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ईरान-USA समझौते की ओर बढ़े कदम, पाकिस्तान की मध्यस्थता से मिडिल ईस्ट संकट खत्म होने की उम्मीद

ईरान-USA समझौते की ओर बढ़े कदम, पाकिस्तान की मध्यस्थता से मिडिल ईस्ट संकट खत्म होने की उम्मीद

मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अब पूरी दुनिया की निगाहें ईरान पर टिक गई हैं। USA और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर तेजी से कूटनीतिक गतिविधियां चल रही हैं और माना जा रहा है कि आने वाले कुछ घंटों में इस पर बड़ा फैसला सामने आ सकता है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देशों के बीच समझौते का अंतिम ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और इसकी आधिकारिक घोषणा किसी भी समय हो सकती है। इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान एक अहम मध्यस्थ की भूमिका निभाता दिखाई दे रहा है, जिसने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को अंतिम चरण तक पहुंचाने में सक्रिय भागीदारी निभाई है।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर तेहरान के लिए रवाना हो चुके हैं। बताया जा रहा है कि उनके ईरान पहुंचते ही अमेरिका और ईरान के बीच तैयार ड्राफ्ट समझौते को सार्वजनिक किया जा सकता है। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा था और युद्ध जैसी स्थिति बनने की आशंका गहराती जा रही थी। ऐसे समय में पाकिस्तान द्वारा निभाई जा रही मध्यस्थता की भूमिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है।

पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने भी शुक्रवार को तेहरान में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की। खास बात यह रही कि 24 घंटे के भीतर दोनों नेताओं की यह दूसरी बैठक थी। इन बैठकों में अमेरिका और ईरान के बीच जारी विवाद को समाप्त करने और संभावित युद्ध को रोकने के लिए प्रस्तावित समझौते के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान लगातार दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहा है ताकि हालात और अधिक खराब न हों।

अरब मीडिया संस्थान अल अरबिया की रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित समझौते में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है। दोनों पक्षों ने सैन्य, नागरिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे को निशाना न बनाने पर सहमति जताई है। इसके अलावा मीडिया और सैन्य गतिविधियों के जरिए एक-दूसरे के खिलाफ शत्रुता फैलाने पर रोक लगाने का भी प्रावधान शामिल किया गया है। यह कदम क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे की सीमाओं का सम्मान करने तथा आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने के सिद्धांत पर भी सहमति जताई है। इसके साथ ही जमीन, समुद्र और हवाई क्षेत्र में किसी भी प्रकार की आक्रामक सैन्य कार्रवाई को रोकने का प्रस्ताव भी समझौते का हिस्सा बताया जा रहा है। यदि यह समझौता लागू होता है तो इससे न केवल दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र में स्थिरता आने की संभावना बढ़ जाएगी।

इस संभावित समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर सामने आया है। दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बड़ी मात्रा में वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है। ड्राफ्ट समझौते में इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह सुरक्षित और स्वतंत्र रखने पर सहमति बनी है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजार के लिए यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि इस समुद्री मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

सूत्रों के अनुसार भविष्य में यदि अमेरिका और ईरान के बीच किसी प्रकार के मतभेद पैदा होते हैं तो उन्हें सुलझाने के लिए एक संयुक्त मॉनिटरिंग सिस्टम भी बनाया जाएगा। यह सिस्टम दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने और तनाव को बढ़ने से रोकने में मदद करेगा। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच संदेशों और दस्तावेजों का आदान-प्रदान जारी है और अंतिम शब्दों को लेकर बातचीत चल रही है।

इस बीच कतर ने भी इस पूरे मामले में सक्रिय भूमिका निभाई है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि कतर ने अपनी एक विशेष टीम तेहरान भेजी है। यह टीम अमेरिका के साथ समन्वय बनाकर ईरान के साथ समझौते की संभावनाओं को मजबूत करने का प्रयास कर रही है। कतर लंबे समय से पश्चिम एशिया में मध्यस्थता की भूमिका निभाता रहा है और इस बार भी वह क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों में जुटा हुआ है।

ईरानी मीडिया के मुताबिक अमेरिका के साथ होने वाली संभावित वार्ता के लिए ईरान ने अपने प्रतिनिधिमंडल में भी बदलाव किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई को वार्ता दल का नया प्रवक्ता नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघर गालिबाफ की ओर से की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव ईरान की ओर से बातचीत को अधिक संगठित और प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

मिडिल ईस्ट में पिछले कई महीनों से जारी अस्थिरता और युद्ध की आशंकाओं के बीच यह संभावित समझौता वैश्विक राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह डील सफल होती है तो इससे न केवल दोनों देशों के रिश्तों में नरमी आ सकती है, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की नई उम्मीद भी पैदा होगी। दुनिया भर के देशों की नजर अब तेहरान में होने वाले अगले घटनाक्रम पर टिकी हुई है, जहां आने वाले कुछ घंटे बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।

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