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फोक्सफेयर से लोक कलाकारों को मिलेगी नई डिजिटल पहचान

फोक्सफेयर से लोक कलाकारों को मिलेगी नई डिजिटल पहचान

राजस्थान की समृद्ध लोक कला और पारंपरिक कलाकारों को डिजिटल दुनिया से जोड़ने की दिशा में जयपुर से एक नई पहल की शुरुआत हुई है। लोक कलाकारों को आधुनिक तकनीक और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से तैयार किए गए डिजिटल मंच ‘फोक्सफेयर’ का लोकार्पण राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा  ने किया। इस पहल को लोक कला के संरक्षण, प्रचार और कलाकारों को रोजगार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जयपुर में आयोजित कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि लोक कलाकार हमारी संस्कृति और परंपराओं की असली धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान सहित पूरे देश की लोक कलाएं भारतीय संस्कृति की आत्मा को जीवित रखती हैं। बदलते दौर में जब डिजिटल माध्यम तेजी से लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन रहे हैं, ऐसे समय में लोक कलाकारों को भी तकनीक से जोड़ना बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि ‘फोक्सफेयर’ जैसे मंच नई पीढ़ी को लोक संस्कृति से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएंगे और कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का माध्यम बनेंगे।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इस डिजिटल मंच की संस्थापक युवा उद्यमी ऋचा गोस्वामी  की सराहना करते हुए कहा कि युवाओं की ऐसी सोच समाज और संस्कृति दोनों के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह प्लेटफॉर्म आने वाले समय में देशभर के लोक कलाकारों के लिए बड़ा अवसर साबित होगा। इस अवसर पर प्रसिद्ध तमाशा साधक दिलीप भट्ट , कलाकार सचिन भट्ट , समाज अध्यक्ष नीरज गोस्वामी , वागीश गोस्वामी और प्रमोद तैलंग  सहित कई सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग मौजूद रहे।

‘फोक्सफेयर’ को जयपुर की युवा उद्यमी ऋचा गोस्वामी ने तैयार किया है। इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य देशभर के लोक कलाकारों को एक साझा डिजिटल पहचान देना है ताकि कलाकारों और आयोजकों के बीच सीधा संपर्क स्थापित हो सके। अब तक लोक कलाकारों को काम पाने के लिए व्यक्तिगत संपर्कों, सोशल मीडिया या स्थानीय एजेंटों पर निर्भर रहना पड़ता था। कई बार प्रतिभाशाली कलाकारों तक आयोजकों की पहुंच नहीं बन पाती थी, जिससे उन्हें अवसर नहीं मिल पाते थे। ऐसे में ‘फोक्सफेयर’ कलाकारों और आयोजकों के बीच एक डिजिटल ब्रिज की तरह काम करेगा।

इस प्लेटफॉर्म पर कलाकार खुद को ऑनलाइन पंजीकृत कर सकेंगे। वेबसाइट पर “जॉइन ऐज एन आर्टिस्ट” या “आई एम एन आर्टिस्ट” जैसे विकल्पों के माध्यम से कलाकार अपनी प्रोफाइल तैयार कर पाएंगे। इसमें उनकी कला शैली, अनुभव, फोटो, वीडियो और संपर्क संबंधी जानकारी शामिल होगी। इससे आयोजकों को किसी विशेष कला या प्रस्तुति के लिए कलाकार खोजने में आसानी होगी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों, मेलों, फेस्टिवल्स, शादियों, कॉर्पोरेट इवेंट्स और सरकारी आयोजनों के लिए कलाकारों से सीधे संपर्क किया जा सकेगा।

ऋचा गोस्वामी ने कहा कि आज सोशल मीडिया पर प्रतिभाओं की भारी भीड़ है, जहां कई बार असली लोक कलाकारों की पहचान दबकर रह जाती है। छोटे गांवों और कस्बों में काम कर रहे कलाकारों के पास अपनी कला को बड़े मंच तक पहुंचाने के सीमित साधन होते हैं। उन्होंने कहा कि ‘फोक्सफेयर’ केवल कलाकारों के लिए समर्पित मंच होगा, जहां आयोजकों को सही कलाकार तलाशने में आसानी होगी और कलाकारों को भी बिना किसी बिचौलिए के सीधे अवसर मिल सकेंगे।

उन्होंने बताया कि यह प्लेटफॉर्म केवल कलाकारों की प्रोफाइल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजनों से भी जोड़ा जाएगा। आने वाले समय में कला परियोजनाओं, सम्मान समारोहों और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए कलाकारों का डिजिटल डाटा उपयोगी साबित होगा। उनका मानना है कि यदि लोक कलाकार डिजिटल रूप से संगठित होते हैं, तो उन्हें रोजगार, पहचान और सम्मान प्राप्त करने में काफी मदद मिलेगी।

कार्यक्रम में मौजूद तमाशा साधक दिलीप भट्ट ने कहा कि लोक कलाएं आज भी गांवों और छोटे शहरों में जीवित हैं, लेकिन उन्हें आधुनिक मंचों तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में यदि कलाकार तकनीक से नहीं जुड़ेंगे तो उनकी पहुंच सीमित रह जाएगी। ऐसे में ‘फोक्सफेयर’ लोक कलाकारों को समय के साथ आगे बढ़ने का अवसर देगा और उनकी कला को देश-दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा।

कार्यक्रम में शामिल अन्य वक्ताओं ने भी इस पहल को लोक कला के डिजिटल पुनर्जागरण की शुरुआत बताया। उनका कहना था कि भारत की लोक संस्कृति बेहद समृद्ध है, लेकिन बदलती जीवनशैली और मनोरंजन के नए साधनों के कारण पारंपरिक कलाओं के सामने चुनौती खड़ी हो गई है। कई लोक कलाकार आर्थिक कठिनाइयों के कारण अपनी कला छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। ऐसे समय में यदि उन्हें डिजिटल मंच और सीधे काम के अवसर मिलते हैं, तो यह उनकी कला और आजीविका दोनों के लिए लाभदायक होगा।

मंच से जुड़े लोगों ने देशभर के लोक कलाकारों से अधिक से अधिक संख्या में इस प्लेटफॉर्म से जुड़ने की अपील की। उनका कहना है कि डिजिटल माध्यम आज के समय की सबसे बड़ी ताकत बन चुके हैं और यदि लोक कलाकार भी तकनीक का उपयोग करेंगे तो वे अपनी कला को नए दर्शकों तक पहुंचा सकेंगे। इससे न केवल कलाकारों की आय बढ़ेगी, बल्कि देश की पारंपरिक लोक कलाओं को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘फोक्सफेयर’ जैसी पहलें भविष्य में लोक संस्कृति के संरक्षण और कलाकारों के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। यह मंच राजस्थान सहित देशभर के लोक कलाकारों को एक नई दिशा देने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति को डिजिटल दुनिया में मजबूत पहचान दिलाने का माध्यम बन सकता है।

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