होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ईरान की इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने भारत की ओर आ रहे एक कंटेनर जहाज को रोककर अपने कब्जे में ले लिया है। यह जहाज लाइबेरिया के झंडे वाला एपामिनोडेस नाम का कंटेनर शिप बताया जा रहा है, जो गुजरात के मुंद्रा पोर्ट की ओर जा रहा था। ईरान का आरोप है कि जहाज बिना अनुमति इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहा था और उसके नेविगेशन सिस्टम में छेड़छाड़ की गई थी, जिससे समुद्री सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ।
ईरानी नौसेना ने जहाज को इंटरसेप्ट कर अपने नियंत्रण में लिया और उसे तट की ओर ले जाया गया। इस कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में गिना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस की सप्लाई होती है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक बाजारों पर सीधा असर डालता है।
ईरान ने केवल एक जहाज पर कार्रवाई नहीं की, बल्कि इजराइल से जुड़े बताए जा रहे फ्रांसेस्का नाम के दूसरे जहाज को भी जब्त कर लिया है। वहीं यूफोरिया नाम के एक और जहाज पर हमला किए जाने की खबर सामने आई है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि ईरान इस क्षेत्र में अपनी सख्ती दिखाना चाहता है और समुद्री मार्गों पर नियंत्रण का संदेश दे रहा है।
इन घटनाओं से पहले भी ओमान के तट के पास कई जहाजों पर फायरिंग और हमले की खबरें आई थीं। कुछ जहाजों को नुकसान पहुंचा, जबकि कई क्रू मेंबर सुरक्षित बचाए गए। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने इस क्षेत्र में जहाजों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। लगातार हो रही घटनाओं से बीमा कंपनियों, शिपिंग कंपनियों और आयात-निर्यात कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।
इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की अपील पर अमेरिका ने ईरान के साथ चल रहे युद्धविराम को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। ट्रम्प के अनुसार पाकिस्तान ने अनुरोध किया था कि ईरान को साझा प्रस्ताव तैयार करने के लिए कुछ समय दिया जाए, जिसके बाद अमेरिका ने फिलहाल हमले रोकने का निर्णय लिया। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी सेना को पूरी तरह तैयार रहने के आदेश दिए गए हैं।
ट्रम्प ने कहा कि ईरान की सरकार और नेतृत्व में एकजुटता की कमी दिखाई दे रही है और इसी कारण वार्ता प्रक्रिया धीमी पड़ रही है। अमेरिका ने साफ संकेत दिया है कि यदि ठोस प्रस्ताव सामने नहीं आता तो सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है। साथ ही ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए समुद्री नाकेबंदी जारी रखने की बात भी कही गई है।
होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा सामान्य बनाने के लिए ब्रिटेन और फ्रांस ने लगभग 30 देशों की बैठक बुलाने का फैसला किया है। लंदन में होने वाली इस बैठक में समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा, माइन हटाने और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने पर चर्चा होने की संभावना है। यदि यह योजना आगे बढ़ती है तो अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक मिशन भी बनाया जा सकता है।
इस संकट का असर भारत पर भी दिखने लगा है। भारत आने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कई वस्तुओं की सप्लाई पर दबाव बढ़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार डाइट कोक जैसे कुछ उत्पादों की कमी महसूस की जा रही है, क्योंकि इनके लिए इस्तेमाल होने वाले एल्यूमिनियम कैन की सप्लाई खाड़ी देशों से प्रभावित हुई है। भारत के लिए ऊर्जा आयात भी बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से मंगाता है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार युद्ध और तनाव के बीच बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक क्षेत्र से वापस लौटे हैं। फरवरी के अंत से अब तक लगभग 12 लाख भारतीयों की वापसी बताई गई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हालात कितने गंभीर बने हुए हैं। भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और समुद्री मार्गों से गुजरने वाले भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है।
चीन ने भी इस संकट पर प्रतिक्रिया दी है। अमेरिका की ओर से लगाए गए आरोपों को चीन ने खारिज करते हुए कहा कि ओमान की खाड़ी में पकड़ा गया जहाज उसका नहीं है। चीन ने किसी भी प्रकार की सैन्य मदद या गुप्त सप्लाई से इनकार किया है। चीन ने साथ ही यह भी कहा कि मध्य पूर्व की स्थिति बेहद नाजुक मोड़ पर है और सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए।
ईरान की ओर से भी कड़े बयान जारी किए गए हैं। IRGC ने कहा है कि यदि किसी ने हमला किया तो उसका जोरदार जवाब दिया जाएगा। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि अमेरिकी नाकेबंदी से जरूरी सामान और खाद्य आपूर्ति पर बड़ा असर नहीं पड़ा है, क्योंकि देश अपनी अधिकांश जरूरतें खुद पूरी करता है।
दूसरी ओर यूरोप की सबसे बड़ी एयरलाइन लुफ्थांसा ने ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के कारण हजारों उड़ानें रद्द करने का फैसला किया है। इससे साफ है कि यह संकट केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, एविएशन सेक्टर और सप्लाई चेन पर असर डाल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। इसका असर पेट्रोल-डीजल से लेकर रोजमर्रा के सामान तक पड़ सकता है। भारत जैसे आयातक देशों के लिए यह चुनौती और बड़ी हो सकती है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय देशों के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है। यदि तनाव कम होता है तो व्यापारिक गतिविधियां सामान्य हो सकती हैं, लेकिन यदि जहाजों पर हमले और कब्जे की घटनाएं जारी रहती हैं तो वैश्विक संकट और गहरा सकता है। भारत के लिए भी यह समय रणनीतिक सतर्कता और आर्थिक तैयारी का है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट में हलचल का सीधा असर देश की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार पर पड़ता है।


