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जयपुर में ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ, सेना का भव्य आयोजन

जयपुर में ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ, सेना का भव्य आयोजन

 राजस्थान की राजधानी जयपुर एक बार फिर देश की सैन्य गतिविधियों के केंद्र के रूप में उभरने जा रही है। भारतीय सेना ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के अवसर पर 7 और 8 मई को यहां एक महत्वपूर्ण और भव्य आयोजन करने जा रही है। इस कार्यक्रम में देश की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े शीर्ष स्तर के अधिकारी और नेता शामिल होंगे, जिससे यह आयोजन राष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व रखता है। यह आयोजन न केवल सेना की उपलब्धियों को दर्शाने का मंच बनेगा, बल्कि भविष्य की सैन्य रणनीतियों पर भी व्यापक विचार-विमर्श का अवसर प्रदान करेगा।

इस दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन जयपुर स्थित साउथ वेस्टर्न कमांड, जिसे सप्त शक्ति कमान के नाम से भी जाना जाता है, के आर्मी एरिया में किया जाएगा। कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान तथा थल सेना, वायु सेना और नौसेना के प्रमुखों की उपस्थिति इसे और भी महत्वपूर्ण बना देगी। इन शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी इस आयोजन को राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक अहम मंच में बदल देगी, जहां नीतिगत और रणनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण निर्णयों पर चर्चा संभव है।

कार्यक्रम की शुरुआत 7 मई को दोपहर के समय एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस से होगी, जो खातीपुरा स्थित सप्त शक्ति कमान के ऑडिटोरियम में आयोजित की जाएगी। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में रक्षा मंत्री और सेना के वरिष्ठ अधिकारी मीडिया के माध्यम से देशवासियों को ऑपरेशन सिंदूर की उपलब्धियों और उसकी रणनीतिक अहमियत के बारे में जानकारी देंगे। इसके बाद शाम के समय एक विशेष फिल्म का विमोचन किया जाएगा, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान की वास्तविक घटनाओं और सैन्य कार्रवाई के महत्वपूर्ण पहलुओं को दर्शाया जाएगा। इस फिल्म के जरिए आम जनता को सेना के साहस, रणनीति और समर्पण की झलक देखने को मिलेगी।

गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई 2025 को की गई थी। यह एक संयुक्त सैन्य अभियान था, जिसमें भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना ने मिलकर पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया था। इस ऑपरेशन के तहत कुल नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक और योजनाबद्ध कार्रवाई की गई थी। यह अभियान भारतीय सेना की समन्वित शक्ति और आधुनिक युद्ध कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण माना गया था। राजस्थान की भौगोलिक स्थिति और सीमावर्ती राज्य होने के कारण इस अभियान में इसकी भूमिका भी महत्वपूर्ण रही थी, जिसके चलते वर्षगांठ के आयोजन के लिए जयपुर का चयन विशेष रूप से किया गया है।

इस आयोजन के साथ ही जयपुर में जॉइंट कमांडर्स कॉन्फ्रेंस का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन में बीते सैन्य अभियानों की समीक्षा की जाएगी और भविष्य के लिए नई रणनीतियों पर विचार किया जाएगा। विशेष रूप से तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और तालमेल, जिसे ‘जॉइंटमेनशिप’ कहा जाता है, को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर रहेगा। आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए इस प्रकार के सम्मेलन बेहद जरूरी माने जा रहे हैं, जहां विभिन्न सेनाओं के बीच सहयोग और समन्वय को नई दिशा दी जाती है।

रक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस बार की जॉइंट कमांडर्स कॉन्फ्रेंस की थीम ‘नए क्षेत्रों में सैन्य क्षमता’ रखी गई है। इस थीम के तहत सेना की भविष्य की तैयारियों और उभरती चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। आधुनिक युद्ध अब केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें तकनीकी और डिजिटल क्षेत्रों की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक और अनमैन्ड सिस्टम्स के उपयोग को लेकर भी गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके अलावा साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष क्षेत्र और कॉग्निटिव वॉरफेयर जैसे नए आयामों में भारत की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने की रणनीतियां तैयार की जाएंगी।

इस सम्मेलन में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। भारतीय सेना द्वारा विकसित नई तकनीकों और इनोवेटिव प्रोजेक्ट्स का प्रदर्शन किया जाएगा, जिससे यह स्पष्ट होगा कि भारत अब रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही नई सैन्य नीतियों और युद्ध संबंधी सिद्धांतों को भी इस मंच से जारी किया जा सकता है, जो भविष्य में सेना के संचालन और रणनीति को नई दिशा देंगे।

जयपुर में इससे पहले भी सेना के बड़े आयोजन हो चुके हैं, जिनमें आर्मी डे परेड विशेष रूप से उल्लेखनीय रही है। उस आयोजन ने देशवासियों को सेना की ताकत, अनुशासन और आधुनिक तकनीक का शानदार प्रदर्शन दिखाया था। ऐसे में ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ का यह आयोजन भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सेना की शक्ति और सामर्थ्य को प्रदर्शित करेगा।

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