शोभना शर्मा। रक्षाबंधन और जन्माष्टमी जैसे प्रमुख त्योहारों की रौनक के बाद अब श्रद्धालु बछ बारस 2025 की तैयारियों में जुट गए हैं। राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में विशेष रूप से मनाया जाने वाला यह पर्व गोवत्स द्वादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह व्रत विशेष रूप से पुत्र की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है।
बछ बारस कब मनाया जाएगा
पंचांग के अनुसार इस बार बछ बारस का पावन पर्व 20 अगस्त 2025, बुधवार को मनाया जाएगा। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि 19 अगस्त की दोपहर 03 बजकर 32 मिनट से आरंभ होकर 20 अगस्त की दोपहर 01 बजकर 58 मिनट तक रहेगी। चूंकि द्वादशी तिथि का सूर्योदय 20 अगस्त को होगा, इसलिए इसी दिन महिलाएं विधि-विधान से व्रत और पूजन करेंगी।
बछ बारस 2025 का शुभ मुहूर्त
इस पर्व पर पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है और इस दिन कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। विद्वानों के अनुसार 20 अगस्त को सुबह से ही महिलाएं गौमाता और बछड़े का पूजन कर सकती हैं। पंचांग में दर्शाए गए शुभ समय इस प्रकार हैं –
सुबह 06:09 से 07:44 तक,
सुबह 07:44 से 09:19 तक,
सुबह 10:54 से दोपहर 12:30 तक,
दोपहर 03:40 से शाम 05:16 तक,
शाम 05:16 से 06:51 तक।इन मुहूर्तों में गौमाता और बछड़े की पूजा करने से घर-परिवार पर सौभाग्य और संतति सुख की कृपा बनी रहती है।
बछ बारस का धार्मिक महत्व
बछ बारस का पर्व मातृशक्ति और गौवंश की महत्ता को दर्शाता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर दूध देने वाली गाय और उसके बछड़े की पूजा करती हैं। इस अवसर पर महिलाएं व्रत का पालन करते हुए दूध और दूध से बने खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करतीं। माना जाता है कि इस दिन व्रत करने से संतान को दीर्घायु और निरोग जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
गांवों और शहरों में उल्लास
ग्रामीण इलाकों में यह पर्व बड़े उत्साह से मनाया जाता है। महिलाएं सुबह से ही साफ-सफाई करके घर के आंगन में पूजा स्थल सजाती हैं और गौमाता व बछड़े को फूल, अक्षत, चंदन और मिठाइयों से पूजती हैं। शहरी क्षेत्रों में भी परिवारजन मंदिरों या गौशालाओं में जाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं।


