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जयपुर में भूमाफिया पर बड़ा शिकंजा

जयपुर में भूमाफिया पर बड़ा शिकंजा

राजधानी जयपुर में भूमाफिया और बजरी माफिया के कथित गठजोड़ के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। शहर के बदरवास क्षेत्र में करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन पर अवैध कब्जे और धोखाधड़ी के आरोपों को लेकर मानसरोवर थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रमोद शर्मा, आनंद शर्मा सहित कुल नौ लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है। इस मामले के सामने आने के बाद जयपुर में जमीन कारोबार, अवैध कब्जों और प्रभावशाली नेटवर्क को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

पुलिस कार्रवाई परिवादी घनश्याम शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर की गई है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि बदरवास क्षेत्र स्थित खसरा नंबर 152 की बहुमूल्य जमीन पर आरोपियों ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। शिकायत में यह भी दावा किया गया कि जमीन से जुड़े दस्तावेजों, स्वामित्व और कब्जे की स्थिति को लेकर कई प्रकार की अनियमितताएं सामने आई हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद एफआईआर दर्ज कर ली।

जानकारी के अनुसार, नामजद आरोपियों में शामिल प्रमोद शर्मा को इस पूरे प्रकरण का मुख्य आरोपी माना जा रहा है। पुलिस ने जब जांच आगे बढ़ाते हुए संबंधित लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए, तब प्रमोद शर्मा कथित तौर पर गिरफ्तारी के डर से फरार हो गया। इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी है और संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

इस मामले ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि प्रमोद शर्मा का नाम पहले भी विवादों में सामने आ चुका है। उस पर पूर्व में रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तारी की बात भी चर्चा में रही है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में उसे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का रिश्तेदार बताए जाने का दावा किया गया था। हालांकि ऐसे दावों की आधिकारिक पुष्टि अलग विषय है, लेकिन पुलिस जांच में यह जरूर सामने आया है कि आरोपी खुद को राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर प्रभावशाली संपर्कों वाला व्यक्ति बताकर लोगों पर प्रभाव डालता था।

जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रमोद शर्मा लोगों को यह विश्वास दिलाता था कि उसकी ऊंचे राजनीतिक गलियारों और ब्यूरोक्रेसी तक सीधी पहुंच है। इसी प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए वह जमीन सौदों, निवेश योजनाओं और विवादित संपत्तियों के निपटारे के नाम पर लोगों से बड़ी रकम लेने का आरोप झेल रहा है। यदि जांच में ये दावे सही साबित होते हैं, तो मामला सिर्फ जमीन कब्जे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संगठित धोखाधड़ी और प्रभाव के दुरुपयोग तक पहुंच सकता है।

जयपुर में तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार के बीच जमीन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में शहर के बाहरी और विकसित हो रहे क्षेत्रों में भूमाफियाओं की सक्रियता लंबे समय से चिंता का विषय रही है। बदरवास, मानसरोवर और आसपास के इलाकों में कई बार विवादित भूखंड, फर्जी दस्तावेज, दोहरी बिक्री और अवैध कब्जे जैसे मामले सामने आते रहे हैं। अब इस नए मामले ने फिर दिखाया है कि रियल एस्टेट से जुड़े अपराध किस तरह संगठित रूप ले सकते हैं।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एक विशेष टीम का गठन किया गया है, जो मुख्य आरोपी प्रमोद शर्मा की गिरफ्तारी और पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है। टीम यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या उसके साथ अन्य लोग, बिचौलिए, दस्तावेज तैयार करने वाले या स्थानीय स्तर पर सहयोग देने वाले लोग भी जुड़े हुए थे।

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू बजरी माफिया से कथित संबंध भी माना जा रहा है। शिकायत और प्रारंभिक सूचनाओं में भूमाफिया और अवैध बजरी कारोबार से जुड़े लोगों के गठजोड़ की बात सामने आई है। यदि यह पहलू सही पाया जाता है, तो मामला और गंभीर हो सकता है, क्योंकि अवैध खनन और जमीन कब्जे के नेटवर्क कई बार आर्थिक अपराध, दबंगई और स्थानीय प्रभाव से जुड़े होते हैं।

कानूनी जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में राजस्व रिकॉर्ड, जमीन का मूल स्वामित्व, कब्जे की वास्तविक स्थिति, रजिस्ट्री दस्तावेज, गवाहों के बयान और वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। पुलिस को यदि ठोस दस्तावेजी साक्ष्य मिलते हैं, तो आरोपियों के खिलाफ मजबूत कार्रवाई संभव है। साथ ही, यदि पीड़ितों से ठगी के सबूत सामने आते हैं, तो भारतीय दंड संहिता की अन्य धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।

इस कार्रवाई के बाद जयपुर में अवैध जमीन कारोबार से जुड़े लोगों में बेचैनी देखी जा रही है। प्रशासन के सख्त रुख से यह संदेश गया है कि प्रभावशाली पहचान, राजनीतिक संपर्क या रसूख का दावा कानून से बचाने की गारंटी नहीं है। यदि शिकायतों और साक्ष्यों के आधार पर अपराध सिद्ध होता है, तो किसी भी व्यक्ति पर कार्रवाई की जा सकती है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि शहर में बढ़ते भूमि विवादों पर रोक लगाने के लिए केवल एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि समयबद्ध जांच, गिरफ्तारी, चार्जशीट और अदालत में मजबूत पैरवी भी जरूरी है। तभी भूमाफियाओं पर वास्तविक अंकुश लग सकेगा।

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