latest-newsजयपुरराजनीतिराजस्थान

राजस्थान में फिर बढ़ सकती हैं DLC दरें, जमीन-फ्लैट खरीदना होगा महंगा

राजस्थान में फिर बढ़ सकती हैं DLC दरें, जमीन-फ्लैट खरीदना होगा महंगा

राजस्थान में जमीन, फ्लैट और मकान खरीदने वालों को जल्द ही एक और बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है। राज्य सरकार एक बार फिर DLC यानी डिस्ट्रिक्ट लेवल कमेटी की दरों में बढ़ोतरी की तैयारी कर रही है। यदि नई दरें लागू होती हैं तो एग्रीकल्चर, रेजिडेंशियल और कॉमर्शियल उपयोग की जमीनों की रजिस्ट्री पहले से अधिक महंगी हो जाएगी। इससे प्रॉपर्टी खरीदने वाले आम लोगों के साथ-साथ रियल एस्टेट सेक्टर पर भी सीधा असर पड़ने की संभावना है। राज्य सरकार ने इसी साल 1 अप्रैल को प्रदेशभर में डीएलसी दरों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी। अब कुछ ही समय बाद फिर से इन दरों के पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार का मानना है कि वर्तमान डीएलसी दरें बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम हैं और तेजी से बढ़ रही जमीनों की कीमतों को देखते हुए इनका संशोधन जरूरी हो गया है।

कुमार पाल गौतम  ने हाल ही में सभी जिला कलेक्टर्स को पत्र जारी कर DLC की बैठक बुलाने और जमीनों के बाजार मूल्य की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि विभिन्न स्रोतों से प्राप्त इनपुट के अनुसार कई क्षेत्रों में जमीनों की वास्तविक बाजार कीमतें मौजूदा डीएलसी दरों से कहीं अधिक हो चुकी हैं। खासतौर पर स्टेट हाईवे, नेशनल हाईवे और औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास जमीनों के दाम पिछले दो वर्षों में तेजी से बढ़े हैं।

सरकार का कहना है कि मौजूदा दरें अभी भी वर्ष 2024 के मूल्यांकन के आधार पर चल रही हैं। वर्ष 2025 में डीएलसी की बैठक समय पर नहीं हो पाई थी, जिसके कारण पुराने मूल्यों पर ही 10 प्रतिशत वृद्धि कर दरें लागू कर दी गई थीं। अब सरकार चाहती है कि नए सिरे से जमीनों का मूल्यांकन किया जाए ताकि डीएलसी दरों को बाजार भाव के करीब लाया जा सके।

राज्य सरकार के इस कदम का सबसे अधिक असर उन लोगों पर पड़ेगा जो आने वाले समय में जमीन, मकान या फ्लैट खरीदने की योजना बना रहे हैं। डीएलसी दरों के आधार पर ही रजिस्ट्री शुल्क और स्टांप ड्यूटी तय होती है। ऐसे में यदि डीएलसी दरें बढ़ती हैं तो रजिस्ट्री पर लगने वाला खर्च भी स्वतः बढ़ जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि प्रॉपर्टी खरीदना पहले से अधिक महंगा हो जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि डीएलसी दरों में लगातार बढ़ोतरी से रियल एस्टेट बाजार पर दोहरा असर पड़ सकता है। एक ओर सरकार को राजस्व में बढ़ोतरी होगी, वहीं दूसरी ओर आम खरीदारों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। खासतौर पर मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए घर खरीदना और कठिन हो सकता है। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, अजमेर और कोटा जैसे शहरों में पहले ही प्रॉपर्टी की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में डीएलसी दरों में एक और वृद्धि बाजार को और महंगा बना सकती है।

अगर जयपुर की बात करें तो भजनलाल सरकार के कार्यकाल में अब तक डीएलसी दरों में कई बार बढ़ोतरी हो चुकी है। अप्रैल 2024 में सरकार ने पहली बार 10 प्रतिशत की वृद्धि की थी। इसके बाद दिसंबर 2024 में अलग-अलग क्षेत्रों में 5 से 15 प्रतिशत तक दरें बढ़ाई गईं। फिर अप्रैल 2026 में एक बार दोबारा 10 प्रतिशत वृद्धि लागू की गई। अब एक और संभावित संशोधन ने प्रॉपर्टी बाजार में हलचल बढ़ा दी है।

जयपुर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान जमीनों की कीमतों में लगातार तेजी देखी गई है। शहर के बाहरी इलाकों, नए विकसित हो रहे आवासीय क्षेत्रों और औद्योगिक जोन में जमीनों की मांग तेजी से बढ़ी है। कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, नई सड़कें और एक्सप्रेस-वे बनने के कारण भी जमीनों के दामों में भारी उछाल आया है। सरकार का तर्क है कि जब वास्तविक बाजार मूल्य तेजी से बढ़ रहे हैं, तब डीएलसी दरों को पुरानी स्थिति में बनाए रखना राजस्व हित में उचित नहीं होगा।

फाइनेंस डिपार्टमेंट ने सभी जिला कलेक्टर्स को जून के तीसरे सप्ताह तक डीएलसी की बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इन बैठकों में स्थानीय स्तर पर जमीनों की मौजूदा कीमतों का अध्ययन किया जाएगा और उसके आधार पर नए प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। इसके बाद राज्य स्तर पर अंतिम मंजूरी मिलने पर नई डीएलसी दरें लागू की जा सकती हैं।

रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ती डीएलसी दरों से प्रॉपर्टी बाजार की गति प्रभावित हो सकती है। कई खरीदार रजिस्ट्री महंगी होने के डर से फिलहाल निवेश टाल सकते हैं। दूसरी ओर सरकार का मानना है कि वास्तविक बाजार मूल्य के अनुरूप डीएलसी दरें तय करना जरूरी है ताकि राजस्व की हानि न हो और प्रॉपर्टी लेनदेन में पारदर्शिता बनी रहे।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि डीएलसी दरों में अत्यधिक बढ़ोतरी से अवैध नकद लेनदेन को बढ़ावा मिलने का खतरा रहता है। यदि बाजार मूल्य और सरकारी मूल्यांकन के बीच बहुत अधिक अंतर होता है, तो खरीदार और विक्रेता रजिस्ट्री कम मूल्य पर कराने की कोशिश करते हैं। इसलिए सरकार के सामने चुनौती यह भी होगी कि वह संतुलित दरें तय करे ताकि राजस्व भी बढ़े और आम लोगों पर अत्यधिक बोझ भी न पड़े।

राजस्थान में तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों और बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के बीच डीएलसी दरों का यह नया पुनर्मूल्यांकन आने वाले समय में राज्य के प्रॉपर्टी बाजार की दिशा तय कर सकता है। फिलहाल प्रॉपर्टी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों की नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है, क्योंकि नई दरें लागू होने के बाद जमीन और मकान खरीदने की लागत में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading