राजस्थान में बुनियादी ढांचे को मजबूती देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। कोटपूतली से किशनगढ़ तक प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना को लेकर तैयारियां अब तेज हो चुकी हैं। यह महत्वाकांक्षी परियोजना न केवल यात्रा को तेज और सुगम बनाएगी, बल्कि प्रदेश के आर्थिक और लॉजिस्टिक नेटवर्क को भी नई गति देने का काम करेगी। प्रशासन के अनुसार, इस एक्सप्रेस-वे के बन जाने के बाद कोटपूतली से किशनगढ़ की लगभग 208 किलोमीटर लंबी दूरी को मात्र दो घंटे में तय किया जा सकेगा, जबकि वर्तमान में इस दूरी को पार करने में करीब चार घंटे का समय लगता है।
यह परियोजना राजस्थान के कई प्रमुख जिलों को जोड़ने का कार्य करेगी, जिससे क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही दिल्ली से अजमेर जाने वाले यात्रियों के लिए भी यह एक्सप्रेस-वे काफी राहत भरा साबित होगा, क्योंकि यात्रा समय में लगभग दो घंटे की बचत होगी। इस तरह यह परियोजना केवल राज्य ही नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय परिवहन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
लंबे समय से लंबित इस परियोजना को अब जमीन पर उतारने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तेजी से कार्यवाही की जा रही है। Rajasthan State Road Development Corporation द्वारा भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर जनसुनवाई शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। ये शिविर 11 अप्रैल से शुरू हो चुके हैं और 16 अप्रैल तक जारी रहेंगे। इन शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों की आपत्तियों और सुझावों को सुना जा रहा है, ताकि परियोजना को पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाया जा सके।
करीब 6 हजार करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस फोरलेन एक्सप्रेस-वे को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इस मार्ग पर 95 से अधिक अंडरपास और फ्लाईओवर बनाए जाने की योजना है, जिससे यातायात पूरी तरह बाधारहित हो सके। इसके अलावा अलग-अलग स्थानों पर नौ एंट्री और एग्जिट पॉइंट भी विकसित किए जाएंगे, जिससे यात्रियों को सुविधा मिलेगी। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस एक्सप्रेस-वे पर दुपहिया और तिपहिया वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाने का प्रस्ताव है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना को कम किया जा सके।
यह एक्सप्रेस-वे कोटपूतली के पनियाला क्षेत्र से शुरू होकर कई जिलों से होकर गुजरेगा और अंततः किशनगढ़ तक पहुंचेगा। इस मार्ग के निर्माण से दिल्ली-जयपुर-अजमेर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात का दबाव भी कम होगा। वर्तमान में इस मार्ग पर भारी ट्रैफिक के कारण अक्सर जाम और दुर्घटनाओं की स्थिति बनी रहती है, जिसे यह नई परियोजना काफी हद तक नियंत्रित कर सकती है।
हालांकि, जहां एक ओर यह परियोजना विकास और सुविधाओं का प्रतीक बन रही है, वहीं दूसरी ओर इससे प्रभावित होने वाले किसानों के बीच चिंता भी बढ़ती जा रही है। जिन गांवों से यह एक्सप्रेस-वे गुजरेगा, वहां के किसानों को अपनी जमीन अधिग्रहण को लेकर आशंकाएं हैं। खेती योग्य भूमि के कम होने और आय के स्थायी स्रोत प्रभावित होने का डर ग्रामीणों के चेहरे पर साफ झलक रहा है। कई स्थानों पर किसानों ने भूमि अधिग्रहण का विरोध भी जताया है और उचित मुआवजे की मांग उठाई है।
प्रशासन की ओर से किसानों को आश्वस्त किया जा रहा है कि उनकी सभी आपत्तियों को गंभीरता से सुना जाएगा और नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जाएगा। परियोजना अधिकारी दिनेश कुमार साहू के अनुसार, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी और प्रभावित लोगों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण से न केवल यातायात का दबाव कम होगा, बल्कि क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
यह एक्सप्रेस-वे 14 से अधिक गांवों से होकर गुजरेगा, जिनमें गोनाडा, कालूहेड़ा, बनेटी, नरसिंहपुरा, अमरपुरा, रामनगर, चूरी, भोपतपुरा, कायमपुरा बांस, चिमनपुरा, अजीतपुरा खुर्द, चेचीका की नांगल, करवास और जयसिंहपुरा जैसे गांव शामिल हैं। इन सभी गांवों में जनसुनवाई के माध्यम से ग्रामीणों की राय ली जा रही है, जिससे परियोजना को लेकर संतुलित निर्णय लिया जा सके।


