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इस हफ्ते शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना, 5 बड़े फैक्टर्स पर नजर

इस हफ्ते शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना, 5 बड़े फैक्टर्स पर नजर

भारतीय शेयर बाजार के लिए 27 अप्रैल से शुरू होने वाला सप्ताह काफी महत्वपूर्ण और उतार-चढ़ाव भरा रहने की संभावना है। वैश्विक और घरेलू स्तर पर कई ऐसे कारक सक्रिय हैं, जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। निवेशकों की नजर खासतौर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति बैठक, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। इसके अलावा तकनीकी संकेत भी बाजार की चाल को प्रभावित करेंगे, जिससे ट्रेडर्स और निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

सबसे पहले बात करें वैश्विक तनाव की, तो ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है। ईरान द्वारा अमेरिका के साथ बातचीत से इनकार करने और इजराइल के साथ टकराव की स्थिति ने कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया है। हाल ही में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बंद हुईं, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। हालांकि कुछ समय पहले होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने की खबरों से तेल की कीमतों में गिरावट आई थी, लेकिन यह राहत अस्थायी साबित हुई। तेल की कीमतों में यह अस्थिरता भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत आयातित तेल पर निर्भर है और इसकी कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई और कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ता है।

इस सप्ताह का दूसरा बड़ा कारक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति बैठक है, जो 28 अप्रैल से शुरू होकर 29 अप्रैल को समाप्त होगी। इस बैठक के फैसलों पर वैश्विक निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार को उम्मीद है कि इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और दरें 3.50 से 3.75 प्रतिशत के बीच स्थिर रहेंगी। हालांकि, फेडरल रिजर्व के बयान और भविष्य की नीति संकेतों का असर शेयर बाजार पर तुरंत दिखाई दे सकता है। यदि केंद्रीय बैंक सख्त रुख अपनाता है तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि नरम संकेत मिलने पर तेजी देखने को मिल सकती है।

तीसरा महत्वपूर्ण पहलू विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की लगातार बिकवाली है। अप्रैल महीने में अब तक एफआईआई भारतीय बाजार से 56 हजार करोड़ रुपये से अधिक की निकासी कर चुके हैं। शुक्रवार को ही उन्होंने करीब 8 हजार करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे बाजार पर दबाव बना रहा। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशक यानी डीआईआई बाजार को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं और उन्होंने इस अवधि में करीब 39 हजार करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। हालांकि एफआईआई की बिकवाली का असर अधिक व्यापक होता है, जिससे बाजार में कमजोरी बनी रहती है।

चौथा प्रमुख कारक इस सप्ताह आने वाले कंपनियों के तिमाही नतीजे हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध 200 से अधिक कंपनियां अपनी चौथी तिमाही के परिणाम घोषित करेंगी। इनमें कई बड़ी और प्रभावशाली कंपनियां शामिल हैं, जिनके नतीजों का सीधा असर बाजार पर पड़ सकता है। निवेशक खासतौर पर कोल इंडिया, अल्ट्राटेक सीमेंट, मारुति सुजुकी, बजाज फाइनेंस, अडाणी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व, हिंदुस्तान यूनिलीवर और कोटक महिंद्रा बैंक जैसी कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर रखेंगे। इसके अलावा एसीसी, अडाणी पावर और डीमार्ट के नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। यदि इन कंपनियों के परिणाम उम्मीद से बेहतर रहते हैं तो बाजार को सहारा मिल सकता है, अन्यथा गिरावट का दबाव बढ़ सकता है।

तकनीकी दृष्टिकोण से देखें तो निफ्टी फिलहाल अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर के आसपास ट्रेड कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार 23,900 का स्तर टूटने के बाद निफ्टी के लिए अगला मजबूत सपोर्ट 23,500 के आसपास है। यदि यह स्तर भी टूटता है तो बाजार में और गिरावट आ सकती है। वहीं ऊपर की ओर 24,200 से 24,500 के बीच का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस के रूप में देखा जा रहा है। जब तक बाजार इस रेंज को पार नहीं करता, तब तक तेजी सीमित रह सकती है। तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता और वैश्विक संकेतों में सुधार के बिना बाजार में बड़ी तेजी की संभावना कम है।

इस सप्ताह के ट्रेडिंग पैटर्न पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। विश्लेषकों के अनुसार मंगलवार और बुधवार को बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जो सक्रिय ट्रेडर्स के लिए अवसर पैदा करेगा। वहीं गुरुवार का सत्र बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन का उच्च और निम्न स्तर आगे के ट्रेंड का संकेत दे सकता है। यदि बाजार गुरुवार के उच्च स्तर को पार करता है तो तेजी का रुख बन सकता है, जबकि निचले स्तर से नीचे जाने पर मंदी का दबाव बढ़ सकता है।

पिछले सप्ताह के प्रदर्शन पर नजर डालें तो बाजार में कमजोरी का रुख देखने को मिला था। निफ्टी करीब 2 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में भी लगभग 1000 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान आईटी, ऑटो और कंज्यूमर सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई। शुक्रवार को निफ्टी 23,898 के स्तर पर बंद हुआ, जो बाजार की कमजोरी को दर्शाता है।

कुल मिलाकर आने वाला सप्ताह निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जहां वैश्विक घटनाक्रम, आर्थिक संकेत और कंपनियों के प्रदर्शन मिलकर बाजार की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहकर निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है और प्रमुख घटनाओं पर नजर बनाए रखना आवश्यक होगा।

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