latest-newsदेशराजस्थानहनुमानगढ़

दिलावर का सख्त रुख: पंचायत और शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

दिलावर का सख्त रुख: पंचायत और शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर का हालिया जिला दौरा प्रशासनिक अधिकारियों के लिए कई असहज सवालों और सख्त संदेशों से भरा रहा। श्रीविजयनगर पंचायत समिति सभागार में आयोजित श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों की संयुक्त समीक्षा बैठक में मंत्री का रुख बेहद स्पष्ट और तीखा नजर आया। उन्होंने अधिकारियों से सीधे तौर पर कहा कि वे फील्ड में जाकर वास्तविक स्थिति देखते हैं, इसलिए उन्हें केवल कागजी आंकड़ों के बजाय सच्चाई बताई जाए। उनका यह बयान इस बात का संकेत था कि सरकार अब जमीनी हकीकत और रिपोर्ट्स के बीच के अंतर को लेकर गंभीर है।

बैठक के दौरान मंत्री ने पंचायती राज विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए। खासतौर पर गांवों में सफाई व्यवस्था को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई। जब हनुमानगढ़ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओमप्रकाश बिश्नोई से सफाई व्यवस्था के बारे में जानकारी ली गई, तो उन्होंने जवाब दिया कि 100 घरों से कम आबादी वाले गांवों में ही सफाई की जिम्मेदारी तय है। इस जवाब पर मंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए सवाल किया कि यह नियम कहां लिखा हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी सीमित व्याख्या के आधार पर जिम्मेदारी से बचना स्वीकार्य नहीं होगा।

मंत्री ने गांवों में कचरा निस्तारण, मृत पशुओं के उठान और फैली गंदगी जैसे मुद्दों को गंभीरता से उठाया। उन्होंने अधिकारियों से गंदे गांवों की सूची मांगी और चेतावनी दी कि वे स्वयं मौके पर जाकर स्थिति का जायजा ले सकते हैं। उनका कहना था कि यदि जमीनी स्तर पर हालात संतोषजनक नहीं मिले, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह संदेश प्रशासनिक तंत्र के लिए स्पष्ट संकेत था कि अब लापरवाही के लिए कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी।

बैठक में ओडीएफ और ओडीएफ प्लस योजनाओं के दावों पर भी मंत्री ने गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि कागजों में गांवों को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया गया है, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। उन्होंने यह तक कहा कि कई जगहों पर लोग अब भी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं, जो योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठाता है। मंत्री ने अधिकारियों को यह भी चेताया कि वे गलत जानकारी देकर उन्हें गुमराह न करें। उनका स्पष्ट संदेश था कि सरकारी धन का दुरुपयोग किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इसी क्रम में मंत्री ने अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी देशराज से रात्रि चौपालों के आयोजन से जुड़े साक्ष्य मांगे। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि जिन मामलों को निस्तारित बताया जा रहा है, उनका वास्तविक स्थिति में क्या प्रभाव पड़ा है। इस दौरान उन्होंने यह संकेत दिया कि केवल आंकड़ों के आधार पर काम का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा, बल्कि उसके वास्तविक परिणाम भी देखे जाएंगे।

श्रीगंगानगर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गिरधर को भी गांवों की सफाई व्यवस्था में सुधार लाने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही पदमपुर के बीडीओ जांगिड के खिलाफ मिल रही शिकायतों पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। बैठक में पूर्व विधायक संतोष बावरी, एडीएम प्रशासन सुभाष कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने मंत्री के निर्देशों को गंभीरता से लिया।

बैठक का दूसरा चरण शिक्षा विभाग से जुड़ा रहा, जिसमें सरकारी स्कूलों की स्थिति और शैक्षणिक गुणवत्ता पर चर्चा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में सुधार लाने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षकों का संतुलित वितरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी स्कूल में स्टाफ की कमी या अधिकता जैसी समस्या न रहे। इसके अलावा स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग और बुनियादी सुविधाओं, खासकर शौचालयों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।

बैठक के दौरान ग्रामीणों की भागीदारी भी देखने को मिली। ग्राम पंचायत 29 जीबी के ग्रामीण रामप्रताप शर्मा के नेतृत्व में कुछ लोग पंचायत में कथित घोटाले की शिकायत लेकर पहुंचे। मंत्री ने उनकी बात सुनी और मामले की जल्द जांच कराने का आश्वासन दिया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि सरकार न केवल प्रशासनिक स्तर पर, बल्कि आम जनता की शिकायतों को भी गंभीरता से लेने के पक्ष में है।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading