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गर्मी में महंगा होगा AC, स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार

गर्मी में महंगा होगा AC, स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार

इस गर्मी में अगर आप नया AC, स्मार्टफोन, फ्रिज, टीवी, लैपटॉप या वॉशिंग मशीन खरीदने की योजना बना रहे हैं तो आपको पहले से ज्यादा खर्च करने के लिए तैयार रहना होगा। भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में एक बार फिर कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार अप्रैल के अंत तक कई प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतों में 5 प्रतिशत से लेकर 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। यह पिछले चार महीनों में तीसरी बार होगा जब इन उत्पादों के दाम बढ़ने की स्थिति बन रही है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण उत्पादन लागत में लगातार हो रहा इजाफा है। कच्चे तेल से जुड़े कच्चे माल जैसे प्लास्टिक की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसके अलावा पाम ऑयल और अन्य औद्योगिक रसायनों की लागत में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर इलेक्ट्रॉनिक और एफएमसीजी उत्पादों पर पड़ रहा है।

इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख घटक, खासकर मेमोरी चिप्स की वैश्विक कमी भी कीमतों को प्रभावित कर रही है। स्मार्टफोन और लैपटॉप जैसे उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली चिप्स की मांग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एप्लिकेशन के कारण तेजी से बढ़ी है, जिससे सप्लाई पर दबाव बना हुआ है। परिणामस्वरूप इन घटकों की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार ऊपर जा रही हैं।

इसके साथ ही रुपये की कमजोरी भी एक बड़ा कारण बनकर सामने आई है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होने से आयातित इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स की लागत बढ़ गई है। भारत में अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए आवश्यक कंपोनेंट्स विदेशों से आयात किए जाते हैं, इसलिए मुद्रा विनिमय दरों में बदलाव सीधे उत्पाद की कीमतों को प्रभावित करता है।

लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई की बढ़ती लागत भी इस समस्या को और गंभीर बना रही है। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनावों के कारण शिपिंग और ट्रांसपोर्टेशन खर्च में वृद्धि हुई है, जिससे सप्लाई चेन पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। इसका असर सीधे उपभोक्ता बाजार तक पहुंच रहा है और उत्पादों की कीमतें बढ़ रही हैं।

रिटेल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के अनुमान के अनुसार स्मार्टफोन की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं लैपटॉप की कीमतों में 8 से 10 प्रतिशत तक का इजाफा संभव है। इसके अलावा एयर कंडीशनर, टीवी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन जैसी बड़ी घरेलू इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की कीमतों में 5 से 7 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

हायर इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर बी. त्यागराजन ने भी संकेत दिए हैं कि प्लास्टिक और अन्य इनपुट लागतों में बढ़ोतरी के कारण उद्योग पर दबाव लगातार बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि गर्मियों के दौरान मांग और बढ़ती है तो अगले कुछ हफ्तों में एक और कीमत वृद्धि का दौर देखने को मिल सकता है।

कंपनियों की रणनीति भी धीरे-धीरे बदल रही है। कुछ कंपनियां सीधे कीमतें बढ़ा रही हैं, जबकि कुछ कंपनियां पैकेजिंग का साइज कम कर रही हैं ताकि कीमतें स्थिर दिखें लेकिन वास्तविक लागत का असर संतुलित किया जा सके। साबुन और डिटर्जेंट जैसे एफएमसीजी उत्पादों में भी इसी तरह के बदलाव देखे जा रहे हैं।

हायर इंडिया ने यह भी घोषणा की है कि 21 अप्रैल से उसके सभी उत्पाद श्रेणियों में 4 से 7 प्रतिशत तक की कीमत बढ़ोतरी लागू हो सकती है। यह संकेत है कि आने वाले दिनों में इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता वस्तुओं का बाजार और महंगा हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति केवल घरेलू कारकों के कारण नहीं है, बल्कि वैश्विक आर्थिक दबावों का भी परिणाम है। कच्चे माल की बढ़ती कीमतें, तकनीकी उत्पादों की बढ़ती मांग और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में अस्थिरता ने मिलकर बाजार को प्रभावित किया है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो उपभोक्ताओं के लिए आने वाला समय महंगा साबित हो सकता है। इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से मध्यम वर्गीय परिवारों का बजट प्रभावित होने की संभावना है। गर्मियों के इस सीजन में जहां AC और कूलिंग उत्पादों की मांग पहले से अधिक रहती है, वहीं कीमतों में यह वृद्धि खरीदारी के फैसलों को और कठिन बना सकती है।

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