भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 6 मई को जोरदार तेजी देखने को मिली, जिसने निवेशकों के चेहरे पर फिर से रौनक लौटा दी। कारोबारी सत्र के अंत में BSE Sensex 941 अंकों की मजबूत बढ़त के साथ 77,959 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 ने भी 298 अंकों की छलांग लगाते हुए 24,331 का स्तर छू लिया। इस उछाल ने बाजार में सकारात्मक माहौल पैदा किया और अधिकांश सेक्टर्स में खरीदारी का रुझान देखने को मिला।
दिनभर के कारोबार के दौरान सेंसेक्स के 30 में से 21 शेयरों में तेजी दर्ज की गई, जबकि 9 शेयरों में गिरावट रही। ऑटोमोबाइल, बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, फार्मा और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में 2 प्रतिशत से अधिक की मजबूती देखने को मिली। निवेशकों ने इन सेक्टर्स में जमकर खरीदारी की, जिससे बाजार को मजबूत आधार मिला।
इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक संकेतों का मिलना रहा। मध्य-पूर्व में लंबे समय से चल रहे तनाव के बीच अब शांति की उम्मीदें बढ़ने लगी हैं। United States और Iran के बीच युद्ध विराम को लेकर सकारात्मक खबरों ने निवेशकों के विश्वास को मजबूत किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा शांति समझौते के संकेत देने के बाद वैश्विक बाजारों में भी उत्साह देखने को मिला, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा।
दूसरी बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude Oil की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई है, जो भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए राहत की खबर है। दिन की शुरुआत में यह कीमत 108 डॉलर के पार थी, लेकिन शांति की उम्मीद और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही शुरू करने के संकेतों के चलते इसमें गिरावट आई। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई पर दबाव कम होने की उम्मीद बढ़ती है, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है।
तीसरी महत्वपूर्ण वजह वैश्विक बाजारों की मजबूती रही। अमेरिकी बाजारों में 5 मई को शानदार प्रदर्शन देखने को मिला, जहां S&P 500 और Nasdaq Composite रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुए। इसके अलावा एशियाई बाजारों में भी तेजी का माहौल रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग सूचकांक भी मजबूती के साथ बंद हुए। इन वैश्विक संकेतों ने भारतीय निवेशकों के मनोबल को बढ़ाया और बाजार में खरीदारी को बढ़ावा मिला।
हालांकि विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर डालें तो तस्वीर थोड़ी मिश्रित नजर आती है। पिछले सात दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई ने करीब 8,834 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई ने इस दौरान बाजार में 10,854 करोड़ रुपए की खरीदारी की है, जिससे बाजार को संतुलन मिला है। पिछले 30 दिनों में भी एफआईआई की बिकवाली जारी रही है, जबकि डीआईआई लगातार खरीदारी करते नजर आए हैं।
मध्य-पूर्व में जारी तनाव का असर तेल की आपूर्ति पर भी पड़ा है। ईरान लंबे समय से Strait of Hormuz से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर नियंत्रण बनाए हुए था, जिससे वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई। यह समुद्री मार्ग दुनिया के करीब पांचवें हिस्से की तेल और गैस सप्लाई के लिए अहम माना जाता है। हालांकि अब हालात में सुधार के संकेत मिल रहे हैं, जिससे कीमतों में गिरावट आई है।
डेरिवेटिव मार्केट में भी भारतीय एक्सचेंज की स्थिति मजबूत बनी हुई है। National Stock Exchange का इंडेक्स ऑप्शंस में मार्केट शेयर लगातार बढ़ रहा है। जनवरी के मुकाबले मार्च में इसकी हिस्सेदारी बढ़कर 72.1 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं कुल फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस प्रीमियम टर्नओवर में भी इसकी हिस्सेदारी 86.8 प्रतिशत रही है, जो इसकी बढ़ती पकड़ को दर्शाता है।
पिछले कारोबारी सत्र की बात करें तो मंगलवार, 5 मई को बाजार में हल्की गिरावट देखी गई थी। उस दिन सेंसेक्स 251 अंक गिरकर 77,017 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी भी 86 अंक फिसलकर 24,032 पर आ गया था। हालांकि आज की तेजी ने पिछले दिन की गिरावट को पूरी तरह से कवर कर लिया और बाजार को नई दिशा दी।


