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कठूमर के पूर्व विधायक बाबूलाल बैरवा का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर

कठूमर के पूर्व विधायक बाबूलाल बैरवा का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर

अलवर जिले की कठूमर विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रहे वरिष्ठ नेता बाबूलाल बैरवा के निधन की खबर ने पूरे क्षेत्र को गहरे शोक में डुबो दिया है। वे पिछले करीब 12 से 13 दिनों से बीमार चल रहे थे और जयपुर में इलाज के दौरान उन्होंने तड़के लगभग 3 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन से न केवल राजनीतिक जगत बल्कि सामाजिक क्षेत्र में भी एक बड़ी रिक्तता पैदा हो गई है, क्योंकि बैरवा लंबे समय तक जनता से जुड़े रहे और क्षेत्रीय राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ रही।

जानकारी के अनुसार, बाबूलाल बैरवा पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्हें उच्च रक्तचाप, मधुमेह और अस्थमा जैसी बीमारियां थीं, जिसके चलते उनकी तबीयत लगातार खराब बनी हुई थी। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था। बावजूद इसके, उनकी सेहत में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया और आखिरकार उन्होंने जिंदगी की अंतिम सांस ली।

बाबूलाल बैरवा का राजनीतिक जीवन बेहद सक्रिय और प्रभावशाली रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन हर परिस्थिति में उन्होंने जनता से जुड़ाव बनाए रखा। वे चार बार विधायक चुने गए, जो इस बात का प्रमाण है कि उनके प्रति जनता का भरोसा कितना गहरा था। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में की थी और वर्ष 1980 में पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर 1985 में जीत हासिल की और अपनी राजनीतिक स्थिति को और मजबूत किया।

समय के साथ उन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ भी काम किया। वर्ष 2008 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। वहीं, वर्ष 2018 में उन्होंने पुनः कांग्रेस का दामन थामा और एक बार फिर जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे। इस तरह उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक मंचों से जनता की सेवा की और अपने क्षेत्र में लगातार प्रभाव बनाए रखा। यही कारण रहा कि वे कठूमर क्षेत्र की राजनीति में एक मजबूत और प्रभावशाली चेहरा माने जाते थे।

बाबूलाल बैरवा केवल विधायक ही नहीं रहे, बल्कि उन्होंने स्थानीय प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे अलवर में उपजिला प्रमुख के पद पर भी रहे, जहां उन्होंने विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में अहम योगदान दिया। उनके कार्यकाल के दौरान क्षेत्र में कई विकास योजनाएं लागू हुईं, जिनका लाभ आज भी लोगों को मिल रहा है। वे जनता की समस्याओं को समझने और उनका समाधान करने के लिए हमेशा तत्पर रहते थे, जिसके कारण उन्हें एक जननेता के रूप में पहचान मिली।

उनके निधन की खबर जैसे ही सामने आई, कठूमर और खेड़ली सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों, समर्थकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने उनके निधन को क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। कई लोगों ने उनके साथ बिताए पलों को याद करते हुए कहा कि वे जमीन से जुड़े हुए नेता थे, जो हर समय आम जनता के बीच रहते थे और उनकी समस्याओं को अपनी प्राथमिकता मानते थे।

बाबूलाल बैरवा की अंतिम यात्रा खेड़ली बाइपास रोड स्थित उनके निवास से निकाली जाएगी। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए पहुंचेंगे। उनके समर्थक और क्षेत्रीय लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एकत्रित हो रहे हैं। अंतिम संस्कार के दौरान भी भारी भीड़ जुटने की संभावना है, जो उनके प्रति लोगों के सम्मान और लगाव को दर्शाता है।

राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी बाबूलाल बैरवा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि बैरवा का जाना पार्टी के लिए बड़ी क्षति है। वहीं, अन्य दलों के नेताओं ने भी उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें एक समर्पित जनसेवक बताया।

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