राजस्थान के अजमेर में इन दिनों भीषण गर्मी ने लोगों का जनजीवन प्रभावित कर दिया है। रविवार को सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं का असर देखने को मिला। दिन चढ़ने के साथ तापमान लगातार बढ़ता गया और दोपहर तक हालात इतने गंभीर हो गए कि शहर की सड़कों पर सन्नाटा पसरा नजर आया। लू के थपेड़ों और तेज तपिश ने आमजन को बेहाल कर दिया। लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले और धूप से बचने के लिए ठंडे पेय पदार्थों तथा सिर ढंककर यात्रा करते दिखाई दिए।
मौसम विभाग के अनुसार रविवार को अजमेर का अधिकतम तापमान 42.4 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान करीब 27 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। इससे पहले शनिवार को भी गर्मी का असर तेज रहा था। उस दिन अधिकतम तापमान में 0.4 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी और यह 40.9 डिग्री तक पहुंच गया था। वहीं न्यूनतम तापमान में भी लगभग 3.7 डिग्री की बढ़ोतरी हुई थी और यह 28.3 डिग्री दर्ज किया गया। लगातार बढ़ते तापमान ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है।
अजमेर में सुबह के समय भी गर्म हवाएं चलने लगी थीं, जिससे लोगों को उमस और बेचैनी महसूस हुई। आमतौर पर सुबह का समय राहत देने वाला माना जाता है, लेकिन इस बार सुबह से ही मौसम गर्म बना रहा। दोपहर के समय स्थिति और अधिक कठिन हो गई। शहर के प्रमुख बाजारों और सड़कों पर लोगों की आवाजाही काफी कम दिखाई दी। जो लोग बाहर निकले, वे तेज धूप से बचने के लिए छाते, गमछे और पानी की बोतलों का सहारा लेते नजर आए।
भीषण गर्मी को देखते हुए प्रशासन और अग्निशमन विभाग ने भी राहत कार्य शुरू कर दिए हैं। शहर में बढ़ती तपिश और धूलभरी हवाओं से लोगों को कुछ राहत देने के उद्देश्य से प्रमुख सड़कों पर पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। अग्निशमन विभाग की टीमों को इसके लिए विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों के अनुसार अगले एक महीने तक यह अभियान लगातार जारी रखा जाएगा ताकि शहरवासियों को गर्मी से कुछ हद तक राहत मिल सके।
गर्मी का असर केवल आमजन तक सीमित नहीं है, बल्कि अस्पतालों में भर्ती मरीज भी इससे काफी परेशान हैं। अजमेर संभाग के सबसे बड़े जवाहरलाल नेहरू अस्पताल यानी जेएलएन अस्पताल में भी गर्मी ने मरीजों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अस्पताल के कई वार्डों में कूलर बंद पड़े होने की शिकायतें सामने आई हैं। इसके कारण मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजन अपने घरों से टेबल फैन लाकर व्यवस्था करते दिखाई दिए। कई लोगों ने अस्पताल प्रशासन से जल्द कूलर ठीक कराने की मांग की है। मरीजों का कहना है कि पहले से बीमारी की स्थिति में गर्मी और उमस ने उनकी परेशानी को और बढ़ा दिया है। अस्पताल के वार्डों में पर्याप्त ठंडक नहीं होने से बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को अधिक दिक्कत हो रही है।
मौसम वैज्ञानिक डॉ. विजय घई ने बताया कि अजमेर संभाग में अगले एक सप्ताह तक मौसम मुख्य रूप से शुष्क बना रहेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ोतरी हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान 42 से 43 डिग्री तक पहुंचने की संभावना है। इसके साथ ही गर्म हवाओं का असर भी लगातार बना रहेगा।
डॉ. विजय घई ने यह भी बताया कि 18 मई से 22 मई के बीच 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इन हवाओं के कारण गर्मी का असर और अधिक महसूस होगा। मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे दोपहर के समय अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है।
अगले तीन दिनों के मौसम को लेकर भी विभाग ने अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार 17 मई को तेज गर्मी का असर जारी रहेगा और कुछ स्थानों पर आंधी तथा हल्की बारिश की संभावना भी बन सकती है। हालांकि इससे तापमान में ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। 18 मई को गर्मी और अधिक तेज होने की संभावना जताई गई है और कई क्षेत्रों में लू जैसे हालात बन सकते हैं। वहीं 19 मई को तापमान में और बढ़ोतरी होने का अनुमान है। इस दौरान गर्म हवाएं चलेंगी और दिन का तापमान तेजी से ऊपर जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्थान के कई हिस्सों में इस बार गर्मी सामान्य से अधिक तेज महसूस की जा रही है। लगातार बढ़ते तापमान और शुष्क मौसम के कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ गया है। डॉक्टरों ने लोगों को धूप में निकलने से बचने, हल्का भोजन करने और शरीर में पानी की कमी नहीं होने देने की सलाह दी है।
अजमेर में फिलहाल गर्मी से राहत मिलने के आसार कम दिखाई दे रहे हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान और लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए आने वाले दिन और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। ऐसे में प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और आम लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है ताकि भीषण गर्मी के प्रभाव को कम किया जा सके।


