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JJM घोटाले में ACB की बड़ी कार्रवाई, महेश जोशी जेल भेजे गए

JJM घोटाले में ACB की बड़ी कार्रवाई, महेश जोशी जेल भेजे गए

राजस्थान में करीब 900 करोड़ रुपए के चर्चित जल जीवन मिशन  (JJM) घोटाले की जांच अब और तेज हो गई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB)  ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मंत्री महेश जोशी  को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने के आदेश दिए गए। वहीं इस मामले में कथित दलाल और पूर्व मंत्री के करीबी माने जाने वाले संजय बड़ाया को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि वह थाईलैंड में एक शादी समारोह में शामिल होकर भारत लौटा था।

सोमवार को एसीबी ने महेश जोशी और संजय बड़ाया दोनों को कोर्ट में पेश किया। जांच एजेंसी ने महेश जोशी की तीन दिन की पुलिस रिमांड और संजय बड़ाया की पांच दिन की रिमांड की मांग की थी। हालांकि अदालत ने महेश जोशी को जेल भेजने का फैसला सुनाया, जबकि संजय बड़ाया को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। अदालत में पेशी के दौरान संजय बड़ाया भावुक दिखाई दिया। इस दौरान उसकी पत्नी नैना बड़ाया भी कोर्ट में मौजूद रहीं।

कोर्ट में पेशी के दौरान महेश जोशी ने मीडिया और अदालत के सामने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और अंततः सत्य की जीत होगी। उन्होंने एसीबी की कार्रवाई को राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई बताया। पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि एक ही मामले में बिना पर्याप्त सबूतों के दोबारा गिरफ्तारी की गई है। उन्होंने संजय बड़ाया के खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर पर भी सवाल उठाए। जोशी का कहना था कि जब बड़ाया अदालत की अनुमति लेकर विदेश गया था, तब उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करना उचित नहीं था।

जांच एजेंसियों के अनुसार संजय बड़ाया इस पूरे कथित घोटाले का एक अहम किरदार माना जा रहा है। एसीबी और अन्य जांच एजेंसियों का दावा है कि वह बिचौलिए और कथित मास्टरमाइंड की भूमिका निभा रहा था। उसके खिलाफ पहले से लुकआउट नोटिस जारी था। जैसे ही वह दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा, ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन ने एसीबी को सूचना दी, जिसके बाद उसे देर रात हिरासत में ले लिया गया।

जांच में सामने आया है कि संजय बड़ाया केवल महेश जोशी ही नहीं, बल्कि रिटायर्ड आईएएस अधिकारी Subodh Agrawal का भी करीबी माना जाता था। एजेंसियों के अनुसार वह कथित रूप से पैसों के लेन-देन, ट्रांसफर-पोस्टिंग, नए लोगों को नेटवर्क में जोड़ने और टेंडर प्रक्रियाओं में गड़बड़ियों को अंजाम देने में सक्रिय भूमिका निभाता था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे और किस स्तर तक आर्थिक लेन-देन हुआ।

इस मामले में Enforcement Directorate की जांच में भी कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक संजय बड़ाया वर्ष 2022 तक एक इंश्योरेंस कंपनी में काम करता था और उसकी सालाना आय करीब सात लाख रुपए बताई गई थी। लेकिन जल जीवन मिशन घोटाले के दौरान उसने करोड़ों रुपए की संपत्ति अर्जित कर ली। जांच में यह भी सामने आया कि उसने ‘मैसर्स चमत्कारेश्वर बिल्डर्स एंड डेवलपर’ नाम से एक कंपनी बनाई थी, जिसमें उसकी पत्नी नैना बड़ाया साझेदार थीं।

जांच एजेंसियों का दावा है कि इसी कंपनी के जरिए जयपुर में बड़े स्तर पर प्रॉपर्टी कारोबार किया गया। साथ ही कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जेडीए की जमीनों पर कब्जा करने की कोशिशों के आरोप भी सामने आए हैं। इन आरोपों के बाद एजेंसियां अब प्रॉपर्टी निवेश, बैंक खातों और आर्थिक लेन-देन के दस्तावेजों की गहराई से जांच कर रही हैं।

इस पूरे मामले में एसीबी पहले ही 9 अप्रैल को तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार कर चुकी है। फिलहाल वह जेल में हैं। वहीं महेश जोशी को 7 मई को गिरफ्तार किया गया था। अब संजय बड़ाया की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि घोटाले से जुड़े कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।

राजस्थान में जल जीवन मिशन से जुड़ा यह मामला पिछले कुछ समय से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्ष लगातार सरकार और पूर्व अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगा रहा है, जबकि जांच एजेंसियां इसे राज्य के सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक मानकर जांच आगे बढ़ा रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े नाम सामने आने की संभावना भी जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच एजेंसियों को वित्तीय लेन-देन और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े ठोस सबूत मिलते हैं, तो यह मामला केवल प्रशासनिक भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे राजनीतिक हलकों में भी बड़ा असर देखने को मिल सकता है। फिलहाल पूरे प्रदेश की नजर एसीबी की अगली कार्रवाई और कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है।

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