राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर उठते सवालों के बीच बहुचर्चित सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) भर्ती परीक्षा-2020 पेपर लीक मामले में जांच एजेंसी को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने इस मामले में लंबे समय से फरार चल रहे एक आरोपी को गिरफ्तार कर जांच को नई दिशा दी है। यह कार्रवाई जयपुर में की गई, जहां एसओजी लगातार इस संगठित गिरोह के नेटवर्क को तोड़ने में जुटी हुई है।
मामले में गिरफ्तार आरोपी की पहचान गणपत लाल मालवाड़ा के रूप में हुई है, जिसकी उम्र 31 वर्ष बताई जा रही है। वह जालौर जिले की चितलवाना तहसील के मालवाड़ा गांव का निवासी है। एसओजी ने उसे 21 अप्रैल 2026 को गिरफ्तार किया। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी इस पूरे पेपर लीक नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा था और उसने अभ्यर्थियों को जोड़ने तथा उन्हें प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
इस पूरे प्रकरण की जड़ें 10 नवम्बर 2020 को आयोजित CHO भर्ती परीक्षा से जुड़ी हुई हैं। जांच में सामने आया कि परीक्षा के दौरान एक संगठित गिरोह ने जयपुर के झोटवाड़ा क्षेत्र में स्थित एक स्कूल के स्ट्रॉन्ग रूम से अप्रयुक्त प्रश्न पत्रों की सील तोड़कर उन्हें बाहर निकाला। इसके बाद प्रश्न पत्र को परीक्षा शुरू होने से लगभग दो घंटे पहले सॉल्वर टीम को भेजा गया, जहां उसे हल कराया गया। बाद में इस हल किए गए पेपर को गिरोह के हैंडलरों के जरिए अलग-अलग स्थानों पर पहले से तैयार बैठे अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा ऑपरेशन बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था। इसमें कई स्तरों पर काम करने वाले लोग शामिल थे, जिनमें पेपर निकालने वाले, सॉल्वर टीम, हैंडलर और अभ्यर्थियों को जोड़ने वाले एजेंट शामिल थे। गणपत लाल मालवाड़ा को इसी नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। उसने गिरोह के सदस्य भूपेन्द्र सारण के साथ मिलकर ऐसे अभ्यर्थियों की व्यवस्था की, जिन्हें परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र उपलब्ध कराया गया था।
इस मामले में एसओजी पहले ही कई बड़े आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें स्कूल संचालक धीरज शर्मा सहित मुकेश बाना, बलवीर सुण्डा, दिनेश विश्नोई, भूपेन्द्र सारण, अनिल उर्फ शेरसिंह मीणा, श्रवण कालीरावणा, अशोक नाथावत, अशोक यादव, दीपक विश्नोई और हर्षवर्धन मीणा जैसे नाम शामिल हैं। अब तक कुल 20 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह मामला किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा था।
प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया है कि गणपत लाल मालवाड़ा केवल CHO भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं था, बल्कि वह अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी पेपर लीक से जुड़े मामलों में संलिप्त रहा है। इनमें जूनियर इंजीनियर (JEN) भर्ती परीक्षा-2020 और प्रथम श्रेणी व्याख्याता भर्ती-2022 जैसी परीक्षाएं शामिल हैं। यदि यह जानकारी पूरी तरह से सही साबित होती है, तो यह मामला और भी गंभीर हो सकता है और राज्य में आयोजित कई अन्य परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।
वर्तमान में एसओजी आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है, ताकि इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों, उनके काम करने के तरीके और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके। जांच एजेंसी का मानना है कि अभी इस मामले में और भी कई अहम खुलासे हो सकते हैं और आगे और गिरफ्तारियां भी संभव हैं।
यह मामला एक बार फिर यह उजागर करता है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। पेपर लीक जैसी घटनाएं न केवल मेहनती और योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित करती हैं, बल्कि पूरे चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता को भी नुकसान पहुंचाती हैं। राज्य सरकार और जांच एजेंसियां इस तरह के मामलों को गंभीरता से लेते हुए लगातार कार्रवाई कर रही हैं, ताकि दोषियों को सख्त सजा मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक के कई मामले सामने आए हैं, जिससे युवाओं के बीच असंतोष भी बढ़ा है। ऐसे में एसओजी की यह कार्रवाई उम्मीद जगाती है कि दोषियों तक पहुंचने और उन्हें कानून के दायरे में लाने का प्रयास लगातार जारी है। गणपत लाल मालवाड़ा की गिरफ्तारी इसी दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।


