कोटा से सामने आई JEE Main परीक्षा को लेकर नई जानकारी ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों के बीच चर्चा तेज कर दी है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA द्वारा जारी JEE Main परिणामों के विश्लेषण में यह तथ्य सामने आया है कि अलग-अलग शिफ्टों में समान परसेंटाइल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के अंकों में बड़ा अंतर देखने को मिला है। इससे एक बार फिर परसेंटाइल आधारित मूल्यांकन प्रणाली और मल्टी-शिफ्ट परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
शिक्षा विशेषज्ञ देव शर्मा के अनुसार अप्रैल सत्र की कुल 9 शिफ्टों में से केवल 2 शिफ्ट ऐसी रहीं, जिनमें छात्रों ने 300 में से पूरे 300 अंक हासिल कर 100 परसेंटाइल प्राप्त किया। वहीं एक अन्य शिफ्ट में केवल 285 अंक पाने वाले छात्र को भी 100 परसेंटाइल मिल गया। इसका अर्थ यह है कि उस शिफ्ट में 285 अंक ही सबसे अधिक थे, इसलिए वह छात्र उस सत्र का टॉपर माना गया।
यही नहीं, 99 परसेंटाइल पाने वाले छात्रों के अंकों में भी उल्लेखनीय अंतर सामने आया है। एक शिफ्ट में 196 अंक प्राप्त करने वाले छात्र को 99 परसेंटाइल मिला, जबकि दूसरी शिफ्ट में केवल 165 अंक पर ही 99 परसेंटाइल हासिल हो गया। यानी अलग-अलग शिफ्टों में समान परसेंटाइल के लिए आवश्यक अंकों में लगभग 31 अंकों का अंतर रहा। इससे यह साफ होता है कि किसी शिफ्ट का कठिनाई स्तर, प्रतियोगिता का स्तर और उस शिफ्ट में छात्रों का प्रदर्शन परसेंटाइल पर सीधा असर डालता है।
यदि 100 परसेंटाइल की बात करें तो न्यूनतम 285 अंक पर भी यह स्कोर मिला, जबकि अधिकतम 300 अंक तक गए। यानी 100 परसेंटाइल प्राप्त करने के लिए भी सभी शिफ्टों में समान अंक जरूरी नहीं थे। यही कारण है कि कई बार छात्र प्रतिशत अंक देखकर भ्रमित हो जाते हैं, जबकि वास्तविक चयन परसेंटाइल और ऑल इंडिया रैंक के आधार पर होता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि जेईई मेन परीक्षा कई दिनों और कई शिफ्टों में आयोजित होती है। हर शिफ्ट का प्रश्नपत्र अलग होता है। स्वाभाविक रूप से हर पेपर का कठिनाई स्तर भी अलग हो सकता है। यदि केवल प्राप्त अंकों के आधार पर परिणाम तय किए जाएं तो यह उन छात्रों के साथ अन्याय होगा, जिन्होंने कठिन पेपर दिया हो। इसी कारण NTA सामान्य अंक प्रणाली की बजाय परसेंटाइल प्रणाली अपनाता है।
परसेंटाइल का अर्थ यह नहीं होता कि छात्र ने उतने प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। इसका अर्थ यह होता है कि उस छात्र ने अपनी शिफ्ट में कितने प्रतिशत छात्रों से बेहतर प्रदर्शन किया है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी शिफ्ट में 100 छात्र बैठे हों और किसी छात्र ने सबसे अधिक अंक प्राप्त किए हों, तो उसे 100 परसेंटाइल दिया जाएगा, भले ही उसके अंक 300 हों या 285।
यही वजह है कि अलग-अलग शिफ्टों के छात्रों की तुलना सीधे अंकों से नहीं की जा सकती। एक आसान शिफ्ट में 200 अंक लाने वाला छात्र और कठिन शिफ्ट में 170 अंक लाने वाला छात्र समान या अलग परसेंटाइल पा सकता है। इसलिए परिणाम समझने के लिए परसेंटाइल प्रणाली को जानना जरूरी है।
मेरिट सूची तैयार करने में भी NTA परसेंटाइल स्कोर को प्राथमिकता देता है। छात्रों की ऑल इंडिया रैंक उनके सर्वश्रेष्ठ NTA स्कोर के आधार पर तय की जाती है। हालांकि जब दो या अधिक छात्रों का परसेंटाइल समान हो जाता है, तब टाई-ब्रेकिंग प्रक्रिया लागू की जाती है। इस वर्ष NTA ने तीन साल बाद इसमें बदलाव करते हुए सात मानदंड तय किए हैं।
यदि दो छात्रों का कुल NTA स्कोर समान है तो सबसे पहले मैथेमेटिक्स विषय का स्कोर देखा जाता है। यदि वहां भी समानता हो तो फिजिक्स के अंक देखे जाते हैं। इसके बाद केमिस्ट्री स्कोर को आधार बनाया जाता है। यदि तब भी स्थिति समान रहती है तो सही और गलत उत्तरों की संख्या का अनुपात देखा जाता है। इसके बाद भी टाई होने पर विषयवार सही और गलत उत्तरों का अनुपात क्रमशः मैथेमेटिक्स, फिजिक्स और केमिस्ट्री में जांचा जाता है।
इस नई प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रैंकिंग अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े स्तर की परीक्षा में जहां लाखों छात्र शामिल होते हैं, वहां समान स्कोर की स्थिति आम बात है। इसलिए स्पष्ट टाई-ब्रेकिंग नियम जरूरी हैं।
कोटा जैसे शिक्षा केंद्रों में इस परिणाम विश्लेषण के बाद छात्र यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि केवल अंक देखना पर्याप्त नहीं है। कई बार कम अंक लाने वाला छात्र बेहतर परसेंटाइल हासिल कर लेता है, जबकि अधिक अंक लाने वाला छात्र दूसरी शिफ्ट के कारण अपेक्षाकृत पीछे रह सकता है। यही वजह है कि छात्रों को अपने स्कोर कार्ड का मूल्यांकन सही संदर्भ में करना चाहिए।
विशेषज्ञों ने छात्रों को सलाह दी है कि वे केवल सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे अंकों की तुलना न करें, बल्कि अपनी परसेंटाइल, संभावित रैंक और काउंसलिंग विकल्पों पर ध्यान दें। JEE Main जैसी प्रतियोगी परीक्षा में रणनीति, सही जानकारी और धैर्य बहुत महत्वपूर्ण होता है।


