राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं को लेकर लगातार सामने आ रहे घोटालों और अनियमितताओं के बीच एक बार फिर Rajasthan Public Service Commission (RPSC) की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। इस बार मामला और भी गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाने वाला कोई बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि आयोग का अपना कर्मचारी निकला है। स्कूल लेक्चरर भर्ती परीक्षा-2022 में डमी कैंडिडेट बैठाने और सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर करने के आरोप में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी एसओजी ने आयोग के कनिष्ठ लिपिक मानसिंह मीणा को गिरफ्तार किया है।
इस गिरफ्तारी के बाद राजस्थान की भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी कर्मचारी ने इतिहास और सामाजिक ज्ञान विषय की परीक्षा में असली अभ्यर्थी की जगह दूसरे व्यक्ति को बैठाने की पूरी साजिश रची थी। इतना ही नहीं, इस पूरे फर्जीवाड़े को सफल बनाने के लिए आयोग के रिकॉर्ड में भी बदलाव किए गए। जांच एजेंसियों के अनुसार फोटो, हस्ताक्षर और जन्मतिथि जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों में भी छेड़छाड़ की गई थी ताकि डमी अभ्यर्थी की पहचान छिपाई जा सके।
सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि डमी कैंडिडेट की मदद से परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी ने भर्ती परीक्षा में 569वीं रैंक हासिल कर ली थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि यदि समय रहते मामला पकड़ में नहीं आता तो फर्जी तरीके से चयनित उम्मीदवार सरकारी नौकरी हासिल कर सकता था। जांच में यह भी सामने आया कि पूरी योजना बेहद सुनियोजित तरीके से तैयार की गई थी और परीक्षा प्रणाली की अंदरूनी जानकारी का फायदा उठाकर इसे अंजाम दिया गया।
सूत्रों के मुताबिक मामला तब सामने आया जब आरपीएससी ने अपनी आंतरिक जांच के दौरान दस्तावेजों का मिलान किया। कुछ रिकॉर्ड में विसंगतियां मिलने के बाद अधिकारियों को शक हुआ और फिर परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच शुरू की गई। धीरे-धीरे कई अहम कड़ियां जुड़ती चली गईं और संदेह आयोग के कर्मचारी मानसिंह मीणा तक पहुंच गया। इसके बाद आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए ओएमआर शीट सहित कुल 13 महत्वपूर्ण दस्तावेज एसओजी को सौंप दिए।
एसओजी ने दस्तावेजों और तकनीकी साक्ष्यों की जांच के बाद आरोपी कर्मचारी को गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसी का मानना है कि यह मामला केवल एक अभ्यर्थी तक सीमित नहीं हो सकता और इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। यही कारण है कि अब मानसिंह मीणा से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने किन-किन परीक्षाओं में इसी तरह की साजिश को अंजाम दिया और उसके साथ कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरी साजिश को जयपुर के दो अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर अंजाम दिया गया था। आरोपी कर्मचारी ने आयोग की आंतरिक प्रणाली और प्रक्रियाओं की जानकारी का फायदा उठाकर डमी कैंडिडेट को सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया। अधिकारियों के अनुसार परीक्षा से पहले रिकॉर्ड में किए गए बदलावों की वजह से किसी को शुरुआती स्तर पर शक नहीं हुआ। हालांकि दस्तावेजों की बाद में हुई क्रॉस चेकिंग में फर्जीवाड़े की परतें खुलने लगीं।
एसओजी ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या यह पूरा नेटवर्क केवल भर्ती परीक्षाओं तक सीमित है या फिर इसके तार प्रदेश के अन्य परीक्षा घोटालों से भी जुड़े हुए हैं। पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान में पेपर लीक और डमी कैंडिडेट से जुड़े कई मामले सामने आ चुके हैं, जिसके बाद राज्य सरकार और जांच एजेंसियों पर परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने का दबाव लगातार बढ़ा है।
आरपीएससी सचिव की शिकायत के आधार पर शुरू हुई इस कार्रवाई ने आयोग के भीतर कार्यरत कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर भर्ती परीक्षाओं में बाहरी गिरोहों और दलालों की भूमिका सामने आती रही है, लेकिन इस मामले में आयोग के कर्मचारी की गिरफ्तारी ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इससे यह भी संकेत मिल रहे हैं कि परीक्षा माफिया अब केवल बाहर से ही नहीं बल्कि संस्थानों के भीतर तक अपनी पहुंच बना चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आयोग के कर्मचारी ही इस तरह की गतिविधियों में शामिल पाए जाते हैं तो भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा कमजोर पड़ सकता है। यही वजह है कि इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। एसओजी अब आरोपी के मोबाइल डेटा, बैंक खातों और संपर्कों की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस फर्जीवाड़े के बदले कितनी रकम ली गई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
फिलहाल मानसिंह मीणा से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य दलालों, डमी कैंडिडेट्स और संदिग्ध अभ्यर्थियों तक भी जांच पहुंच सकती है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर राजस्थान की भर्ती प्रणाली में पारदर्शिता, सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।


