लेखन पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने चिकित्सकों को प्रेरित करते हुए कहा कि केवल शोध करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सही तरीके से प्रस्तुत करना, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार लिखना और प्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशित कराना भी उतना ही जरूरी है।

RUHS प्रिंसिपल डॉ. ग्रोवर ने जानकारी दी कि संस्थान में वर्तमान समय में नाक और मस्तिष्क से जुड़ी नई बीमारियों तथा उनके उपचार पर इंटरनेशनल रिसर्च चल रही है। यह शोध अमेरिका की University of Pittsburgh के सहयोग से किया जा रहा है। इस साझेदारी को RUHS के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि इससे संस्थान को वैश्विक शोध नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। साथ ही यहां के डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ काम करने का अनुभव भी प्राप्त हो रहा है।

नाक और ब्रेन से जुड़ी बीमारियां आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के लिए चुनौती मानी जाती हैं। कई बार इन रोगों का समय पर पता नहीं चल पाता या उनका उपचार जटिल होता है। ऐसे में यदि इन क्षेत्रों में नई रिसर्च होती है तो मरीजों को बेहतर निदान और अधिक प्रभावी इलाज मिलने की संभावना बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में न्यूरोलॉजी और ईएनटी से जुड़े रोगों के क्षेत्र में ऐसी रिसर्च बहुत उपयोगी साबित होगी।

कार्यक्रम में Indian Journal of Medical Research के एडिटर इन चीफ Dr. Piyush Gupta भी उपस्थित रहे। उन्होंने रिसर्च पेपर लिखने की प्रक्रिया, सही विषय चयन, डेटा की प्रस्तुति और प्रकाशन की रणनीति पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कई बार अच्छा शोध केवल इसलिए पहचान नहीं बना पाता क्योंकि उसे प्रभावी ढंग से लिखा नहीं जाता। इसलिए वैज्ञानिक लेखन की कला हर शोधकर्ता के लिए आवश्यक है।

इस अवसर पर टेक्निकल एडिटर Dr. Shweta Tanwar ने रिसर्च मैन्युस्क्रिप्ट की तकनीकी गुणवत्ता, भाषा, संदर्भ शैली और संपादन प्रक्रिया पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशन के लिए शोध पत्र का प्रारूप, भाषा की स्पष्टता और तथ्यों की सटीकता बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि इन बातों का ध्यान रखा जाए तो भारतीय शोधकर्ताओं के लिए वैश्विक मंच पर बेहतर अवसर खुल सकते हैं।

कार्यक्रम में दिल्ली के यूसीएमएस के सामुदायिक चिकित्सा विभाग से जुड़े प्रोफेसर Dr. Aamir Khan Maroof ने डेटा एनालिसिस, रिसर्च मेथडोलॉजी और पब्लिशिंग प्रोसेस पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी भी शोध की विश्वसनीयता सही डेटा संग्रह, वैज्ञानिक विश्लेषण और निष्पक्ष निष्कर्षों पर आधारित होती है। यदि शोधकर्ता इन तीनों पहलुओं पर मजबूत पकड़ रखते हैं तो उनका अध्ययन अधिक प्रभावशाली बनता है।

इस वर्कशॉप के माध्यम से RUHS ने यह संदेश दिया है कि मेडिकल शिक्षा अब केवल किताबों और अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि शोध, नवाचार और वैश्विक सहयोग इसका अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। राजस्थान जैसे राज्य में इस स्तर की रिसर्च गतिविधियों का बढ़ना स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इससे राज्य के मेडिकल छात्रों, रेजिडेंट डॉक्टरों और फैकल्टी को भी नई दिशा मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएं तो राजस्थान के मेडिकल संस्थान राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बना सकते हैं। RUHS में चल रही यह पहल आने वाले वर्षों में चिकित्सा अनुसंधान, नई तकनीकों और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार साबित हो सकती है। जयपुर का यह संस्थान अब शिक्षा के साथ-साथ रिसर्च हब के रूप में भी तेजी से उभरता नजर आ रहा है।

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