राजस्थान में मौसम इन दिनों तेजी से करवट बदल रहा है। जहां एक ओर कई हिस्सों में आंधी और बारिश से लोगों को भीषण गर्मी से अस्थायी राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में तापमान में तेज बढ़ोतरी और हीटवेव के खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया है। मौसम के इस बदलते मिजाज ने आम जनजीवन के साथ-साथ प्रशासन की चिंताओं को भी बढ़ा दिया है।
मौसम विभाग के अनुसार कोटा, उदयपुर, भरतपुर और जयपुर संभाग के कई इलाकों सहित उत्तरी राजस्थान के कुछ हिस्सों में आंधी और बारिश की गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। इन क्षेत्रों में अचानक तेज हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है। हालांकि यह दौर ज्यादा लंबा नहीं चलेगा। विभाग का अनुमान है कि अगले तीन से चार दिनों में इन गतिविधियों में कमी आने लगेगी और अधिकांश क्षेत्रों में मौसम शुष्क होने लगेगा।
हालांकि उत्तर-पूर्वी राजस्थान के कुछ इलाकों में आंधी और बारिश का असर पूरी तरह खत्म नहीं होगा। यहां पर कहीं-कहीं मध्यम स्तर की बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना बनी रहेगी। इससे स्थानीय स्तर पर तापमान में थोड़ी राहत बनी रह सकती है, लेकिन व्यापक स्तर पर गर्मी का प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ने लगेगा।
मौसम विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आगामी तीन से चार दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है। यह बढ़ोतरी राज्य के अधिकांश हिस्सों में महसूस की जाएगी, जिससे दिन के समय गर्मी और अधिक तीखी हो जाएगी। पहले जहां बारिश और बादलों की वजह से तापमान में गिरावट आई थी, अब वही तापमान फिर से तेजी से ऊपर चढ़ने वाला है।
सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि 9 मई से राज्य के सीमावर्ती इलाकों में एक नया हीटवेव दौर शुरू होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के मुताबिक 8 से 11 मई के बीच जोधपुर और बीकानेर संभाग के सीमावर्ती क्षेत्रों में तापमान 45 से 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इस तरह का तापमान सामान्य जनजीवन के लिए चुनौतीपूर्ण होता है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण भी बन सकता है।
मौसम विभाग ने कुछ जिलों के लिए विशेष रूप से ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इनमें राजसमंद, पाली, सिरोही, उदयपुर, सलूम्बर और डूंगरपुर शामिल हैं। इन क्षेत्रों में मध्यम से तीव्र मेघगर्जन के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना है, जिनकी रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है। इसके अलावा वज्रपात, ओलावृष्टि और हल्की से मध्यम बारिश की भी आशंका जताई गई है। इस तरह के मौसम में सावधानी बरतना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि अचानक बदलते हालात दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं।
वहीं कुछ जिलों में येलो अलर्ट भी जारी किया गया है। इनमें बालोतरा, जालोर, झालावाड़, बारां, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ और चित्तौड़गढ़ शामिल हैं। इन इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। हालांकि इन क्षेत्रों में खतरे का स्तर ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों की तुलना में कम है, फिर भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
मौसम के इस उतार-चढ़ाव का असर किसानों, आम नागरिकों और दैनिक कामकाज पर भी पड़ रहा है। जहां एक ओर बारिश से कुछ राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर तेज हवाएं और ओलावृष्टि फसलों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके साथ ही आने वाली हीटवेव को देखते हुए लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की जरूरत है, खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह समय अधिक संवेदनशील हो सकता है।


