राजस्थान सरकार ने पुलिस प्रशासन में बड़ा बदलाव करते हुए राज्य के कई वरिष्ठ IPS अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। मंगलवार देर रात जारी किए गए आदेशों में कुल 17 आईपीएस अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इस प्रशासनिक फेरबदल के तहत राज्य के 7 महत्वपूर्ण जिलों के पुलिस अधीक्षक भी बदल दिए गए हैं। सरकार के इस फैसले को प्रदेश में कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत तथा प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
कार्मिक विभाग की ओर से जारी आदेशों में चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, डीडवाना-कुचामन, नागौर, टोंक, भरतपुर और दौसा जैसे अहम जिलों में नए एसपी नियुक्त किए गए हैं। इसके अलावा एक आईपीएस अधिकारी को एपीओ यानी पदस्थापन आदेश की प्रतीक्षा से हटाकर नई जिम्मेदारी दी गई है, जबकि एक वरिष्ठ अधिकारी को अतिरिक्त विभागीय प्रभार भी सौंपा गया है। इन तबादलों के बाद पुलिस महकमे में नई प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
इस फेरबदल में सबसे प्रमुख नियुक्तियों में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हरेंद्र कुमार महावर को कोटा रेंज का नया आईजी बनाया जाना शामिल है। हरेंद्र महावर को अनुभवी और प्रशासनिक दृष्टि से मजबूत अधिकारी माना जाता है। सरकार ने उन्हें ऐसे समय में यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है, जब प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर लगातार सख्ती दिखाई जा रही है। माना जा रहा है कि कोटा रेंज में अपराध नियंत्रण और पुलिसिंग व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उनके अनुभव का लाभ लिया जाएगा।
इस तबादला सूची की खास बात यह रही कि कुछ अधिकारियों का बहुत कम समय में दोबारा ट्रांसफर कर दिया गया। दो आईपीएस अधिकारियों को महज तीन महीने के भीतर ही नई जिम्मेदारी सौंप दी गई, जबकि एक अधिकारी का केवल दो महीने में फिर तबादला कर दिया गया। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि सरकार प्रशासनिक स्तर पर लगातार समीक्षा कर रही है और आवश्यकता के अनुसार अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया जा रहा है।
आईपीएस अधिकारी कालूराम रावत और हरेंद्र महावर का इससे पहले 23 फरवरी को तबादला हुआ था, लेकिन अब करीब तीन महीने बाद उन्हें फिर नई जगह नियुक्त किया गया है। इसी तरह पीयूष दीक्षित को 19 मार्च को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी जयपुर में एसपी के पद पर लगाया गया था, लेकिन अब केवल दो महीने के भीतर उन्हें वहां से हटाकर दौसा जिले का नया एसपी बना दिया गया है। प्रशासनिक हलकों में इस तेज बदलाव को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
राज्य सरकार ने डीडवाना-कुचामन जिले में भी बड़ा बदलाव किया है। एटीएस में कार्यरत आईपीएस अधिकारी ज्ञानचंद्र यादव को अब डीडवाना-कुचामन का नया एसपी नियुक्त किया गया है। वहीं वर्तमान एसपी रिचा तोमर को दिल्ली स्थित आरएसी की 11वीं बटालियन में कमांडेंट के पद पर भेजा गया है। इस बदलाव को प्रशासनिक अनुभव और फील्ड जिम्मेदारियों के संतुलन के रूप में देखा जा रहा है।
इसी क्रम में राजेश कुमार मीणा को टोंक के एसपी पद से हटाकर भरतपुर का नया एसपी बनाया गया है। वहीं रोशन मीणा को नागौर से स्थानांतरित कर टोंक जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासनिक दृष्टि से ये दोनों जिले काफी संवेदनशील माने जाते हैं, इसलिए यहां अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजस्थान सरकार ने चित्तौड़गढ़ जिले में भी बड़ा बदलाव किया है। वर्तमान एसपी मनीष त्रिपाठी को हटाकर जयपुर स्थित एटीएस में एसपी नियुक्त किया गया है। उनकी जगह धर्मेंद्र सिंह को चित्तौड़गढ़ का नया एसपी बनाया गया है। धर्मेंद्र सिंह इससे पहले भीलवाड़ा जिले में एसपी के पद पर कार्यरत थे। वहीं धर्मेंद्र सिंह के स्थानांतरण के बाद सागर को भीलवाड़ा का नया एसपी बनाया गया है, जो अभी तक दौसा जिले की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस तरह एक जिले से दूसरे जिले में अधिकारियों की जिम्मेदारियों का नया संतुलन तैयार किया गया है।
इन तबादलों के साथ ही राज्य सरकार ने वरिष्ठ अधिकारी डॉ. हवा सिंह घुमारिया को अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी है। उन्हें आगामी आदेशों तक सिविल राइट्स और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। यह विभाग मानव तस्करी और नागरिक अधिकारों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए इस अतिरिक्त जिम्मेदारी को भी अहम माना जा रहा है।
आधी रात को जारी हुए इन आदेशों ने पुलिस प्रशासन में अचानक हलचल बढ़ा दी। कई जिलों में नए अधिकारियों की तैनाती के बाद अब स्थानीय स्तर पर पुलिस व्यवस्था में बदलाव देखने को मिल सकता है। माना जा रहा है कि सरकार आगामी समय में अपराध नियंत्रण, कानून व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यह बदलाव कर रही है।
राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के तबादले केवल नियमित प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होते, बल्कि इनके जरिए सरकार प्रशासनिक प्राथमिकताओं और कार्यशैली का संदेश भी देती है। जिन जिलों में कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण या प्रशासनिक प्रदर्शन को लेकर चुनौतियां सामने आती हैं, वहां अक्सर अनुभवी अधिकारियों की तैनाती की जाती है। ऐसे में राजस्थान सरकार का यह बड़ा फेरबदल आने वाले समय में प्रदेश की पुलिसिंग व्यवस्था पर सीधा असर डाल सकता है।


