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CJI सूर्यकांत का जयपुर दौरा, हाईकोर्ट में सभी जज एक साथ बैठेंगे

CJI सूर्यकांत का जयपुर दौरा, हाईकोर्ट में सभी जज एक साथ बैठेंगे

भारत के मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्यकांत आज रात जयपुर पहुंचेंगे। उनका यह दौरा कई मायनों में बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि पिछले दो महीनों के भीतर यह उनका जयपुर का दूसरा दौरा है। इससे पहले फरवरी महीने में उन्होंने जयपुर में साइबर सिक्योरिटी विषय पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया था। अब एक बार फिर उनका राजस्थान आगमन न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत शनिवार को जयपुर में आयोजित एक दिवसीय सेमिनार “द बेंच बियॉन्ड रिटायरमेंट” में भाग लेंगे। इस कार्यक्रम का विषय रिटायर्ड न्यायाधीशों की भूमिका रखा गया है। न्यायपालिका में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के अनुभव, विशेषज्ञता और भविष्य में उनकी उपयोगिता पर इस सम्मेलन में विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। इस कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी शामिल होंगे, जिससे इस आयोजन का महत्व और बढ़ गया है।

मुख्य न्यायाधीश के दौरे का सबसे बड़ा असर राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच में देखने को मिलेगा। शनिवार को राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा सहित कुल 39 न्यायाधीश एक साथ जयपुर में बैठकर मामलों की सुनवाई करेंगे। हाईकोर्ट जयपुर बेंच की स्थापना के बाद संभवतः यह पहला अवसर होगा जब इतने बड़े स्तर पर सभी न्यायाधीश एक साथ जयपुर में मौजूद रहेंगे और न्यायिक कार्य करेंगे। इसे राजस्थान के न्यायिक इतिहास की विशेष घटना माना जा रहा है।

जानकारों के अनुसार, अदालत के कामकाज को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए रोस्टर में विशेष बदलाव किए गए हैं। इसके तहत चार लार्जर बेंच, छह खंडपीठ और पंद्रह एकलपीठों का गठन किया गया है। लार्जर बेंच का मतलब दो से अधिक न्यायाधीशों वाली पीठ से है। राजस्थान में संभवतः पहली बार ऐसा हो रहा है जब एक ही दिन में चार लार्जर बेंच एक साथ गठित की गई हैं। इससे महत्वपूर्ण कानूनी मामलों की सुनवाई तेज गति से हो सकेगी और लंबित मामलों के निस्तारण में मदद मिलने की उम्मीद है।

इस विशेष व्यवस्था के तहत केवल जयपुर क्षेत्र से जुड़े मामलों की ही नहीं, बल्कि जोधपुर से संबंधित कई मामलों की सुनवाई भी जयपुर से ही की जाएगी। इसके लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग तकनीक का उपयोग किया जाएगा। डिजिटल माध्यम से सुनवाई की यह व्यवस्था आधुनिक न्याय प्रणाली की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। इससे दोनों बेंचों के बीच समन्वय बेहतर होगा और मामलों के निपटारे में तेजी आएगी।

हालांकि एक तरफ अदालत प्रशासन इस दिन को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर बार और बेंच के बीच चला आ रहा विवाद अभी भी समाप्त नहीं हुआ है। शनिवार को वर्किंग डे घोषित किए जाने के विरोध में वकीलों ने स्वैच्छिक कार्य बहिष्कार का फैसला किया है। ऐसे में जब न्यायाधीश अदालतों में बैठेंगे, उसी समय बड़ी संख्या में अधिवक्ता अदालत की कार्यवाही से दूर रह सकते हैं। इससे न्यायिक कामकाज प्रभावित होने की संभावना भी जताई जा रही है।

दरअसल, शनिवार को अदालतों में नियमित कार्य दिवस घोषित करने का विवाद पिछले वर्ष दिसंबर से शुरू हुआ था। जैसलमेर में मुख्य न्यायाधीश की उपस्थिति में हाईकोर्ट की पूर्णपीठ बैठक हुई थी, जिसमें वर्ष 2026 से प्रत्येक माह के पहले और तीसरे शनिवार को कार्य दिवस रखने का निर्णय लिया गया था। इस निर्णय का उद्देश्य लंबित मामलों की संख्या कम करना और न्यायिक कार्यक्षमता बढ़ाना बताया गया था।

लेकिन बार एसोसिएशन और अधिवक्ताओं के एक बड़े वर्ग ने शुरुआत से ही इस फैसले का विरोध किया। उनका कहना है कि लगातार कार्यदिवस बढ़ाने से वकीलों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और पारंपरिक अवकाश व्यवस्था प्रभावित होती है। इसके बावजूद हाईकोर्ट प्रशासन ने वर्ष 2026 में कुल 17 शनिवार को कार्यदिवस घोषित कर दिया। इनमें जनवरी से दिसंबर तक अलग-अलग तारीखों पर अदालतों में सुनवाई निर्धारित की गई है।

इसी क्रम में 25 अप्रैल भी कार्य दिवस घोषित किया गया है, जिसे लेकर वकीलों का विरोध फिर तेज हो गया है। बार प्रतिनिधियों का कहना है कि इस विषय पर संवाद और सहमति के बिना ऐसे फैसले थोपे नहीं जाने चाहिए। वहीं अदालत प्रशासन का मानना है कि लंबित मामलों की संख्या कम करने के लिए अतिरिक्त कार्य दिवस जरूरी हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की मौजूदगी में यह पूरा घटनाक्रम और भी महत्वपूर्ण हो गया है। एक ओर न्यायपालिका की सर्वोच्च संस्था के प्रमुख जयपुर में मौजूद रहेंगे, दूसरी ओर बार और बेंच के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या उनके दौरे के दौरान इस गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में कोई सकारात्मक पहल होगी।

राजस्थान हाईकोर्ट के लिए शनिवार का दिन इसलिए भी खास रहेगा क्योंकि यह न्यायिक क्षमता, तकनीकी उपयोग और प्रशासनिक समन्वय का बड़ा उदाहरण बन सकता है। यदि सभी बेंच सुचारु रूप से कार्य करती हैं तो यह अन्य राज्यों के लिए भी मॉडल साबित हो सकता है। साथ ही यदि बार और बेंच के बीच सहमति बनती है तो न्यायिक व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।

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