मध्य प्रदेश के Kuno National Park से निकला चीता KP-3 अब राजस्थान की सीमा में प्रवेश कर चुका है, जिससे सीमावर्ती इलाकों में हलचल तेज हो गई है। यह चीता बारां जिले के रास्ते होते हुए झालावाड़ जिले के मनोहरथाना क्षेत्र तक पहुंच गया है। अचानक हुई इस गतिविधि ने ग्रामीणों के बीच दहशत और उत्सुकता दोनों का माहौल पैदा कर दिया है। जहां एक ओर लोग चीते को देखने को लेकर उत्साहित हैं, वहीं दूसरी ओर उसकी मौजूदगी से सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार, चीता KP-3 ने कूनो से निकलने के बाद बारां जिले के शेरगढ़ और हरनावदाशाहजी क्षेत्रों को पार किया और फिर झालावाड़ जिले में प्रवेश किया। यहां वह मनोहरथाना क्षेत्र की चंदीपुर रेंज तक पहुंच गया। शाम के समय उसकी मूवमेंट कई ग्राम पंचायतों में देखी गई, जिनमें अर्जुनपुरा, खेरखेड़ा, शोरती और चंदीपुर शामिल हैं। इन इलाकों से गुजरते हुए चीता पचेटा गांव की ओर बढ़ा, जिससे आसपास के गांवों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
ग्रामीणों ने चीते की मौजूदगी को लेकर अपनी-अपनी आंखों से देखे गए अनुभव साझा किए हैं। कई लोगों ने खेतों और खुले इलाकों में उसकी हलचल देखने की बात कही है। इससे गांवों में भय का माहौल बन गया है और लोग अपने दैनिक कार्यों में भी सावधानी बरत रहे हैं। खासतौर पर सुबह और शाम के समय लोग घरों से बाहर निकलने में सतर्कता दिखा रहे हैं।
हालांकि, वन विभाग ने स्थिति को नियंत्रित और निगरानी में रखने के लिए पूरी तैयारी कर रखी है। विभाग के अनुसार, कूनो नेशनल पार्क की विशेष ट्रैकिंग टीम और स्थानीय वन रेंज की टीमें लगातार चीते की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। जीपीएस कॉलर और अन्य तकनीकी साधनों के माध्यम से उसकी लोकेशन ट्रैक की जा रही है, ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चीता KP-3 फिलहाल अपने प्राकृतिक व्यवहार के अनुसार मूवमेंट कर रहा है और किसी प्रकार की आक्रामकता की सूचना नहीं मिली है। इसके बावजूद एहतियात के तौर पर ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। लोगों से अपील की जा रही है कि वे अकेले जंगल या खुले इलाकों में न जाएं और बच्चों तथा पशुओं को सुरक्षित रखें।
इस बीच यह भी संभावना जताई जा रही है कि चीता आगे बढ़ते हुए मध्य प्रदेश के गुना जिले की ओर लौट सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, चीते अक्सर बड़े क्षेत्र में विचरण करते हैं और अपने लिए उपयुक्त आवास और शिकार की तलाश में लंबी दूरी तय करते हैं। ऐसे में सीमावर्ती जिलों में उनकी आवाजाही असामान्य नहीं मानी जाती, लेकिन यह स्थिति स्थानीय स्तर पर सावधानी की मांग जरूर करती है।
चीते की मौजूदगी ने वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व के मुद्दे को भी फिर से चर्चा में ला दिया है। एक ओर यह घटना दर्शाती है कि कूनो में चल रहा चीता पुनर्वास कार्यक्रम सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर यह भी जरूरी हो जाता है कि ऐसे वन्यजीवों की आवाजाही के दौरान स्थानीय आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
वन विभाग लगातार स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर स्थिति पर नजर रखे हुए है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमों को भी तैनात किया जा सकता है। फिलहाल विभाग का पूरा फोकस चीते की सुरक्षित ट्रैकिंग और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है।


