शोभना शर्मा। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) से जुड़ा एक बड़ा विवाद हाल ही में सामने आया है, जिसमें एक महिला RAS अधिकारी की रैंक चार साल की सेवा के बाद घटा दी गई। यह मामला अब न्यायालय की चौखट तक पहुंच गया है। राजस्थान हाई कोर्ट ने इस प्रकरण पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए RPSC से जवाब मांगा है। याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस मनीष शर्मा की बेंच ने आयोग को नोटिस जारी किया और पूछा कि आखिर चार साल बाद रैंक घटाने का आधार क्या है।
मामला RAS अधिकारी पद्मा देवी का है, जिन्होंने 2018 में आयोजित राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) परीक्षा में 24वां स्थान प्राप्त किया था। चार साल की सेवा पूरी करने के बाद, एक मई 2025 को उन्हें RPSC की ओर से नोटिस मिला। नोटिस में कहा गया कि उनकी उत्तर पुस्तिका में एक सवाल पर परीक्षक ने उन्हें शून्य और सात अंक दोनों दिए हैं, और इस पर स्पष्टीकरण मांगा गया।
मेंस पेपर में गड़बड़ी का आरोप
जानकारी के अनुसार, विवाद RAS मेंस परीक्षा के चौथे पेपर से जुड़ा है। इसमें प्रश्न संख्या 34 के उत्तर के स्थान पर पद्मा देवी ने कुछ नहीं लिखा था। इसके बावजूद, परीक्षक ने उन्हें सात अंक दे दिए थे। यह उत्तरपुस्तिका बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिससे इस पर चर्चा और विवाद शुरू हो गया। सोशल मीडिया पर सवाल उठे कि बिना उत्तर लिखे अंक कैसे मिल सकते हैं।
सोशल मीडिया पर बढ़ते दबाव और आलोचना के बाद RPSC ने इस मामले की समीक्षा की और 14 मई 2025 को पद्मा देवी की रैंक 24 से घटाकर 39 कर दी। रैंक में यह बदलाव उनके पूरे बैच में उनकी स्थिति को बदल गया। पहले जहां वे अपने बैच के शीर्ष 25 में थीं, वहीं अब वे 14 साथियों से जूनियर हो गई हैं।
याचिका और कानूनी तर्क
रैंक में इस बदलाव के खिलाफ पद्मा देवी ने राजस्थान हाई कोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि उन्होंने चार साल की सेवा पूरी कर ली है और वे स्थायी रूप से RAS के पद पर नियुक्त हैं। रैंक घटाने से न केवल उनकी वरिष्ठता प्रभावित हुई है बल्कि उनके कैरियर की संभावनाओं पर भी नकारात्मक असर पड़ा है।
पद्मा देवी ने यह भी दलील दी कि RPSC नियमों के अनुसार केवल अंकों की पुनर्गणना (Re-Calculation) हो सकती है, लेकिन उत्तर पुस्तिका की पुनः जांच (Re-Evaluation) की अनुमति नहीं है। उनके अनुसार, आयोग ने नियमों का उल्लंघन करते हुए पुनः जांच की और उनके अंक घटाए। यही कारण है कि उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
प्रोबेशन पीरियड पूरा, फिर भी रैंक में कटौती
पद्मा देवी वर्तमान में नागौर जिले के लाडनूं में उपखंड अधिकारी (SDM) के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने कोर्ट में बताया कि उनका प्रोबेशन पीरियड पहले ही समाप्त हो चुका है और वे स्थायी रूप से सेवा में हैं। ऐसे में, रैंक में बदलाव न केवल उनके बैच में उनकी स्थिति को प्रभावित करता है, बल्कि भविष्य में प्रमोशन और नियुक्तियों में भी असर डाल सकता है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि रैंक घटाने से उनके साथियों में उनकी स्थिति नीचे आ गई है और वे 14 अधिकारियों से जूनियर हो गई हैं। वरिष्ठता की यह कमी लंबे समय में उनके करियर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
RPSC पर सवाल
इस घटना ने RPSC की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर, किसी परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद और चयनित अभ्यर्थी के सेवा में आने के बाद, चार साल के लंबे अंतराल में इस तरह का बदलाव करना असामान्य माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि परीक्षा मूल्यांकन में कोई त्रुटि हुई थी, तो उसे उसी समय सुधारा जाना चाहिए था, न कि चार साल बाद।
हाई कोर्ट की भूमिका
हाई कोर्ट ने इस मामले में RPSC से स्पष्ट जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि क्या आयोग ने नियमों का पालन किया और क्या उत्तर पुस्तिका की पुनः जांच के लिए कोई वैधानिक प्रावधान है। जस्टिस मनीष शर्मा की बेंच ने मामले को गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई की तारीख तय की है, जिसमें आयोग को अपना पक्ष रखना होगा।


