मनीषा शर्मा, अजमेर । भारत हमेशा से अपनी विविध और समृद्ध संस्कृति के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। यहां की कला, परंपराएं और हस्तशिल्प न केवल इतिहास और संस्कृति को जीवित रखते हैं, बल्कि लाखों लोगों के लिए रोज़गार का साधन भी बनते हैं। पिछले कुछ वर्षों में हैंडीक्राफ्ट (हस्तशिल्प) के क्षेत्र में भारी बदलाव आया है। पहले यह कला केवल मेलों, हाट-बाज़ारों और स्थानीय ग्राहकों तक सीमित थी, लेकिन आज ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और एक्सपोर्ट के चलते यह एक बड़ा उद्योग बन गया है। यही कारण है कि आज भारत में हैंडीक्राफ्ट से कमाई के अवसर लाखों रुपये महीना तक पहुंच गए हैं।
भारत के हस्तशिल्प की खासियत यह है कि हर राज्य और हर क्षेत्र का अपना अलग अंदाज़ है। राजस्थान की ब्लू पॉटरी, मध्यप्रदेश की गोंड पेंटिंग, बिहार की मधुबनी कला, ओडिशा की पत्ताचित्र पेंटिंग, कश्मीर का हैंडलूम और पश्मीना, तमिलनाडु की कांजीवरम साड़ियां, और असम का बांस-क्राफ्ट पूरी दुनिया में अपनी पहचान बना चुके हैं। इसी विविधता की वजह से भारतीय हस्तशिल्प केवल घरेलू ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारी डिमांड रखते हैं।
अब सवाल यह है कि अलग-अलग हैंडीक्राफ्ट से आखिर कितनी कमाई की जा सकती है। इस सवाल का जवाब अलग-अलग फैक्टर पर निर्भर करता है, जैसे कलाकार की स्किल, डिज़ाइन में यूनिकनेस, कच्चे माल की उपलब्धता, लोकल और ऑनलाइन मार्केटिंग, ग्राहकों तक पहुंच और ब्रांडिंग। यदि कोई शिल्पकार केवल लोकल स्तर पर काम करता है, तो उसकी मासिक आय दस से बीस हज़ार रुपये तक हो सकती है। वहीं यदि वही शिल्पकार अपनी कला को ब्रांडिंग करके ऑनलाइन और एक्सपोर्ट तक ले जाता है, तो यही कमाई लाखों रुपये महीना तक पहुंच सकती है।
हैंडमेड ज्वेलरी से आय
हैंडमेड ज्वेलरी बनाने का काम आज के समय में बहुत लोकप्रिय हो चुका है। पॉलिमर क्ले, रेज़िन, बीड्स, धागा और सिल्वर से बनी ज्वेलरी खासतौर पर युवाओं और महिलाओं को आकर्षित करती है। लोकल स्तर पर यह काम करने वाले लोग दस से पच्चीस हज़ार रुपये महीना तक आसानी से कमा सकते हैं। वहीं यदि इंस्टाग्राम, अमेज़न, फ्लिपकार्ट या अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म Etsy पर यह प्रोडक्ट्स बेचे जाएं तो मासिक आय पच्चीस हज़ार से लेकर एक लाख रुपये से अधिक हो सकती है। खासकर टेराकोटा और रेज़िन ज्वेलरी की विदेशी बाजारों में काफी मांग रहती है।
कमाई:
लोकल मार्केट या मेलों में: ₹10,000 – ₹25,000/माह
ऑनलाइन (Etsy, Amazon, Instagram): ₹25,000 – ₹1,00,000+/माह
फायदा: महिलाओं और युवाओं में ज़बरदस्त डिमांड।
निवेश: ₹5,000 – ₹20,000 (सामान व टूल्स पर)।
मिट्टी और टेराकोटा आर्ट से कमाई
मिट्टी और टेराकोटा से बने शोपीस, दीये और डेकोरेशन आइटम भारत की परंपरा से जुड़े हुए हैं। दीपावली और अन्य त्योहारों पर इनकी मांग बहुत बढ़ जाती है। छोटे स्तर पर यह काम करने वाले लोग आठ से बीस हज़ार रुपये तक की आय कर सकते हैं। वहीं यदि यह कला ब्रांडिंग और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पहुंचे, तो मासिक कमाई तीस हज़ार से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक हो सकती है।
कमाई:
लोकल मेले/हाट बाज़ार में: ₹8,000 – ₹20,000/माह
अगर ब्रांडिंग और ऑनलाइन बिक्री हो: ₹30,000 – ₹1,50,000/माह
विशेषता: दीपावली जैसे त्योहारों पर ज़बरदस्त डिमांड।
एम्ब्रॉयडरी और सिलाई कढ़ाई से आय
भारत में महिलाओं के लिए सिलाई-कढ़ाई एक पुरानी कला है। आज इसका व्यावसायिक रूप बुटीक और ऑनलाइन स्टोर में देखा जा सकता है। कपड़ों पर हैंड एम्ब्रॉयडरी, बैग, कुशन कवर और होम डेकोर की वस्तुएं ग्राहकों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। यदि कोई महिला घर से काम करती है तो उसकी मासिक कमाई पंद्रह से चालीस हज़ार रुपये तक हो सकती है। वहीं यदि वह अपना ब्रांड बनाकर बुटीक या ऑनलाइन बिज़नेस शुरू करती है तो मासिक आय पचास हज़ार से लेकर दो लाख रुपये तक पहुंच सकती है।
कमाई:
ऑर्डर वर्क पर: ₹15,000 – ₹40,000/माह
बुटीक या ऑनलाइन ब्रांड शुरू करने पर: ₹50,000 – ₹2,00,000/माह
फायदा: शादी-ब्याह और त्योहारों पर भारी मांग।
वुड क्राफ्ट से कमाई
लकड़ी से बनी कलाकृतियां जैसे खिलौने, गहनों के बॉक्स, शोपीस और फर्नीचर हमेशा से डिमांड में रहते हैं। लोकल स्तर पर इस काम से बीस से पचास हज़ार रुपये तक की आय होती है। लेकिन यदि कोई शिल्पकार बड़े स्तर पर वर्कशॉप खोलकर एक्सपोर्ट करता है, तो मासिक कमाई एक लाख से पांच लाख रुपये तक पहुंच सकती है। खासकर विदेशी बाजारों में भारतीय वुड क्राफ्ट की बहुत मांग है।
कमाई:
छोटा स्तर: ₹20,000 – ₹50,000/माह
बड़ा वर्कशॉप और एक्सपोर्ट: ₹1,00,000 – ₹5,00,000+/माह
विशेषता: विदेशी बाजार में भारी डिमांड।
टेक्सटाइल और हैंडलूम से आय
भारत में हैंडलूम और टेक्सटाइल कला का बहुत बड़ा इतिहास है। हाथ से बुनी साड़ियां, दुपट्टे, शॉल और कालीन हमेशा से घरेलू और विदेशी ग्राहकों के बीच लोकप्रिय रहे हैं। लोकल मार्केट में यह काम करने वाले लोग पंद्रह से चालीस हज़ार रुपये महीना तक कमा सकते हैं। वहीं यदि इन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और एक्सपोर्ट से जोड़ा जाए तो आय पचास हज़ार से लेकर तीन लाख रुपये महीना तक हो सकती है।
कमाई:
लोकल मार्केट: ₹15,000 – ₹40,000/माह
ई-कॉमर्स और एक्सपोर्ट: ₹50,000 – ₹3,00,000/माह
विशेषता: भारत के पारंपरिक टेक्सटाइल को विदेशों में बहुत पसंद किया जाता है।
पारंपरिक पेंटिंग और आर्ट वर्क से आय
भारत की पारंपरिक पेंटिंग जैसे मधुबनी, वर्ली, गोंड और पत्ताचित्र कला न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी खूब पसंद की जाती हैं। आर्ट फेयर और लोकल मार्केट में इन्हें बेचने वाले कलाकार दस से तीस हज़ार रुपये महीना तक कमाते हैं। वहीं यदि यह कला गैलरी, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और कस्टमाइज्ड ऑर्डर तक पहुंचे तो आय पचास हज़ार से लेकर दो लाख रुपये महीना तक हो सकती है।
कमाई:
लोकल आर्ट फेयर: ₹10,000 – ₹30,000/माह
ऑनलाइन/गैलरी/कस्टमाइज ऑर्डर: ₹50,000 – ₹2,00,000/माह
विशेषता: गिफ्टिंग और होम डेकोरेशन में ज़बरदस्त डिमांड।
पेपर क्राफ्ट और हैंडमेड गिफ्ट से आय
पेपर क्विलिंग, पॉप-अप कार्ड, हैंडमेड डायरी और पर्सनलाइज्ड गिफ्ट्स की आजकल बहुत मांग है। छोटे स्तर पर यह काम करने वाले आठ से बीस हज़ार रुपये महीना तक कमाते हैं। वहीं इंस्टाग्राम और ऑनलाइन ब्रांडिंग के जरिए यही आय पच्चीस हज़ार से अस्सी हज़ार रुपये महीना तक हो सकती है।
कमाई:
छोटा स्तर: ₹8,000 – ₹20,000/माह
इंस्टाग्राम/ऑनलाइन ब्रांडिंग: ₹25,000 – ₹80,000/माह
विशेषता: शादियों और जन्मदिनों पर पर्सनलाइज्ड गिफ्ट्स की भारी मांग।
बांस और जूट क्राफ्ट से कमाई
बांस और जूट से बने फर्नीचर, टोकरी और बैग पर्यावरण के अनुकूल होते हैं। यही वजह है कि इनकी डिमांड युवाओं और विदेशों में बहुत बढ़ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह काम करने वाले लोग दस से पच्चीस हज़ार रुपये महीना तक कमा लेते हैं, जबकि शहरों और ऑनलाइन बाजार में यही कमाई तीस हज़ार से एक लाख रुपये महीना तक हो सकती है।
कमाई:
ग्रामीण इलाकों में लोकल सेल: ₹10,000 – ₹25,000/माह
शहर/ऑनलाइन मार्केट: ₹30,000 – ₹1,00,000/माह
फायदा: Eco-friendly होने की वजह से युवाओं और विदेशों में डिमांड।
कैंडल और सोप मेकिंग से आय
आजकल सुगंधित कैंडल और हैंडमेड साबुन का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। गिफ्टिंग और वेलनेस सेक्टर में इनकी डिमांड काफी बढ़ी है। लोकल स्तर पर कैंडल और सोप बनाने वाले पंद्रह से तीस हज़ार रुपये महीना तक कमाते हैं। लेकिन यदि कोई शिल्पकार इसे ब्रांडिंग करके ऑनलाइन और बड़े ग्राहकों तक पहुंचाता है, तो यही कमाई पचास हज़ार से डेढ़ लाख रुपये महीना तक हो सकती है।
सुगंधित कैंडल, डिजाइनर साबुन, गिफ्ट सेट।
कमाई:
लोकल सेल: ₹15,000 – ₹30,000/माह
ब्रांड और इंस्टाग्राम बिज़नेस: ₹50,000 – ₹1,50,000/माह
विशेषता: गिफ्टिंग और वेलनेस सेक्टर में बहुत लोकप्रिय।
भारत में हैंडीक्राफ्ट से कमाई छोटे स्तर पर आठ से दस हज़ार रुपये महीना से शुरू होकर पांच लाख रुपये महीना तक जा सकती है। फर्क केवल इतना है कि कोई शिल्पकार अपनी कला को किस स्तर तक पहुंचाता है। यदि कोई केवल लोकल बाजार तक सीमित रहता है, तो उसकी कमाई सीमित होती है। लेकिन यदि वही कलाकार अपनी कला को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, ब्रांडिंग और एक्सपोर्ट से जोड़ता है, तो उसकी कमाई असीमित हो सकती है।
आज के डिजिटल युग में हर हस्तशिल्प कलाकार के पास यह अवसर है कि वह अपनी कला को सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाए। भारत के पास इतना बड़ा हैंडीक्राफ्ट बाजार है कि यदि इसे सही रणनीति और मार्केटिंग के साथ इस्तेमाल किया जाए तो न केवल कलाकार की जिंदगी बदल सकती है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।