देश में हवाई यात्रा और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी एक बड़ी नीति बदलाव की खबर सामने आई है। भारत सरकार ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF में इथेनॉल मिलाने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही अब एटीएफ में इथेनॉल के अलावा अन्य सिंथेटिक या मानव-निर्मित हाइड्रोकार्बन भी मिलाए जा सकेंगे। सरकार ने इस संबंध में राजपत्र अधिसूचना जारी कर दी है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि भारत अब विमानन क्षेत्र में स्वच्छ, किफायती और वैकल्पिक ईंधन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
यह फैसला पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत जारी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (मार्केटिंग का विनियमन) आदेश 2001 में संशोधन के बाद लिया गया है। मंत्रालय ने न केवल ईंधन मिश्रण की अनुमति दी है, बल्कि एटीएफ की मार्केटिंग से जुड़े नियमों को भी अपडेट किया है। साथ ही प्रवर्तन प्रावधानों को आधुनिक आपराधिक प्रक्रिया कानूनों के अनुरूप संशोधित किया गया है।
सरकार ने फिलहाल इस नीति के तहत कोई अनिवार्य लक्ष्य निर्धारित नहीं किया है। यानी अभी यह तय नहीं किया गया है कि ATF में कितना इथेनॉल मिलाना होगा या कब तक इसे लागू करना होगा। कोई समयसीमा भी घोषित नहीं की गई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह शुरुआती कदम है और भविष्य में सरकार चरणबद्ध तरीके से मिश्रण अनुपात तय कर सकती है।
अब तक विमानन क्षेत्र मुख्य रूप से पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर निर्भर रहा है। एयरलाइंस कंपनियों के कुल परिचालन खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी सबसे अधिक होती है। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर एयरलाइंस के खर्च और यात्रियों के किराए पर पड़ता है। ऐसे में यदि एटीएफ में इथेनॉल या सिंथेटिक ईंधन का मिश्रण सफल रहता है, तो एयरलाइंस कंपनियों की लागत कम हो सकती है। इसका लाभ आगे चलकर यात्रियों को सस्ते हवाई किराए के रूप में मिल सकता है।
भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित कच्चे तेल पर निर्भर है। बड़ी मात्रा में तेल आयात होने के कारण विदेशी मुद्रा पर भारी दबाव पड़ता है। सरकार का उद्देश्य इस निर्भरता को कम करना है। पेट्रोल और डीजल में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की सफलता के बाद अब विमानन क्षेत्र में भी वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे आयात बिल घटाने में मदद मिल सकती है।
इस नीति का एक बड़ा उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण भी है। विमानन क्षेत्र कार्बन उत्सर्जन का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। दुनिया भर में एयरलाइंस उद्योग पर स्वच्छ ईंधन अपनाने का दबाव बढ़ रहा है। भारत ने भी नेट ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य तय किया है। ऐसे में एटीएफ में इथेनॉल और कम प्रदूषण वाले सिंथेटिक ईंधन का उपयोग देश को जलवायु लक्ष्यों की दिशा में आगे ले जा सकता है।
यदि स्वच्छ ईंधन का उपयोग बढ़ता है तो कार्बन उत्सर्जन घटेगा, वायु गुणवत्ता में सुधार होगा और दीर्घकाल में पर्यावरणीय नुकसान कम किया जा सकेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य का विमानन उद्योग केवल तेज और सस्ता ही नहीं, बल्कि टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल भी होना चाहिए।
सरकार ने अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया है कि ईंधन मिश्रण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप किया जाएगा। इसमें IS 17081 जैसे मानकों का उल्लेख किया गया है। इसका मतलब है कि सुरक्षा, गुणवत्ता और तकनीकी विश्वसनीयता से समझौता नहीं किया जाएगा। विमानन क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील होता है, इसलिए किसी भी नए ईंधन के उपयोग से पहले कठोर गुणवत्ता परीक्षण और प्रमाणन जरूरी होता है।
भारत पहले ही इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के जरिए उल्लेखनीय आर्थिक लाभ हासिल कर चुका है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 से अब तक इथेनॉल मिश्रण से देश ने 1.63 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाई है। यह बचत आयातित पेट्रोलियम उत्पादों की जरूरत घटने से संभव हुई है।
इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने के शीरे, मक्का और खराब या अधिशेष अनाज से तैयार किया जाता है। इसका एक बड़ा लाभ किसानों को भी मिलता है। जब इथेनॉल उत्पादन बढ़ता है तो कृषि उपज की मांग बढ़ती है और किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं। अब तक किसानों को लगभग 1.43 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने की जानकारी दी गई है। इसका अर्थ है कि यह नीति केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती है।
यदि भविष्य में विमानन ईंधन में इथेनॉल मिश्रण बड़े स्तर पर लागू होता है तो इससे कृषि, उद्योग, ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र को एक साथ लाभ मिल सकता है। इससे नए निवेश, बायोफ्यूल प्लांट, रोजगार अवसर और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि विमानन ईंधन में मिश्रण लागू करना सड़क परिवहन की तुलना में अधिक जटिल होगा। विमानों के इंजन, सुरक्षा मानक, ऊंचाई पर प्रदर्शन और वैश्विक प्रमाणन जैसी कई चुनौतियां होंगी। इसलिए यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी।
कुल मिलाकर, ATF में इथेनॉल मिलाने की अनुमति भारत के विमानन और ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा नीतिगत बदलाव है। इससे भविष्य में हवाई यात्रा अधिक किफायती, स्वच्छ और आत्मनिर्भर हो सकती है। यह कदम भारत को हरित ऊर्जा अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।


