राजस्थान के उदयपुर में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई को लेकर हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। सीमित आपूर्ति, तेजी से बढ़ती मांग और अंतरराष्ट्रीय हालातों के कारण शहर की ईंधन व्यवस्था पर भारी दबाव बन गया है। पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि तेल कंपनियां अब भी पुराने डेटा के आधार पर ही सप्लाई कर रही हैं, जबकि इस वर्ष पेट्रोल और डीजल की खपत में अचानक कई गुना बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में सरकारी और निजी दोनों प्रकार के पेट्रोल पंपों पर संकट की स्थिति बनती जा रही है।
जानकारी के अनुसार हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन रुपए से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद बाजार विशेषज्ञ और पेट्रोल पंप संचालक आने वाले दिनों में कीमतों में और वृद्धि की आशंका जता रहे हैं। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने तनावपूर्ण माहौल और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए ईंधन के दाम दो से तीन चरणों में और बढ़ सकते हैं। यही कारण है कि आम उपभोक्ताओं से लेकर उद्योगों तक में चिंता का माहौल बना हुआ है।
शहर में संकट की सबसे बड़ी वजह तेल कंपनियों की सीमित सप्लाई मानी जा रही है। पेट्रोल पंप संचालकों के अनुसार कंपनियां अब भी वर्ष 2025 के बिक्री रिकॉर्ड को आधार बनाकर सप्लाई दे रही हैं। जबकि वर्तमान समय में सरकारी पेट्रोल पंपों पर ईंधन की मांग अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई है। निजी तेल कंपनियों द्वारा पहले से अधिक कीमतें वसूले जाने के कारण अधिकांश ग्राहक सरकारी तेल कंपनियों के पंपों की ओर शिफ्ट हो गए हैं। इससे सरकारी पंपों पर बिक्री का दबाव कई गुना बढ़ चुका है।
स्थिति तब और ज्यादा जटिल हो गई जब औद्योगिक क्षेत्र ने भी सीधे पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदना शुरू कर दिया। पहले उद्योगों को बड़ी मात्रा में पेट्रोल और डीजल सामान्य बाजार दरों से पांच से छह रुपए कम कीमत पर टैंकरों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता था। उद्योग अपनी जरूरत के अनुसार ईंधन का स्टॉक भी रखते थे। लेकिन 20 मार्च के बाद इंडस्ट्रियल सप्लाई पर अतिरिक्त सरचार्ज लगा दिया गया, जो अब लगभग 20 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच चुका है। इसके बाद उद्योगों ने सीधे पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदना शुरू कर दिया।
उद्योगों, निर्माण कंपनियों, मशीन ऑपरेटरों और ठेकेदारों द्वारा बड़ी मात्रा में पेट्रोल और डीजल खरीदे जाने से बाजार में वास्तविक दबाव पैदा हो गया। बोरिंग मशीनों, भारी मशीनरी और निर्माण कार्यों में एक बार में हजारों लीटर डीजल की आवश्यकता होती है। अब यह मांग सीधे शहर के पेट्रोल पंपों पर पहुंचने लगी है। कई संचालकों का कहना है कि यदि वे तय सीमा से ज्यादा ईंधन बेचते हैं तो तेल कंपनियां उनकी अगली सप्लाई रोकने या ऑर्डर ब्लॉक करने की चेतावनी देती हैं। यही कारण है कि कई पंप संचालक सीमित मात्रा में ही ईंधन देने को मजबूर हैं।
उदयपुर शहर में रोजाना लगभग 100 किलोलीटर पेट्रोल और 150 किलोलीटर डीजल की खपत बताई जा रही है। नगर निगम सीमा क्षेत्र में करीब 40 पेट्रोल पंप संचालित हैं, जिनकी भंडारण क्षमता तीन से दस किलोलीटर तक है। पहले इन पंपों पर औसतन पांच दिन का स्टॉक उपलब्ध रहता था, लेकिन अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई पंप डेड स्टॉक यानी न्यूनतम स्तर तक पहुंच गए हैं। कई जगह सप्लाई अनियमित हो गई है और एडवांस भुगतान के बावजूद समय पर ईंधन नहीं मिल पा रहा।
इस संकट का असर केवल पेट्रोल पंपों तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्योग, परिवहन और कृषि क्षेत्र भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। निर्माण कंपनियों, फैक्ट्रियों और मशीन आधारित ठेकेदारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों के लिए भी डीजल की उपलब्धता चिंता का विषय बनती जा रही है, क्योंकि सिंचाई और कृषि उपकरणों का बड़ा हिस्सा डीजल पर निर्भर है। यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो खेती की लागत बढ़ने और कृषि कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
दूसरी ओर आम लोगों ने भी ईंधन को लेकर अलग तरह का तरीका अपनाना शुरू कर दिया है। शहर में अब तथाकथित “जुगाड़ मॉडल” तेजी से फैल रहा है। लोग अलग-अलग वाहनों में बार-बार टैंक फुल करवाकर बाद में ईंधन निकालकर स्टोर कर रहे हैं। कुछ लोग छोटे कंटेनरों और ड्रमों में भी पेट्रोल-डीजल जमा कर रहे हैं। इससे पंपों पर दबाव और अधिक बढ़ गया है। बड़ी मात्रा में ईंधन नहीं मिलने के कारण निर्माण कंपनियां और मशीन ऑपरेटर कई वाहनों के जरिए अलग-अलग हिस्सों में ईंधन जुटाने का प्रयास कर रहे हैं।
पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि ग्राहकों और कर्मचारियों के बीच विवाद की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। सीमित मात्रा में ईंधन दिए जाने के कारण कई बार लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। कुछ निजी पेट्रोल पंपों पर तो ग्राहकों की कमी के कारण स्टॉक खत्म होने की स्थिति बन गई है, जबकि सरकारी पंपों पर भारी भीड़ उमड़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही सप्लाई व्यवस्था को संतुलित नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में संकट और गंभीर हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय हालात, तेल कंपनियों की नीति और बढ़ती मांग को देखते हुए शहर की ईंधन व्यवस्था फिलहाल दबाव में नजर आ रही है। उदयपुर में बढ़ती यह समस्या अब केवल कीमतों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह आपूर्ति और उपलब्धता दोनों का बड़ा मुद्दा बनती जा रही है।


