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राजस्थान में हीटवेव अलर्ट: सरकार ने जारी की सख्त गाइडलाइन

राजस्थान में हीटवेव अलर्ट: सरकार ने जारी की सख्त गाइडलाइन

राजस्थान में लगातार बढ़ती गर्मी और चढ़ते तापमान ने आमजन की चिंता को और गहरा कर दिया है। प्रदेश के कई हिस्सों में पारा तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में प्रचंड हीटवेव की आशंका जताई जा रही है। इसी खतरे को देखते हुए राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने विस्तृत गाइडलाइन जारी की है, ताकि लोग लू और उससे होने वाली गंभीर बीमारियों से बच सकें। विभाग की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि इस समय थोड़ी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

उप शासन सचिव शैफाली कुशवाहा ने बताया कि गर्मी के इस दौर में लोगों को अपने दैनिक जीवन में कुछ जरूरी बदलाव करने होंगे। विशेष रूप से दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है। दोपहर 12 बजे से लेकर 3 बजे तक सूर्य की तपिश अपने चरम पर होती है और इस दौरान बाहर रहने से हीट स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है। यदि किसी कारणवश बाहर जाना जरूरी हो, तो हल्के रंग के सूती और ढीले कपड़े पहनने चाहिए और सिर को छाते, टोपी या कपड़े से ढककर रखना चाहिए, ताकि सीधी धूप से बचाव हो सके।

खान-पान को लेकर भी विभाग ने विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। शरीर में पानी की कमी को रोकने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही ओआरएस घोल, लस्सी, छाछ और नींबू पानी जैसे पेय पदार्थों का सेवन बढ़ाने की सलाह दी गई है, जो शरीर को ठंडक प्रदान करने के साथ-साथ जरूरी खनिजों की पूर्ति भी करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि खाली पेट बाहर निकलना नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए हल्का और संतुलित भोजन करना चाहिए। वहीं अत्यधिक प्रोटीन युक्त या बासी भोजन से दूरी बनाए रखना बेहतर है। इसके अलावा शराब, चाय, कॉफी और सोडा जैसे पेय पदार्थों से परहेज करने की सलाह दी गई है, क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी को बढ़ा सकते हैं।

गाइडलाइन में विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों का ध्यान रखने पर जोर दिया गया है। यह वर्ग गर्मी के प्रति अधिक संवेदनशील होता है और इनमें हीट स्ट्रोक का खतरा अधिक रहता है। छोटे बच्चों को कभी भी बंद खड़ी गाड़ी में अकेला नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि वाहन के अंदर का तापमान बहुत तेजी से बढ़ता है और यह जानलेवा साबित हो सकता है। इसी तरह पालतू जानवरों को भी ऐसी परिस्थितियों से दूर रखना जरूरी है। लोगों को यह भी सलाह दी गई है कि वे अत्यधिक शारीरिक मेहनत वाले कामों से बचें और समय-समय पर ठंडे पानी से चेहरा और हाथ धोते रहें, जिससे शरीर का तापमान नियंत्रित बना रहे।

सरकार ने मजदूरों और कामगारों के हितों को ध्यान में रखते हुए नियोक्ताओं और ठेकेदारों को भी सख्त निर्देश दिए हैं। कार्यस्थलों पर ठंडा पानी और ओआरएस जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही मजदूरों को सीधी धूप से बचाने के लिए छायादार स्थानों की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया गया है। भारी श्रम वाले कार्यों को सुबह जल्दी या शाम के समय कराने की सलाह दी गई है, ताकि कामगारों को तेज धूप का सामना न करना पड़े। साथ ही, कार्यस्थल पर गर्मी से होने वाली बीमारियों के लक्षणों के प्रति जागरूकता फैलाना और जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना भी नियोक्ताओं की जिम्मेदारी तय की गई है।

गाइडलाइन में पशुओं के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। भीषण गर्मी का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पशुओं पर भी पड़ता है। इसलिए उन्हें छायादार और ठंडी जगह पर रखने की सलाह दी गई है। दिन के सबसे गर्म समय, यानी सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक पशुओं से कोई भारी काम नहीं लेने के निर्देश दिए गए हैं। उनके शेड को ठंडा रखने के लिए घास-फूस का उपयोग करने या सफेद चूने से पेंट करने की सलाह दी गई है, जिससे तापमान नियंत्रित रखा जा सके। साथ ही पशुओं को स्वच्छ और ठंडा पानी उपलब्ध कराना और उनके आहार में हरा चारा व खनिज मिश्रण शामिल करना भी जरूरी बताया गया है।

आपात स्थिति से निपटने के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी व्यक्ति को चक्कर आना, अत्यधिक पसीना आना, कमजोरी, सिरदर्द या जी मिचलाने जैसी समस्या महसूस हो, तो उसे तुरंत ठंडी जगह पर ले जाना चाहिए। उसके शरीर को गीले कपड़े से ठंडा करना और ओआरएस या नींबू पानी पिलाना प्राथमिक उपचार के रूप में जरूरी है। यदि स्थिति गंभीर हो जाए और व्यक्ति बेहोश हो जाए या तेज बुखार हो, तो यह हीट स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में बिना देर किए आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करना चाहिए या मरीज को नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए।

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