राजस्थान के झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ उपखंड स्थित परसरामपुरा गांव में बुधवार को ऐसा घटनाक्रम देखने को मिला जिसने पूरे शेखावाटी क्षेत्र की राजनीति को गर्मा दिया। हाईकोर्ट के आदेश की पालना में प्रशासन ने नदी के बहाव क्षेत्र में बने एक खेल स्टेडियम की चारदीवारी और अधूरी संरचनाओं पर बुलडोजर चलाया। इस कार्रवाई का विरोध करने पहुंचे कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री राजकुमार शर्मा, उनके भाई डॉ. राजपाल शर्मा और सैकड़ों समर्थकों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पूरे घटनाक्रम के दौरान गांव में भारी पुलिस बल तैनात रहा और माहौल काफी तनावपूर्ण बना रहा।
पूर्व मंत्री राजकुमार शर्मा नवलगढ़ विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं और अशोक गहलोत सरकार में चिकित्सा मंत्री तथा मुख्यमंत्री के सलाहकार के रूप में भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। बुधवार सुबह जब प्रशासन कार्रवाई करने पहुंचा तो उन्होंने समर्थकों और ग्रामीणों के साथ इसका विरोध शुरू कर दिया। जैसे ही बुलडोजर स्टेडियम की दीवार की ओर बढ़ा, नारेबाजी तेज हो गई और ग्रामीण प्रशासन के खिलाफ लामबंद हो गए। इसके बाद पुलिस ने पूर्व मंत्री सहित कई लोगों को हिरासत में ले लिया।
दरअसल यह पूरा मामला परसरामपुरा गांव में बने उस खेल स्टेडियम से जुड़ा है, जो लंबे समय से विवादों में रहा है। प्रशासन का कहना है कि स्टेडियम का निर्माण नदी के बहाव क्षेत्र में किया गया था और यह अतिक्रमण की श्रेणी में आता है। राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने इस निर्माण को हटाने की कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों के अनुसार अदालत के निर्देशों की पालना करना अनिवार्य था, इसलिए प्रशासन ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कार्रवाई को अंजाम दिया।
सुबह सूरज निकलने से पहले ही प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस बल और जेसीबी मशीनें गांव पहुंच गई थीं। प्रशासन ने पहले से रणनीति तैयार कर रखी थी ताकि किसी भी विरोध या तनाव की स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। कार्रवाई के दौरान लगभग 700 मीटर लंबी स्टेडियम की चारदीवारी और अन्य निर्माण को ध्वस्त किया गया। गांव में पहले से ही तनाव का माहौल था, क्योंकि मंगलवार शाम से राजकुमार शर्मा अपने समर्थकों और ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे हुए थे।
सबसे पहले पूर्व मंत्री राजकुमार शर्मा ने गिरफ्तारी दी। उनके बाद उनके भाई डॉ. राजपाल शर्मा भी समर्थकों के साथ पुलिस के सामने आ गए। पुलिस ने दोनों को वाहन में बैठाकर हिरासत में ले लिया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, स्थानीय जनप्रतिनिधि और समर्थक भी गिरफ्तारी देने के लिए आगे आए। विरोध प्रदर्शन में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के नेता मुकेश रणवां सहित कई स्थानीय नेता भी शामिल रहे।
घटनास्थल पर उस समय भावुक माहौल बन गया जब राजकुमार शर्मा के पिता और वरिष्ठ शिक्षाविद रामनिवास शास्त्री भी मौके पर पहुंचे। उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बावजूद उन्होंने विरोध जताते हुए गिरफ्तारी देने की जिद की। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। बाद में उन्हें एंबुलेंस के जरिए वहां से हटाकर हिरासत में लिया गया। इस दृश्य ने पूरे आंदोलन को भावनात्मक रंग दे दिया।
पूर्व मंत्री राजकुमार शर्मा लगातार प्रशासनिक कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताते रहे। उनका आरोप था कि सरकार राजनीतिक दबाव में काम कर रही है और युवाओं के लिए बनाए गए खेल स्टेडियम को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण अवैध था तो प्रशासन ने इसे बनने से पहले क्यों नहीं रोका। उनका कहना था कि यह स्टेडियम क्षेत्र के युवाओं के खेल भविष्य को ध्यान में रखकर बनाया गया था और अब इसे तोड़ना युवाओं के सपनों पर बुलडोजर चलाने जैसा है।
राजकुमार शर्मा ने यह भी कहा कि प्रशासन चाहता तो कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक समय दे सकता था। उनका दावा था कि स्टेडियम सार्वजनिक उपयोग की संपत्ति थी और इससे क्षेत्र के खिलाड़ियों को फायदा मिल रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में उन्हें और उनके समर्थकों को निशाना बनाया जा रहा है। दूसरी ओर भाजपा और प्रशासनिक पक्ष इसे केवल कोर्ट के आदेश की पालना बता रहा है।
जिला प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई। अधिकारियों के अनुसार राजस्थान हाईकोर्ट ने नदी के बहाव क्षेत्र में बने अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की व्यवस्था की गई थी। प्रशासन ने करीब 310 पुलिसकर्मियों का जाब्ता लगाया, जिसमें पुरुष और महिला कांस्टेबल दोनों शामिल थे। मौके पर वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थे।
परसरामपुरा का यह स्टेडियम पहले भी चर्चा में रह चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि इसकी नींव तत्कालीन जिला प्रशासन और खेल अधिकारियों की मौजूदगी में रखी गई थी। ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि निर्माण नियमों के खिलाफ था तो उस समय इसे रोकने की कार्रवाई क्यों नहीं की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों तक प्रशासन ने कोई आपत्ति नहीं जताई और अब अचानक बुलडोजर कार्रवाई कर दी गई।
2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के Vikram Singh Jakhal से हार के बाद राजकुमार शर्मा एक बार फिर इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक केंद्र में आ गए हैं। नवलगढ़ क्षेत्र में पहले से भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी खींचतान जारी रही है और अब यह मामला दोनों दलों के बीच नए राजनीतिक संघर्ष का कारण बनता दिखाई दे रहा है।
करीब 200 लोगों को हिरासत में लेने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई पूरी की। फिलहाल गांव में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन यह मामला अब केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रह गया है। परसरामपुरा स्टेडियम विवाद ने नवलगढ़ और शेखावाटी की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।


