राजस्थान में भीषण गर्मी के बीच मौसम ने अचानक करवट लेते हुए लोगों को बड़ी राहत दी है। प्रदेश के कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर शुरू हो गया है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और लंबे समय से पड़ रही गर्मी से राहत महसूस की जा रही है। खासतौर पर उत्तरी राजस्थान के जिलों में मौसम का असर ज्यादा देखने को मिला, जहां तेज हवाओं के साथ जोरदार बारिश और बड़े आकार के ओले गिरने की घटनाएं सामने आई हैं।
श्रीगंगानगर जिले के ग्रामीण इलाकों में मौसम का यह बदलाव काफी तीव्र रहा। यहां बेर के आकार के ओले गिरने से खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा है। साथ ही, ओलावृष्टि और तेज बारिश के कारण सामान्य जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर सड़कों पर पानी भर गया, जिससे आवागमन में परेशानी हुई और दृश्यता भी कम हो गई। हालांकि, इसके बावजूद लोगों ने इसे गर्मी से राहत देने वाली बारिश के रूप में देखा है।
घड़साना और पतरोडा क्षेत्रों में दोपहर तक तेज धूप बनी हुई थी और गर्मी का असर साफ महसूस किया जा रहा था, लेकिन अचानक मौसम में बदलाव आया। आसमान में घने बादल छा गए और कुछ ही देर में तेज आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई। तेज हवाओं के कारण कई जगह पेड़ हिलने लगे और धूलभरी आंधी के बाद बारिश ने पूरे माहौल को ठंडा कर दिया। इसके साथ ही हुई ओलावृष्टि ने मौसम को और भी नाटकीय बना दिया।
इसी तरह अनूपगढ़ क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में भी तेज हवाओं के साथ बारिश और ओले गिरने की खबरें सामने आई हैं। यहां भी मौसम का बदलाव अचानक हुआ, जिससे लोगों को संभलने का ज्यादा समय नहीं मिला। किसानों के लिए यह स्थिति चिंताजनक बन गई है, क्योंकि इस समय कई फसलें खेतों में खड़ी हैं और ओलावृष्टि से उन्हें नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है।
मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार, प्रदेश में यह बदलाव एक नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण हुआ है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी और मध्य हिस्सों में बादल छाने लगे हैं और बारिश की गतिविधियां बढ़ गई हैं। बीकानेर जिले के कुछ हिस्सों में भी बारिश दर्ज की गई है, जबकि चूरू और नागौर जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हुई है। यह प्रणाली अगले कुछ दिनों तक सक्रिय रह सकती है, जिससे प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।
मौसम विभाग का अनुमान है कि आगामी दो से तीन दिनों तक प्रदेश में इसी तरह का मौसम बना रहेगा। इस दौरान तापमान में एक से दो डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे गर्मी का असर कुछ कम होगा। हालांकि, इसके साथ ही तेज हवाएं, मेघगर्जन और आकाशीय बिजली की घटनाएं भी हो सकती हैं, जिन्हें देखते हुए सावधानी बरतने की जरूरत है।
मौसम विभाग ने स्थिति को देखते हुए कई जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है। चूरू, सीकर, नागौर, बीकानेर और श्रीगंगानगर जिलों में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है, जहां तेज आंधी, मेघगर्जन और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। इन क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिससे कच्चे मकानों, पेड़ों और बिजली लाइनों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है।
इसके अलावा सवाईमाधोपुर, टोंक, बूंदी, बारां, कोटा, जयपुर और हनुमानगढ़ जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में हल्की बारिश, धूलभरी हवाएं और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है। हवाओं की गति 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है, जिससे स्थानीय स्तर पर मौसम का असर देखने को मिलेगा।
मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। विशेष रूप से आंधी और बिजली के समय खुले स्थानों या पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बंद रखने और अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की भी हिदायत दी गई है।
राजस्थान में इस तरह का अचानक मौसम परिवर्तन आमतौर पर पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण होता है। यह प्रणाली सर्दियों और गर्मियों के बीच के समय में अधिक प्रभावी होती है और इसके कारण आंधी, बारिश और ओलावृष्टि जैसी घटनाएं देखने को मिलती हैं। इस बार भी इसी वजह से प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ली है।
कुल मिलाकर, प्रदेश में बदले मौसम ने जहां एक ओर लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी है, वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए चिंता भी बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में मौसम की गतिविधियों पर सभी की नजर बनी रहेगी, क्योंकि यह तय करेगा कि राहत का यह दौर कितने समय तक जारी रहता है और इसका कृषि तथा जनजीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है।


