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राजस्थान में गर्मी का प्रकोप, जैसलमेर-बाड़मेर में पारा 42 डिग्री पार

राजस्थान में गर्मी का प्रकोप, जैसलमेर-बाड़मेर में पारा 42 डिग्री पार

राजस्थान में गर्मी ने समय से पहले ही अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं और पश्चिमी जिलों में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। खासतौर पर जैसलमेर और बाड़मेर जैसे रेगिस्तानी इलाकों में तापमान तेजी से बढ़ता हुआ 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। दिन की शुरुआत से ही तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों का जीवन प्रभावित कर दिया है, जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त होता नजर आ रहा है।

जैसलमेर में इस सीजन का अब तक का सबसे अधिक तापमान दर्ज किया गया है, जहां पारा 42.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। खास बात यह रही कि रात का तापमान भी पहली बार 26 डिग्री के पार चला गया, जिससे लोगों को रात में भी राहत नहीं मिल रही है। आमतौर पर रात के समय तापमान में गिरावट से कुछ राहत मिलती है, लेकिन इस बार गर्म हवाओं का असर रात में भी बना हुआ है, जिससे हालात और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गए हैं।

वहीं, पूरे प्रदेश में सबसे अधिक गर्मी बाड़मेर में दर्ज की गई है, जहां तापमान 42.9 डिग्री तक पहुंच गया। सुबह के समय ही इतनी तेज गर्मी महसूस होने लगती है कि लोगों के लिए घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। दोपहर के समय स्थिति और भी खराब हो जाती है, जब लू के थपेड़े लोगों को झुलसा देने वाले साबित होते हैं। गर्मी के इस प्रकोप से बचने के लिए लोग अपने-अपने स्तर पर उपाय करते नजर आ रहे हैं, जैसे ठंडे पेय पदार्थों का सेवन, घरों में रहना और धूप से बचाव के साधन अपनाना।

तेजी से बढ़ते तापमान का असर अब बाजारों और सड़कों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दोपहर के समय शहरों की प्रमुख सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है, जबकि बाजारों में ग्राहकों की संख्या में भारी गिरावट देखी जा रही है। दुकानदारों का कहना है कि दोपहर के समय कारोबार लगभग ठप हो जाता है और लोग जरूरी काम के अलावा बाहर निकलने से बच रहे हैं। इससे स्थानीय व्यापार पर भी असर पड़ने लगा है।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। कृषि मौसम वैज्ञानिक दीपक चतुर्वेदी के अनुसार, फिलहाल पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में हीटवेव जैसी स्थिति बनी हुई है और अगले कुछ दिनों में तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ोतरी हो सकती है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में तापमान 44 डिग्री के करीब पहुंच सकता है, जो लोगों के लिए और अधिक परेशानी का कारण बन सकता है।

गर्मी के इस बढ़ते प्रभाव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट मोड पर आ गया है। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को जरूरी तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि हीटवेव से प्रभावित मरीजों को तुरंत उपचार मिल सके। डॉ. राजेंद्र कुमार पालीवाल ने जानकारी दी कि सभी अस्पतालों में ओआरएस, ग्लूकोज ड्रिप, आवश्यक दवाइयों और स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य कर्मियों को भी सतर्क रहने के लिए कहा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की भीषण गर्मी केवल स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय है। लगातार बढ़ते तापमान का असर कृषि गतिविधियों, पशुपालन और जल संसाधनों पर भी पड़ता है। इसके अलावा बिजली की मांग में भी तेजी से वृद्धि होती है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ जाता है।

ऐसे हालात में लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और हल्के एवं ढीले कपड़े पहनना जैसे उपाय अपनाकर गर्मी के प्रभाव को कम किया जा सकता है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करना भी बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या से बचा जा सके।

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