राजस्थान पुलिस ने अपने गौरवशाली इतिहास के 77 वर्ष पूरे कर लिए हैं और इस अवसर पर राजधानी जयपुर में एक भव्य राज्य स्तरीय समारोह का आयोजन किया गया। राजस्थान पुलिस के इस स्थापना दिवस समारोह में ‘शौर्य और सेवा’ का अनूठा संगम देखने को मिला, जहां एक ओर पुलिस जवानों के साहस और समर्पण को सलाम किया गया, वहीं दूसरी ओर पुलिस परिवार के कल्याण के लिए आधुनिक तकनीक का नया अध्याय भी जोड़ा गया। इस समारोह में राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और कई महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की।
जयपुर स्थित राजस्थान पुलिस अकादमी में आयोजित इस समारोह की शुरुआत अत्यंत प्रभावशाली और भावनात्मक रही। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पुलिस की मोटरसाइकिल बटालियन और घुड़सवार दस्ते के बीच सुरक्षा और सम्मान के साथ कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। यह दृश्य न केवल अनुशासन और गौरव का प्रतीक था, बल्कि पुलिस बल की सुदृढ़ व्यवस्था का भी परिचायक रहा। कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्यमंत्री ने अकादमी परिसर में स्थित शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने प्रदेश की सुरक्षा और शांति के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। यह क्षण पूरे समारोह का सबसे भावुक और सम्मानजनक पल साबित हुआ।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने सेरेमोनियल परेड का निरीक्षण किया और मार्च पास्ट की सलामी ली। पुलिस जवानों की अनुशासनबद्ध चाल, उनकी एकरूपता और समर्पण ने उपस्थित सभी लोगों को प्रभावित किया। यह परेड न केवल पुलिस बल की क्षमता का प्रदर्शन थी, बल्कि उनके भीतर मौजूद कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भावना को भी दर्शाती है।
इस स्थापना दिवस समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण पुलिस पेंशनर्स के लिए शुरू की गई एक नई डिजिटल पहल रही। मुख्यमंत्री ने ‘राजस्थान पुलिस पेंशनर्स पोर्टल’ का लोकार्पण किया, जिसे ‘राजकॉप सिटीजन एप’ के साथ जोड़ा गया है। यह पहल उन हजारों सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों और उनके आश्रितों के लिए बेहद राहतकारी साबित होगी, जो अब तक पेंशन से जुड़े कार्यों के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर थे। अब वे घर बैठे ही अपनी समस्याओं का समाधान कर सकेंगे और विभिन्न सेवाओं का लाभ ऑनलाइन प्राप्त कर पाएंगे। इसे पुलिस परिवार के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल उपहार के रूप में देखा जा रहा है, जो प्रशासनिक कार्यों को सरल और पारदर्शी बनाएगा।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पुलिस बल के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि राजस्थान पुलिस ने हमेशा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट कार्य किया है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है और उनके साहस व समर्पण के कारण ही आम जनता सुरक्षित महसूस करती है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि पुलिसकर्मियों के कल्याण और उनके परिवारों की सुविधा के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है।
इस अवसर पर एक और विशेष परंपरा का निर्वहन किया गया, जिसके तहत समाज सेवा में उत्कृष्ट योगदान देने वाले नागरिकों को सम्मानित किया गया। सिरोही के प्रकाश प्रजापति, झालावाड़ के सुरजीत कश्यप और उदयपुर की सिंधु बिनुजीत को उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। इनमें से सिंधु बिनुजीत की पहल विशेष रूप से चर्चा में रही।
सिंधु बिनुजीत ने वर्ष 2010 से डूंगरपुर के दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में बाल श्रम के खिलाफ एक अनूठा अभियान चलाया है। उन्होंने ‘बाल मित्र थाने’ और ‘वत्सल वार्ता’ जैसे नवाचारों के माध्यम से बच्चों और पुलिस के बीच की दूरी को कम करने का प्रयास किया। उनके इस प्रयास से बच्चों के मन में पुलिस के प्रति जो डर था, वह काफी हद तक कम हुआ है और वे अब पुलिस को एक मित्र के रूप में देखने लगे हैं। यह पहल सामाजिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे न केवल बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता बढ़ी है, बल्कि पुलिस और समाज के बीच विश्वास भी मजबूत हुआ है।
समारोह में मौजूद अन्य अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने भी इस आयोजन को एक प्रेरणादायक अवसर के रूप में देखा। यह आयोजन न केवल अतीत की उपलब्धियों को याद करने का माध्यम बना, बल्कि भविष्य के लिए नई दिशा तय करने का भी अवसर प्रदान करता है।


