राजस्थान की राजनीति में इन दिनों तिजारा से विधायक बाबा बालकनाथ के एक कथित विवादित बयान को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। इस बयान के विरोध में सैन समाज के प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा मुख्यालय पहुंचकर कड़ा विरोध दर्ज कराया और पार्टी नेतृत्व से हस्तक्षेप की मांग की। समाज के लोगों ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि अगर विधायक सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं, तो आने वाले समय में यह विरोध आंदोलन का रूप ले सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत एक वायरल वीडियो से हुई, जिसमें बाबा बालकनाथ एक अभियंता से बातचीत करते नजर आ रहे हैं। इस दौरान उनके द्वारा कथित रूप से जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। वीडियो के वायरल होते ही मामला तेजी से राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन गया। सैन समाज ने इसे न केवल अपने समुदाय बल्कि मेहनतकश और दस्तकार वर्ग का भी अपमान बताया है।
विरोध जताने के लिए सैन समाज का एक प्रतिनिधिमंडल भाजपा प्रदेश मुख्यालय पहुंचा और प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ से मुलाकात की। इस दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि एक जनप्रतिनिधि से इस तरह की भाषा की अपेक्षा नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को अपने शब्दों के चयन में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि उनके बयान समाज पर व्यापक प्रभाव डालते हैं।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल नारायणी धाम के अध्यक्ष विनोद करेल ने कहा कि यह बयान केवल नाई समाज का ही नहीं, बल्कि उन सभी वर्गों का अपमान है जो मेहनत और कौशल के जरिए समाज में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज इस तरह के बयानों को किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने मांग रखी कि विधायक को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए, चाहे वह मीडिया के माध्यम से हो या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए।
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते वे इस मामले में माफी मांगते हैं। राठौड़ ने यह भी बताया कि इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए विधायक बालकनाथ से भी बात की गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि पार्टी इस विषय को नजरअंदाज नहीं करेगी और उचित स्तर पर इस पर विचार किया जाएगा।
हालांकि, सैन समाज के प्रतिनिधियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि केवल पार्टी स्तर पर माफी पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि जिस व्यक्ति ने यह बयान दिया है, उसे खुद आगे आकर अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए और समाज से माफी मांगनी चाहिए। प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो समाज सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगा।
इस मुद्दे पर अन्य सामाजिक और राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। राजेन्द्र सेन, श्रवण तंवर और रूपनारायण लूणीवाल ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना बिल्कुल भी उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि नाई समाज की एक समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा रही है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
नेताओं ने संत सेन जी महाराज का उल्लेख करते हुए कहा कि इस समाज का इतिहास और योगदान अत्यंत सम्माननीय रहा है। ऐसे में किसी भी प्रकार की अपमानजनक टिप्पणी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाती है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों को इस तरह के मामलों में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए।
वर्तमान स्थिति में यह मामला केवल एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक सम्मान और राजनीतिक जिम्मेदारी का मुद्दा बन चुका है। जिस तेजी से यह विवाद बढ़ा है, उससे साफ है कि समाज अब अपनी गरिमा को लेकर पहले से अधिक सजग है और किसी भी तरह के अपमान को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।


