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ब्रिटेन : ऋषि सुनक की कंजर्वेटिव पार्टी की करारी हार

ब्रिटेन : ऋषि सुनक की कंजर्वेटिव पार्टी की करारी हार

शोभना शर्मा। लंदन में शुक्रवार को सूरज उगते ही कीर स्टार्मर ने विजय रैली में कहा, ‘आखिरकार इस महान देश के कंधों से एक बोझ हट गया है। परिवर्तन अब शुरू होता है।’ 4 जुलाई 2024 को हुए आम चुनाव में ब्रिटेन की सत्ताधारी कंजर्वेटिव पार्टी की बड़ी हार हुई है और लेबर पार्टी ने 2005 के बाद ब्रिटिश चुनाव में प्रचंड जीत दर्ज की है। कीर स्टार्मर अब देश के नए प्रधानमंत्री बनेंगे।

ब्रिटेन चुनाव के नतीजे

4 जुलाई 2024 को ब्रिटेन में 650 संसदीय सीटों के लिए मतदान हुआ। 5 जुलाई को चुनाव के नतीजे घोषित किए गए, जिसमें 650 में से 648 सीटों के परिणाम सामने आए। लेबर पार्टी ने 412 सीटें जीती हैं, जबकि कंजर्वेटिव पार्टी महज 121 सीटें ही जीत पाई है। लिबरल डेमोक्रेट्स ने 71, स्कॉटिश नेशनल पार्टी (एसएनपी) ने नौ, सिन फेन ने सात, डेमोक्रेटिक यूनियनिस्ट पार्टी (डीयूपी) ने पांच और रिफॉर्म पार्टी ने चार सीटें जीती हैं।

सत्ता विरोधी लहर और कंजर्वेटिव पार्टी की हार

ब्रिटेन में पिछले 14 साल से कंजर्वेटिव पार्टी की सरकार थी, लेकिन इस अवधि में पांच कंजर्वेटिव प्रधानमंत्रियों ने सत्ता संभाली। चुनाव के नतीजे यह दर्शाते हैं कि कंजर्वेटिव पार्टी के खिलाफ तीव्र सत्ता विरोधी लहर थी, जिसमें बड़े-बड़े नेता हार गए। उत्तरी इंग्लैंड और मिडलैंड्स क्षेत्र की सीटों पर लेबर और रिफॉर्म पार्टी के हाथों कंजर्वेटिव का सफाया हो गया, जबकि दक्षिणी इंग्लैंड के समृद्ध क्षेत्रों में लिबरल डेमोक्रेट्स ने कंजर्वेटिव का सफाया कर दिया।

हार के कारण

कंजर्वेटिव पार्टी की हार के पीछे कई कारण रहे। पार्टी में गुटबाजी और वादाखिलाफी प्रमुख मुद्दे थे। निवर्तमान प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने पांच प्राथमिकताओं का वादा किया था, जिसमें मुद्रास्फीति कम करना, अर्थव्यवस्था को बढ़ाना, कर्ज कम करना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) के मुद्दे को हल करना और अवैध प्रवासियों को रोकना शामिल था। इनमें से केवल मुद्रास्फीति ही लक्ष्य से नीचे रही, बाकी वादे अधूरे रहे।

कंजर्वेटिव पार्टी की हार के बाद ब्रिटेन की पूर्व गृह सचिव सुएला ब्रेवरमैन ने भी पार्टी पर वादे न निभाने के आरोप लगाए। मतगणना के दौरान ब्रेवरमैन ने कहा, ‘मुझे खेद है कि मेरी पार्टी ने आपकी बात नहीं सुनी। कंजर्वेटिव पार्टी ने आपको निराश किया है।’

इन सभी कारणों से कंजर्वेटिव पार्टी को भारी हार का सामना करना पड़ा और लेबर पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

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