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कोटा मेडिकल कॉलेज में एक और प्रसूता की मौत

कोटा मेडिकल कॉलेज में एक और प्रसूता की मौत

राजस्थान के कोटा स्थित कोटा मेडिकल कॉलेज से एक बार फिर बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। अस्पताल में भर्ती महिलाओं की लगातार बिगड़ती तबीयत और मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को अस्पताल में भर्ती एक और गंभीर महिला मरीज की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद अब पूरे मामले में जान गंवाने वाली महिलाओं की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। लगातार हो रही मौतों ने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मृतका की पहचान कोटा के शिवपुरा क्षेत्र निवासी शिरीन के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि शिरीन करीब पांच महीने की गर्भवती थी और 6 मई को नियमित जांच के लिए अपने परिजनों के साथ मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंची थी। परिजनों के अनुसार अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने जांच के बाद शिरीन की बच्चेदानी से जुड़ी एक समस्या बताते हुए छोटा ऑपरेशन यानी माइनर सर्जरी करने की सलाह दी। डॉक्टरों ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताते हुए जल्द ऑपरेशन करने की बात कही, जिसके बाद परिवार ने सहमति दे दी।

परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के तुरंत बाद शिरीन की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उसका ब्लड प्रेशर तेजी से गिर गया और उसकी हालत लगातार गंभीर होती चली गई। परिवार का कहना है कि जब उन्होंने डॉक्टरों से स्थिति के बारे में पूछा तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने स्थिति बिगड़ने पर मरीज को निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दी और परिजनों पर दबाव बनाया गया कि वे बेहतर इलाज के लिए उसे किसी निजी अस्पताल में शिफ्ट करें।

परिवार के सदस्यों का कहना है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण निजी अस्पताल में इलाज और महंगी दवाइयों का खर्च उठाना उनके लिए बेहद मुश्किल था। इसके बावजूद मरीज की हालत को देखते हुए परिजन उसे एक निजी अस्पताल लेकर गए, लेकिन वहां भी स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ। कई दिनों तक इलाज चलने के बाद जब हालत और गंभीर हो गई तो शुक्रवार को शिरीन को दोबारा कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। शनिवार को इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

शिरीन की मौत के बाद अस्पताल परिसर में माहौल बेहद भावुक हो गया। परिजन फूट-फूटकर रोते नजर आए और उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। मृतका के चाचा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यदि समय पर सही इलाज मिलता और डॉक्टर गंभीरता से ध्यान देते तो शिरीन की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑपरेशन के बाद लगातार बिगड़ती स्थिति के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने जिम्मेदारी लेने के बजाय मरीज को दूसरे अस्पताल भेजने का प्रयास किया।

घटना की सूचना मिलने के बाद Rajasthan Police के महावीर नगर थाना पुलिसकर्मी भी अस्पताल पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी ली। हालांकि परिजनों ने पोस्टमार्टम करवाने से इनकार कर दिया। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने लिखित सहमति लेने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। बिना पोस्टमार्टम शव ले जाने के कारण अब इस मामले में चिकित्सकीय कारणों की आधिकारिक पुष्टि होना भी मुश्किल माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल और JK Lon Hospital में पिछले कुछ दिनों के दौरान प्रसूताओं और महिला मरीजों की तबीयत बिगड़ने के कई मामले सामने आए हैं। अब तक पांच महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि पांच अन्य महिलाओं का इलाज अभी भी जारी है। वहीं दो महिलाओं की हालत में सुधार होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। लगातार सामने आ रहे मामलों ने आम लोगों में भय और नाराजगी दोनों बढ़ा दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी अब सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि इतने कम समय में लगातार महिलाओं की मौत हो रही है तो इसकी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। लोगों का मानना है कि यह केवल एक अस्पताल की समस्या नहीं बल्कि पूरे सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं के इलाज में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। किसी भी सर्जरी या चिकित्सकीय प्रक्रिया के बाद मरीज की लगातार निगरानी जरूरी होती है। ऐसे मामलों में थोड़ी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है। यही कारण है कि अब इस पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग तेज हो गई है।

हालांकि अस्पताल प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन लगातार हो रही मौतों के कारण अस्पताल की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। परिजन और आम लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर इन महिलाओं की तबीयत अचानक क्यों बिगड़ी और क्या इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी। आने वाले दिनों में यदि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होती है तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

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