latest-news

राजधानी एक्सप्रेस में लगी आग, 68 यात्रियों की बची जान

राजधानी एक्सप्रेस में लगी आग, 68 यात्रियों की बची जान

त्रिवेंद्रम–हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस में रविवार सुबह अचानक आग लगने की घटना ने यात्रियों और रेलवे प्रशासन दोनों को हिला कर रख दिया। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में आलोट स्टेशन के पास हुए इस हादसे के दौरान ट्रेन के बी-1 एसी कोच में अचानक धुआं उठने लगा, जो कुछ ही क्षणों में आग की लपटों में बदल गया। घटना उस समय हुई जब अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे। कोच में करीब 68 यात्री सवार थे और अचानक धुआं फैलने से अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि समय रहते रेलवे स्टाफ की सतर्कता और ट्रेन में लगे आधुनिक सुरक्षा सिस्टम के कारण बड़ा हादसा टल गया और सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

जानकारी के अनुसार यह घटना रविवार सुबह लगभग 5:30 बजे की है। ट्रेन अपने निर्धारित मार्ग पर चल रही थी, तभी बी-1 एसी कोच में धुआं दिखाई देने लगा। शुरुआती कुछ सेकेंड में किसी को स्थिति की गंभीरता का अंदाजा नहीं हुआ, लेकिन धीरे-धीरे धुआं तेजी से फैलने लगा और आग की लपटें नजर आने लगीं। ट्रेन में मौजूद गार्ड ने तुरंत स्थिति को भांप लिया और लोको पायलट को सूचना दी। इसके बाद रेलवे के इमरजेंसी प्रोटोकॉल को सक्रिय किया गया।

लोको पायलट ने ऑटोमेटिक सुरक्षा प्रणाली की मदद से ट्रेन को तुरंत रोक दिया। ट्रेन रुकते ही यात्रियों को बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। रेलवे कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों ने बेहद तेजी और सूझबूझ के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। खासतौर पर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्ग यात्रियों को प्राथमिकता देते हुए कोच से बाहर निकाला गया। बताया जा रहा है कि करीब 15 मिनट के भीतर पूरे कोच को खाली करा लिया गया। इस दौरान यात्रियों में घबराहट जरूर थी, लेकिन रेलवे स्टाफ की सक्रियता के कारण स्थिति नियंत्रण में रही।

घटना स्थल नजदीकी रेलवे स्टेशन से कुछ दूरी पर स्थित था, जिसके कारण राहत और बचाव दल को मौके तक पहुंचाने में चुनौती सामने आई। ऐसे में रेलवे प्रशासन ने डिजिटल तकनीक का सहारा लिया और संबंधित एजेंसियों के साथ लाइव लोकेशन साझा की गई। इसी वजह से दमकल विभाग की टीमें तेजी से घटनास्थल तक पहुंच सकीं। तीन अलग-अलग स्थानों से फायर ब्रिगेड की गाड़ियां रवाना की गईं और मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का काम शुरू किया गया।

आग की गंभीरता को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने एहतियात के तौर पर ट्रेन की बिजली सप्लाई तुरंत बंद कर दी। इसके साथ ही दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर कुछ समय के लिए रेल यातायात भी रोक दिया गया ताकि किसी अन्य प्रकार की दुर्घटना की संभावना न रहे। भारतीय रेलवे  के कोटा रेल मंडल के वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी टीम भी तत्काल घटनास्थल पर पहुंच गई। अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया और राहत कार्य की निगरानी की।

इस पूरे घटनाक्रम में ट्रेन में लगा फायर एंड स्मोक डिटेक्शन सिस्टम यानी FSDS सबसे महत्वपूर्ण साबित हुआ। रेलवे अधिकारियों के अनुसार जैसे ही कोच में धुआं बनने लगा, सिस्टम ने तुरंत अलर्ट जारी कर दिया। यही शुरुआती चेतावनी पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की सबसे अहम कड़ी बनी। यदि समय रहते यह अलर्ट नहीं मिलता तो स्थिति और ज्यादा भयावह हो सकती थी।

रेलवे विशेषज्ञों के अनुसार FSDS आधुनिक ट्रेनों में लगाया जाने वाला एक उन्नत सुरक्षा तंत्र है, जिसका मुख्य उद्देश्य आग और धुएं का शुरुआती स्तर पर पता लगाना होता है। यह सिस्टम धुआं या तापमान में असामान्य बदलाव होते ही अलार्म जारी करता है और चालक दल को सतर्क कर देता है। कई मामलों में यह सिस्टम स्वतः सक्रिय होकर गैस या पानी का छिड़काव भी करता है ताकि आग को शुरुआती स्तर पर नियंत्रित किया जा सके और उसे फैलने से रोका जा सके।

कोटा रेल मंडल के वरिष्ठ डीसीएम सौरभ जैन ने बताया कि ट्रेन को ऑटोमेटिक सिस्टम के माध्यम से तुरंत रोका गया और राहत दलों के साथ लोकेशन साझा कर तेजी से कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। रेलवे प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित कर दी है, जो तकनीकी खामियों और अन्य संभावित कारणों की जांच करेगी।

घटना के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली कि समय रहते उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। कई यात्रियों ने रेलवे कर्मचारियों और दमकल विभाग की तत्परता की सराहना की। यात्रियों का कहना था कि यदि कुछ मिनट की भी देरी होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। इस घटना ने एक बार फिर रेलवे में आधुनिक सुरक्षा तकनीकों की उपयोगिता को साबित कर दिया है।

हालांकि इस हादसे में किसी के घायल होने या जानमाल के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है, लेकिन इस घटना ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल भी खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रेनों में नियमित तकनीकी जांच और सुरक्षा उपकरणों का सही रखरखाव बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

रेलवे प्रशासन अब जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि आग तकनीकी खराबी के कारण लगी या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी। फिलहाल राहत की बात यह रही कि समय पर मिले अलर्ट, रेलवे स्टाफ की सतर्कता और आधुनिक सुरक्षा प्रणाली की वजह से एक बड़ा रेल हादसा टल गया।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading