देशभर में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती खपत को कम करने और ऊर्जा बचत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में लोगों से वर्क फ्रॉम होम मॉडल को फिर से अपनाने की अपील की थी। प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद कई राज्यों और संस्थानों ने सीमित स्तर पर वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए। हालांकि, इस संवेदनशील मुद्दे को अब साइबर अपराधियों ने भी ठगी का नया हथियार बना लिया है। WhatsApp और SMS के जरिए लोगों को फर्जी लॉकडाउन नोटिस, एडवाइजरी और सरकारी आदेश भेजकर उन्हें साइबर ठगी का शिकार बनाया जा रहा है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इन दिनों WhatsApp पर अनजान नंबरों से ऐसे मैसेज तेजी से भेजे जा रहे हैं, जिनमें लॉकडाउन या इमरजेंसी आदेश से जुड़ी फाइलें होती हैं। ये फाइलें अक्सर “WAR LOCKDOWN NOTICE.pdf”, “Emergency Lockdown Order” या “Government Advisory” जैसे नामों से भेजी जाती हैं। इनका उद्देश्य लोगों में डर और तात्कालिकता पैदा करना होता है ताकि वे बिना सोचे-समझे फाइल खोल लें। जैसे ही कोई व्यक्ति इस फाइल पर क्लिक करता है, उसे किसी संदिग्ध वेबसाइट या लिंक पर रीडायरेक्ट कर दिया जाता है।
साइबर अपराधी इन नकली वेबसाइट्स के जरिए लोगों की निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में यूजर्स से बैंकिंग डिटेल, आधार नंबर, मोबाइल नंबर, ओटीपी या अन्य संवेदनशील जानकारियां मांगी जाती हैं। एक बार यह जानकारी अपराधियों के हाथ लग जाए तो बैंक अकाउंट खाली होने, डिजिटल वॉलेट से पैसे निकलने और पहचान चोरी जैसे गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तरीका फिशिंग अटैक का एक नया रूप है, जिसमें लोगों को सरकारी आदेश का भ्रम देकर जाल में फंसाया जाता है।
इतना ही नहीं, कई मामलों में PDF फाइल के बजाय APK फाइल भेजे जाने की भी जानकारी सामने आई है। APK दरअसल एंड्रॉयड एप्लिकेशन इंस्टॉल करने वाली फाइल होती है। साइबर अपराधी इसे किसी जरूरी सरकारी ऐप या लॉकडाउन अपडेट के नाम पर भेजते हैं। यदि कोई व्यक्ति इस APK फाइल को डाउनलोड और इंस्टॉल कर लेता है, तो उसके मोबाइल फोन का एक्सेस हैकर्स तक पहुंच सकता है। इसके बाद अपराधी फोन में मौजूद फोटो, कॉन्टैक्ट, मैसेज, बैंकिंग ऐप्स और अन्य निजी जानकारियों तक आसानी से पहुंच बना सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधी हमेशा ऐसे मुद्दों को निशाना बनाते हैं, जिनसे आम लोग भावनात्मक या सामाजिक रूप से जुड़े होते हैं। कोरोना महामारी के दौरान भी इसी तरह के फर्जी मैसेज और लिंक वायरल हुए थे। अब वर्क फ्रॉम होम और संभावित लॉकडाउन जैसी चर्चाओं को आधार बनाकर फिर से लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। चूंकि प्रधानमंत्री की अपील और सरकारी निर्देशों को लोग गंभीरता से लेते हैं, इसलिए ठगों को लोगों को भ्रमित करने में आसानी हो रही है।
साइबर सुरक्षा एजेंसियां लगातार लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान नंबर से आए PDF, लिंक या फाइल को बिना जांचे-परखे कभी न खोलें। यदि कोई मैसेज बहुत जरूरी या सरकारी आदेश जैसा लगे, तब भी उसकी पुष्टि आधिकारिक वेबसाइट या विश्वसनीय समाचार स्रोत से जरूर करनी चाहिए। केवल WhatsApp फॉरवर्ड के आधार पर किसी सूचना पर भरोसा करना खतरनाक साबित हो सकता है।
मोबाइल सुरक्षा के लिहाज से भी कुछ सावधानियां बेहद जरूरी मानी जा रही हैं। एंड्रॉयड फोन में “Unknown Sources” या “Install Unknown Apps” जैसी सेटिंग्स को बंद रखना चाहिए। यह फीचर ऑन होने पर फोन में किसी भी बाहरी APK फाइल को आसानी से इंस्टॉल किया जा सकता है, जिसका फायदा साइबर अपराधी उठाते हैं। यदि यह सेटिंग बंद रहेगी तो संदिग्ध एप्लिकेशन इंस्टॉल होने का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा।
साइबर विशेषज्ञ यह भी सलाह दे रहे हैं कि फोन में हमेशा अपडेटेड एंटीवायरस और सिक्योरिटी सिस्टम का उपयोग किया जाए। इसके अलावा बैंकिंग ऐप्स और डिजिटल वॉलेट्स में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जैसी सुविधाओं को सक्रिय रखना चाहिए। किसी भी स्थिति में ओटीपी, यूपीआई पिन या बैंक डिटेल किसी अनजान व्यक्ति या वेबसाइट के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
डिजिटल दुनिया में तेजी से बढ़ती ऑनलाइन निर्भरता के बीच साइबर अपराध भी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। पहले जहां ईमेल के जरिए फिशिंग अटैक होते थे, वहीं अब WhatsApp और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ठगों का नया माध्यम बनते जा रहे हैं। आम लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे असली और नकली संदेशों में अंतर कर सकें।
विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता ही इस तरह की साइबर ठगी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है। किसी भी सरकारी आदेश, लॉकडाउन या नई एडवाइजरी की जानकारी केवल आधिकारिक सरकारी वेबसाइट, प्रेस विज्ञप्ति या विश्वसनीय मीडिया प्लेटफॉर्म से ही लेनी चाहिए। WhatsApp पर वायरल हो रहे हर संदेश को सच मान लेना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
आने वाले समय में वर्क फ्रॉम होम और डिजिटल कम्युनिकेशन का दायरा और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में साइबर सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना हर नागरिक की जिम्मेदारी बन गई है। थोड़ी सी लापरवाही न केवल मोबाइल डेटा बल्कि बैंक खाते और निजी जानकारी को भी खतरे में डाल सकती है।


